पाकिस्तान में ईस्ट इंडिया कंपनी- पार्ट 2 शुरू, चीन पाकिस्तान में बसायेगा 5 लाख चीनियों का शहर
         Date: 13-Nov-2018

 
 
चीन पाकिस्तान के साथ कुछ ऐसा ही व्यापार कर रहा है। जैसे ईस्ट इंडिया कंपनी ने 350 साल पहले भारत में शुरू किया था। यानि पहले व्यापार शुरू करना और फिर व्यापार बढ़ाने के बहाने अपनी कॉलोनी बसाना, फिर अंत में पूरे देश पर राज करना। ठीक ऐसा इतिहास पाकिस्तान ने फिर से दोहराया जा रहा है। इस बार व्यापारी पड़ोसी चीन है। जिसने पाकिस्तान ने 60 बिलियन डॉलर खर्च कर सीपेक प्रोजेक्ट यानि चीन-पाकिस्तान इकॉनोमिक कॉरिडोर तैयार किया है। अब चीन इस कॉरिडोर के आसपास व्यापारिक औऱ रिहायशी कॉलोनी बनाने वाला है।
 
 
चीन की पहली कॉलोनी बनेगी, पोर्ट सिटी ग्वादर के पास। जोकि फायनेनशिंय़ल डिस्ट्रिक्ट के तौर पर विकसित की जायेगी। जो चीनी ग्वादर पोर्ट या सीपेक के लिए काम करेंगे। वो इस शहर में रहेंगे। यहां रहने वाले चीनियों की अनुमानित संख्या 5 लाख से ज्यादा होगी। इस शहर को बनाने की पूरी कवायद शुरू हो चुकी है। 2022 तक ये शहर पूरी तरह बनकर तैयार हो जायेगा।
 
 

 चीनी प्रेज़िडेंट शी जिनपिंग पाकिस्तान के दौरे पर
 
 
चीन अफ्रीका औऱ सेंट्रल एशिया में इस तरह के शहर पहले ही बना चुका है। एशिया में प्रभुत्व जमाने की कड़ी में चीन ने पाकिस्तान में CPEC प्रोजेक्ट 2014 में शुरू किया था। जिसकी शुरूआती लागत 45 बिलियन डॉलर बताय़ी गयी। लेकिन इसके बाद इसकी कुल लागत बढ़कर 62 बिलियन तक जा पहुंची। CPEC चीन के Belt and Road initiative (BRI) का एक बुनियादी हिस्सा है। जिसके बाद एशिया में चीन में रेलवे इंफ्रास्ट्रकचर, तेल पाइपलाइन, हाईवे औऱ समुद्री रास्ते तैयार करने वाला है। इसके लिए चीन के लिए CPEC प्रोजेक्ट खासा महत्वपूर्ण है।
 
 
चीन-पाकिस्तान इकॉनोमिक कॉरिडोर का नक्शा
 
 
हालांकि CPEC प्रोजेक्ट के खिलाफ कोई आवाज़ न उठे और पाकिस्तान सरकार पूरी तरह चीन के सामने झुकी रहे। इसके लिए चीन साल-दर-साल पाकिस्तान को अरबों डॉलर का कर्ज देता आ रहा है।
 
 
 
चीन द्वारा पाकिस्तान को दिया कर्ज
 
2017 में 6.0 बिलियन डॉलर
2018 में 3.9 बिलियन डॉलर
10 बिलियन डॉलर का अतिरिक्त कर्ज
 
 
 
 

 सीपेक से पाकिस्तानी लोगों को कोई सीधा फायदा नहीं मिला
 
 
फिलहाल पाकिस्तान को चीन का 20 बिलियन डॉलर कर्ज देना है। इसके अलावा पाकिस्तान को 2020 से 2024 तक सालाना 4.5 बिलियन डॉलर का भुगतान अलग से करना होगा। उसके ऊपर चीन सीपेक के प्रोजेक्ट पर जो 22 बिलियन डॉलर खर्च कर रहा है। वो भी पाकिस्तान को भुगतना होगा। कुल मिलाकर पाकिस्तान के कर्ज के जाल में फंस चुका है।
 
 
पाकिस्तान की हालत ये है कि उसके पास डॉलर रिजर्व पूरी तरह सूख चुका है। साथ ही पाकिस्तान को पहले से लिए गये कर्ज का ब्याज चुकता करने के लिए भी पैसे नहीं है। और कर्ज लेने के लिए पाकिस्तान के पीएम इमरान खान बीज़िंग भी गये। लेकिन चीन से फिलहाल कोई कर्ज नहीं मिला।
 
 
 
 पाकिस्तान में चीन के दखल को दर्शाती एक पुरानी तस्वीर
 
 
ऐसी हालत में पाकिस्तान जब कर्ज देने की स्थिति में होगा तो चीन पाकिस्तान के कर्ज के बदले में जमीन और प्रोजेक्ट्स को लीज़ के बहाने कब्जे में ले लेगा। जैसा कि चीन ने श्रीलंका के हंबनटोटा में किया। चीन ने हंबनटोटा में भी एक पोर्ट सिटी तैयार की थी। जब श्री लंका कर्ज नहीं दे पाया। तो श्रीलंका को मजबूरन पूरी पोर्ट सिटी चीन को 99 साल की लीज़ पर देनी पड़ी। यानि श्रीलंका में वो पोर्ट सिटी पूरी तरह है चीन की कॉलोनी बन गया है।
 
चीन ने पाकिस्तान में भी इसी तरह की कॉलोनी बनानी शूरू कर दी है। देखना ये कि पाकिस्तान कितनी जल्दी चीन के सामने घुटने टेकता है।