एक कॉन्स्टेबल बना घाटी के आतंकियों की मौत
         Date: 27-Sep-2018

 
कहते हैं कि वीरों की शहादत उनका अंत नहीं बल्कि शुरूवात होती है। वो भले ही इस दुनिया से चले जाएं मगर उनकी याद हमारे दिलों में हमेशा जिन्दा रहती है। ऐसी ही कहानी है एक जाबांज सिपाही की जिसकी जिंदगी तो बहुल छोटी थी पर उनके कारनामें बहुत बडे़ हैं। आज हम नमन करेगें जम्मू कश्मीर पुलिस के कॉन्स्टेबल मोहम्मद सलीम शाह की शहादत को।
 
मोहम्मद सलीम जम्मू कश्मीर के कुलगाम जिले के रहने वाले थे। वो 2016 में स्पेशल पुलिस फोर्स में भर्ती हुए पर उनकी बहादुरी और मेहनत की बदौलत उन्हे प्रमोट करके जम्मू कश्मीर पुलिस में कॉन्स्टेबल बनाया गया था। य मोहम्मद सलीम की अच्छे कामों का ही परिणाम था कि वो जम्मू कश्मीर पुलिस और सेना के ज्वांईट ऑपरेशन का हिस्सा थे जिसमें उन्होंने आतंकी आदिल पठान को ढेर किया था। जिसका बदला लेने के लिए आतंकियों ने छुट्टी पर अपने घर आए सलीम को 21 जूलाई 2018 को उनके घर से अगवा करके बड़ी ही बेरहमी से मार डाला।
 

 
 
मोहम्मद सलीम कितने शेर दिल युवा थे इस बात का पता इसी से लगाया जा सकता है कि जब आतंकियों ने उन्हे अगवा किया तब उनका एक वीडियों रिकाॅर्ड किया था जिसमें आतंकियों ने मुहम्मद सलीम को गोली मारने से पहले कुछ सवाल किया था जिसका सलीम ने बड़ी ही बहादुरी से जवाब दिया। आतंकियों ने मुहम्मद सलीम से जब पुछा कि क्या उन्होंने ही आतंकवादी आदिल पठान को मरवाया था ] तो इसके जवाब में उन्होने एक पल भी डरे बगैर कहा कि हां मैंने ही आतंकी आदिल पठान को ढ़ेर करवाया था। अपनी मौत को इतने करीब देखने के बाद भी सलीम आतंकियों से ऐसे बाते कर रहें थे मानो उन्हें मौत से कोई फर्क ही नहीं पड़ता।
 
वो देश के ऐसे जांबाज सिपाही थे जो घाटी में बैठे आतंकी सोच के लोगों के लिए खौफ थे जिससे घबरा कर आतंकियों ने उन्हें अगवा करके मार डाला। आतंकवादियों ने भले ही मुहम्मद सलीम की जान ले ली पर वो आखरी वक्त तक भी उनकी आंखों में मौत का डर ना देख सके। अपने इसी बहादुरी और जिंदादिली की वजह से मोहम्मद सलीम हमारे दिलों में हमेंशा जिन्दा रहेंगे।