जम्मू: VDCs से वापिस नहीं लिए जाएंगे हथियार, गवर्नर का फैसला
         Date: 01-Jan-2019
 
जम्मू क्षेत्र में VDCs यानी ग्राम सुरक्षा समितियों से हथियार वापिस नहीं लिए जाएंगे। गवर्नर सत्यपाल मलिक ने लोगों में फैली कन्फ्यूज़न को दूर कर दी है। दरअसल पहले खबर आयी थी पुलिस हेडक्वार्टर के आदेश पर पुलिस रामबन, डोडा, किश्तवाड़ जैसे ज़िलों में काम कर रही ग्राम सुरक्षा समितियों से उनके हथियार वापिस ले रही है। इसके बाद जम्मू की कईं राष्ट्रवादी राजनीतिक पार्टियों ने इस फैसले के खिलाफ आंदोलन खड़ा करने की चेतावनी दी थी। तर्क ये था कश्मीर घाटी से बाहर राज्य के अल्पसंख्यक यानी हिन्दु मुस्लिम आतंकवाद से इन्हीं VDCs के चलते सुरक्षित हैं। वरना नब्बे के दशक में जिस तरीके से कश्मीर घाटी से हिन्दुओं को मारकर भगाया गया, वो वारदात जम्मू के इन इलाक़ों में भी दोहराई जा सकती थी। लेकिन इन क्षेत्रों में तैनात हथियारधारी ग्राम सुरक्षा समितियों के चलते आतंकवाद घाटी के बाहर पाँव नहीं पसार पाया, और आज जबकि कुछ दिनों पहले किश्तवाड़ में परिहार बंधुओं की हत्या हुयी थी। तो ऐसे समय में हिन्दुओं में और विश्ववास बनाये रखने के लिए VDCs से हथियार वापिस लेने का फैसला कतई सही नहीं कहा जा सकता।
 
 
 
जम्मू में तैनात हैं कुल 27 हज़ार VDCs
1999 के बाद तैनात किये गए थे VDCs
 
 

 
 
इसीलिए राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने अपने एडवाइजर्स की एक मीटिंग बुलाई थी। जिसमें स्थिति का करीब से जांचने के लिए कहा गया। जिसमे पता चला कि पुलिस प्रशासन ने उन VDCs से हथियार वापिस लेने की मुहीम शुरू की थी। जिनकी उम्र 60 के पार हो चुकी है, ऐसे में चूंकि वो आतंकियों का ठीक से मुक़ाबला नहीं कर पाएंगे। मामले की गंभीरता को देख केंद्रीय मंत्री जीतेन्द्र सिंह ने गवर्नर से बात कर सलाह दी कि या तो VDCs की उम्र का पैमाना बढाकर 65 कर दिया जाए या फिर उसी फॅमिली के किसी मेंबर को VDC बना दिया जाए। इस पर राज्यपाल ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही इस पर कोई फैसला लिया जाएगा , लेकिन फिलहाल किसी VDC से हथियार वापिस नहीं लिया जाएगा।
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