पाकिस्तान ने चली एक और बड़ी चाल, POJK के हिस्से गिलगित-बल्तिस्तान को देगा प्रांत का दर्जा
         Date: 29-Nov-2018
 
 
पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने POJK यानि पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू कश्मीर के क्षेत्र गिलगित-बल्तिस्तान को संवैधानिक प्रांत का दर्जा देने को मंजूरी दे दी है। यानि पाकिस्तान की चाल सही बैठी तो गिलगित-बल्तिस्तान पाकिस्तान का 5वां प्रांत बन जायेगा। जम्मू कश्मीर की रीज़नल, डेमोग्राफिक पॉलिटिक्स और कूटनीति के लिहाज से पाकिस्तान के लिए ये बड़ा पॉलिसी शिफ्ट होगा। जबकि भारत के लिए भी पाकिस्तान की ये कोशिश बड़ा झटका साबित होगा। क्योंकि जम्मू कश्मीर अधिमिलन 1947 के मुताबिक गिलगिल-बल्तिस्तान का हिस्सा जम्मू कश्मीर विरासत का हिस्सा है।
 
हालांकि पाकिस्तान ने ये दावा करता रहा कि ये क्षेत्र जम्मू कश्मीर का हिस्सा नहीं है। लेकिन The census Report of 1941 के मुताबिक साफ होता है कि गिलगित एजेंसी जम्मू कश्मीर रियासत का हिस्सा है।
गिलगित-बल्तिस्तान का कुल क्षेत्र- 64817 वर्ग किमी
 
जिसको पाकिस्तान ने 1947 में हमला कर अपने कब्ज़े में कर लिया था। पाकिस्तान 1947 से लेकर 1970 इस क्षेत्र में एक स्वायत्त यूनिट के तौर पर शासन करता था। इसके बाद 1970 इसका नाम बदल कर नॉर्दर्न एरिया रखा गया और लिमिटेड स्वायत्ता दी गयी। इसके बाद 2009 में आसिफ अली जरदारी सरकार ने फिर से इस क्षेत्र का नाम बदलकर गिलगित बल्तिस्तान रख दिया। मई 2018 सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पाकिस्तान सरकार ने गिलगित-बल्तिस्तान ऑर्डर 2018 पास किया। जिसमें गिलगित बल्तिस्तान को पाकिस्तान का संवैधानिक प्रांत बनाने के लिए योजना बनाने का काम सौंपा गया। इसी कमेटी की सिफारिशों पर काम करते हुए पाकिस्तानी पीएम इमरान खान ने मंजूरी दी। कमेटी की सिफारिशों के मुताबिक गिलगित-बल्तिस्तान को सीनेट और नैशनल एसेंबली में 3-3 सीटों का प्रतिनिधित्व दिये जाने की सिफारिश की गयी है। हैरानी की बात ये कि पहली बार क्षेत्रीय राजनीति के मुद्दे पर पाकिस्तान सरकार के 3 इदारे विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय़ और आर्मी एक पेज पर एक साथ खड़े हैं। पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट पहले ही गिलगित-बल्तिस्तान इसके फेवर में है। जिसका सीधा मतलब ये कि गिलगित बल्तिस्तान को पाकिस्तान का प्रांत बनाने में अंदरूनी किसी दिक्कत का सामना नहीं करना पडेगा।
 

 अब बस नैशनल एसेंबली और राष्ट्रपति की मंजूरी बाकी
 
यहां गौर करने वाली बात ये है कि पाकिस्तान के संविधान के मुताबिक गिलगित-बल्तिस्तान फेडरल तंत्र का हिस्सा नहीं है। यहां तक कि पाकिस्तान की फेडरल सरकार और उसके तमाम इदारों, जैसे सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग का गिलगित बल्तिस्तान में सीधा दखल नहीं होता था। आजाद कश्मीर (पीओजेके) की सुप्रीम कोर्ट ने 2010 में एक आदेश में ये साफ किया था, कि गिलगित बल्तिस्तान पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है।
 
 
 
भारत का पक्ष
 
गिलगित-बल्तिस्तान को लेकर भारत का पक्ष 1947 से ही एकदम स्पष्ट रहा है। गिलगित बल्तिस्तान मूलत: जम्मू कश्मीर का हिस्सा है, जोकि भारतीय संविधान के मुताबिक भारत का अभिन्न अंग है। जिसपर पाकिस्तान ने अवैध कब्जा किया हुआ है। मई 2018 में जब पाकिस्तान सरकार ने गिलगित-बल्तिस्तान ऑर्डर 2018 जारी किया था, तब भी भारत ने पाकिस्तान की इस कोशिश का विरोध किया था। भारत ने पाकिस्तान की इस कोशिश को भारत की संप्रभुता पर हमला बताया था। पाकिस्तान की इस ताजा पहल पर अब तक भारत सरकार की तरफ से कोई बयान जारी नहीं हुआ है।