क्या शराब और लौंडेबाज़ी के चक्कर में गयी तालिबान के आका समी-उल-हक की जान?
         Date: 06-Nov-2018

 
 
2 नवंबर को जब पाकिस्तानी में तहरीके-लब्बैक के मुल्ला पूरे देश में आसिया की रिहाई के नाम पर आतंक मचा रहे थे, तब शाम को खबर आय़ी कि पाकिस्तानी तालिबान के पितामह समी-उल-हक की हत्या रावलपिंडी के बहरिया टाउन में उन्हीं के घर में कर दी गयी। पहले खबर आई कि गोली मारकर हत्या की गयी, लेकिन बाद में समी-उल-हक के बेटे मौलाना हामिद-उल-हक ने लोकल मीडिया को बताया कि हत्या चाकूओं से गोदकर की गयी है। हामिद ने दावा किया कि हत्या के वक्त वो घर में ही दूसरे कमरे में मौजूद थे, उनका ड्राइवर 15 मिनट के लिए बाहर गया, लेकिन जब वो वापिस आया तो देखा कि बिस्तर पर समी-उल-हक खून से लथपथ पड़े हुए हैं। अस्पताल ले जाने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी। हामिद उल हक के बयान में कई खामियां थी, जिसकी जांच की जानी थी। लेकिन इसके बाद कुछ ऐसा हुआ कि न तो पाकिस्तानी मीडिया न हत्या की वजह जानने की कोशिश की औऱ ना ही प्रशासन ने । समी-उल-हक के शव को बिना पोस्टमार्टम के दफना दिया गया। साथ दफना दिया सच, कि आखिर समी-उल-हक की हत्या क्यों हुई।
 
 

 समी-उल-हक के नमाज-ए-जनाजा में शामिल भीड़
 
 
लेकिन सच आईएसआई के बंद कमरे से धीरे-धीरे रिसना शुरू हो गया है, खबरों की माने तो मौलाना की हत्या के तार शराब औऱ लौंडेबाजी से जाकर जुड़ते हैं। यहीं वजह है कि अगर सच सामने आया तो मुस्लिमों के मुहाफिज, अफगानिस्तान में तालिबान सरकार और हक्कानिया नेटवर्क के संरक्षक की इमेज धूल में मिल जायेगी। लेकिन सच छिप नहीं सकता। पुख्ता सूत्रों की माने तो हत्या के वक्त मौलाना के साथ उस वक्त कमरे में एक शख्स और मौजूद था। इसी वजह से मौलाना ने अपने ड्राइवर को कुछ देर के लिए बाहर भेज दिया था। इसकी जानकारी मौलाना के बेटे को भी थी। मौलाना उस शख्स के साथ कई जाम हलक से नीचे उतार चुके थे, कई सिगरेट फूंक चुके थे, लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ कि उस शख्स ने मौलाना को चाकूओं से गोद दिया। हत्या के बाद मौका-ए-वारदात की तस्वीरें कहानी साफ बयां करती हैं।
 

 
हत्या के वक्त की कहानी बयां करती तस्वीरें 

 
 

 
 
 
ऐसी शर्मनाक हालात के चलते ही न तो परिवार वालों ने हत्या का कारण जानने की कोशिश की औऱ न ही पाकिस्तान सरकार ने। आनन-फानन में मौलाना का नमाज-ए-जनाजा पढ़कर मामले को निपटा दिया गया। इमरान खान के बेहद करीबी माना जाता था, पीटीआई की केपीके सरकार मौलाना समी-उल-हक को कई हजार करोड़ की सरकारी इमदाद दी थी। पाकिस्तान की सियासी पार्टियों ने तालिबान के संरक्षक को सरकारी फंड देने के चलते काफी सवाल उठाये थे। यहां तक कि इमरान खान को तालिबान खान तक कहा जाने लगा।
 
 
जाहिर मौलाना समी-उल-हक भी उसी तालिबानी कड़ी का एक मोहरा निकला, जो पब्लिक लाइफ में इस्लामी नजरिये औऱ कानून के नाम पर दुनिया भर इंसानियत का कत्लेआम करते आये हैं, लेकिन निजी जिंदगी में अय्याशी को छिपाये रहे। आपको याद होगा अल-कायदा चीफ ओसामा बिन लादेन के पास भी सेक्स सीडीज़ बरामद हुई थी।
 

 
हक्कानी तालिबान के मुखिया के साथ समी-उल-हक