18 सदस्यीय सूफी डेलीगेशन ने किया कश्मीर का दौरा, कहा- “एक भी लोकल ने ह्यूमन राइट्स के उल्लंघन की शिकायत नहीं की”, पाकिस्तान को सुनाई खरी-खरी
   14-अक्तूबर-2019

 
देशभर की बड़ी सूफी दरगाहों की काउंसिल के बैनर तले 18 सदस्यों ने कश्मीर घाटी का दौरा करने के बाद ज़मीनी हकीकत जानी। जिसके बाद एक प्रेस कांफ्रेंस में डेलीगेशन को लीड करने रहे अजमेर शरीफ के सज्जादनशीं सैयद नसीरूद्दीन चिश्ती ने साफ किया कि उनके दौरे के दौरान उन्हें न तो ह्यूमन राइट्स के उल्लंघन का कोई मामला मिला। बल्कि पाकिस्तान जेहाद औऱ इस्लाम के नाम पर कश्मीर में प्रोपगैंडा फैलाने में लगा है।
 
डेलीगेशन को लीड कर रहे अजमेर शरीफ दरगाह के सूफी संत नसीरूद्दीन चिश्ती ने कहा कि “हम यहां लोकल लोगों से मिले, किसी ने भी ह्यूमन राइट्स के वॉयलेशन की बात नहीं की। पाकिस्तान का प्रोपगैंडा झूठा है, हां फोन जैसी सर्विस पर पाबंदी थी, लेकिन जब ऐसे फैसले (आर्टिकल 370 हटाना) लिये जाते हैं तो ऐसी फैसले लेने पड़ते हैं।“
 
नसीरूद्दीन चिश्ती ने कश्मीर औऱ इस्लाम के नाम पर भड़काने के लिए पाकिस्तान को जमकर खरी-खरी सुनाई। पत्रकारों से बात करते हुए नसीरूद्दीन चिश्ती ने कहा कि- “पाकिस्तान की तरफ से जितने बयानात आये, खासतौर पाकिस्तान के सदर ने जो खासतौर से जेहाद शब्द का इस्तेमाल किया वो नाकाबिले-बर्दास्त है और उनको शर्म आनी चाहिए। जो मुल्क के मामलात है, जो दुनिया के मामलात हैं, उनके अंदर जेहाद का इस्तेमाल करके, लोगों के सेन्टीमेंट्स से खिलवाड़ करके य़े एक मुसलमान को ज़ेब (शोभा) नहीं देता। खासतौर से मुस्लिक कंट्री को ज़ेब नहीं देता औऱ पाकिस्तान को जेहाद अगर करना है तो जाके फिलिस्तीन में करे, म्यांमार में बोले, चायना में जो हो रहा है उनके लिए बोले। हिंदूस्तान के कश्मीर के मैटर जोकि हमारे देश का इंटीग्रल पार्ट है, इस मामले में किसी को दखल देने का अख्तियार नहीं है।”
 
 
भारत के मुसलमानों के प्रति साहनुभूति दिखाकर प्रोपगैंडा फैलाने की पाकिस्तान की साजिश पर नसीरूद्दीन चिश्ती ने पाकिस्तान को साफ संदेश देते हुए कहा कि- “.. हम यहां के मुसलमान हैं। हमें बाहर के किसी मुसलमान की रहनुमाई नहीं चाहिए। हमारे खुद के रहनुमा यहां मौजूद हैं। हम उनसे बेहतर कंडीशन में यहां रह रहे हैं। उनसे ज्यादा खुशहाल माहौल में यहां रह रहे हैं। तो हमें किसी बाहर के आदमी की ज़रूरत नहीं हैं। मैं उनको (पाकिस्तान) को प्रोपर मैसेज देना चाहता हूं। जेहाद के नाम पर, इस्लाम का नाम लेकर लोगों के सेंटीमेंट्स को हर्ट न करें और दुनिया के मसाइल (मामलों) को इस्लाम से न जोड़ें।”
 
आपको बता दें कि ऑल इंडिया सूफी दरगाह सज्जादनशीं काउंसिल के बैनर तले कुछ 18 सूफी सदस्य 12 अक्टूबर को कश्मीर पहुंचे थे। इस डेलीगेशन में राजस्थान, हैदराबाद, नयी दिल्ली, उत्तर प्रदेश, कर्नाटका, गुजरात और बिहार राज्यों में स्थित दरगाहों के सूफी संत नुमाइंदगी कर रहे थे। ये तमाम सूफी संत 3 दिनों तक कश्मीर के अलग-अलग हिस्सों में गये और लोकल लोगों से बात की।
 
कश्मीर घाटी के बारे में फैलायी जा रही अफवाहों के बाद अजमेर शरीफ दरगाह के मुखिया जैनुलाबिदीन अली खान ने इस डेलीगेशन को भेजने की पहल की थी। जिसमें उनके बेटे नसीरूद्दीन चिश्ती ने लीड किया।
 
डेलीगेशन ने सरकार से कश्मीर के टूरिज्म को बढ़ाने के लिए काम करने की गुजारिश में की।