अब चीन लायेगा इस्लाम का चायनीज वर्जन, बनाया कानून, अगले 5 साल में होगा लागू
         Date: 08-Jan-2019
 
 
टेक्नोलॉजी और गैजेट्स के मामले में तो चीन अपनी सस्ती-टिकाऊ चायनीज़ कॉपी और वर्जन के लिए बेहद फेमस है। लेकिन क्या किसी धर्म का भी कोई चायनीज़ वर्जन ईजाद किया जा सकता है। सुनकर थोड़ा अटपटा लगता है लेकिन ये सच है, चीन जल्द ही इस्लाम का चायनीज़ वर्जन लायेगा। इसके लिए खाका तैयार कर लिया गया है। चीनी सरकार ने शनिवार को 8 इस्लामिक संगठनों के साथ मीटिंग कर एक कानून पास किया है। जिसके तहत अगले 5 सालों में इस्लाम का चायनीज वर्जन तैयार कर लिया जायेगा। चीन के तमाम मुस्लिमों को ये वर्जन ही प्रैक्टिस करना होगा।
 
 
 
 
कैसा होगा बदलाव? 
  • इस योजना के तहत इस्लाम की बेसिक टीचिंग और प्रैक्टिस में बदलाव किया जायेगा।
  • ऐसे बदलाव किये जायेंगे, जिससे मुस्लिम अपने आप को चायनीज़ सोशललिज्म से जोड़ सके, न कि अरब के इस्लाम से।
  • इस वर्जन में इस्लामिक पहनावे में बदलाव, रोजमर्रा की प्रैक्टिस जैसे नमाज़ पढ़ना, रोजा रखना जैसी पारम्परिक बाध्यता को खत्म किया जायेगा।
  • साथ ही दाढ़ी बढ़ाने भी पांबदी की तैयारी है।
  • यहां तक कि मुस्लिमों को बच्चों के नाम भी चायनीज़ संस्कृति को ध्यान में रखते हुए रखने होंगे। यानि वो नाम जोकि कट्टर इस्लामिक लगें, उन पर पाबंदी लगायी जा सकती है। 
 
 
जिसके बाद नास्तिक चीन में इस्लाम को आधिकारिक रूप से 5वें धर्म का दर्जा मिल जायेगा। अब तक चीन में Taoism, Buddhism, Catholicism, और Protestantism मान्यता मिली हुई है।
 
 
जिनजियांग में इस तरह के प्रोपेगंडा भित्तिचित्र लगाये गये हैं, जिसमें नये इस्लाम को दिखाया गया है 
 

 
 
दरअसल चीन में 20 लाख से ज्यादा मुस्लिम रहते हैं, जोकि ज्यादातर जिनजियांग क्षेत्र के उईगर मुस्लिम के नाम से जाने जाते हैं। चीन सरकार आमतौर पर इस समुदाय को अलगाववादी प्रवृति का मानती रही है। जिसके चलते सरकार ने इन पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। यहां तक कि रोजा रखने से लेकर, नमाज पढ़ने के तौर-तरीकों पर पाबंदी लगा दी है। चीन सरकार इस्लाम के मौजूदा वर्जन को एक मानसिक रोग समझती है। इसके लिए चीन ने इन इलाकों में सुधार केंद्र बना रखे हैं। जहां उईगर मुस्लिमों रखा जाता है, उनको ट्रेनिंग भी दी जाती है। इन सुधार केंद्रों को लेकर दुनिया भर आवाज़ उठती रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन सुधार केंद्रों में ट्रेंनिग के नाम पर टॉर्चर किया जाता है। यहां तक की यूएन ने भी इस मामले को लेकर चीन सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। दुनिया भर में हो रही आलोचना को देखते हुए चीन सरकार ने नया प्लान तैयार किया है। जिसके तहत ही ये इस्लाम का चायनीज़ वर्जन लाने की योजना बनायी गयी है।