J&K बीडीसी चुनाव केंद्र सरकार की बड़ी जीत, लेकिन कांग्रेस-एनसी-पीडीपी के अघोषित उम्मीदवारों और बीजेपी नेताओं की आपसी सिर-फुटौव्वल ने डुबोयी बीजेपी की नैया
   26-अक्तूबर-2019

 
जम्मू कश्मीर में त्रि-स्तरीय पंचायती राज एक्ट लागू होने के बाद पहली बार क्षेत्रीय विकास परिषद् अध्यक्ष (ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल चेयरमैन) के चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गये। जिसमें जम्मू कश्मीर और लद्दाख में 98.3% मतदाताओं ने अपने मतदान का प्रयोग किया। पिछले 70 साल के चुनावी इतिहास में ये सबसे सफल चुनाव माना जा रहा है। जिसमें न कोई हिंसा हुई, न ही कोई राजनीतिक उठापठक का गंदा खेल हुआ। साफ-सुधरे चुनाव के चलते जम्मू कश्मीर को 310 नये प्रतिनिधि मिले, जोकि नयी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करने वाले हैं।
 
जाहिर है आर्टिकल 370 के प्रावधानों को निरस्त किये जाने के बाद के माहौल में गृह मंत्रालय की बड़ी कामयाबी मानी जा रही है। नेशनल कांफ्रेंस, कांग्रेस, पीडीपी के बायकॉट और आतंकवादियों की धमकियों के बावजूद कश्मीर घाटी में भी मतदान 98 फीसदी के आसपास रहा।
 
 
हरियाणा और महाराष्ट्र की तरह जम्मू कश्मीर में भी फेल रहा बीजेपी मैनेजमेंट
 
सूत्रों के मुताबिक बीजेपी अध्यक्ष और अमित शाह ने स्टेट बीजेपी को बीजेपी के सिंबल पर चुनाव न लड़ाने की सलाह दी थी, लेकिन अंतिम निर्णय स्टेट बीजेपी को लेने का फैसला लिया। लेकिन स्टेट बीजेपी को लगा कि न तो नेशनल कांफ्रेंस, न कांग्रेस और न ही पीडीपी मैदान में है तो बीजेपी के लिए बीडीसी चुनाव में ज्यादा से ज्यादा सीटों पर कब्जा करना आसान होगा।
 
बीजेपी कुल 310 सीटों में से सिर्फ एक चौथाई 81 सीटों पर जीत दर्ज कर पाने में सफल हो पायी। यहां तक कि बीजेपी अपने गढ़ जम्मू में भी बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पायी। किश्तवाड़ को छोड़कर जम्मू के बाकी 9 जिलों में निर्दलीय उम्मीदवार बीजेपी पर भारी पड़े।
 
कश्मीर घाटी में भी बीजेपी कुल 133 सीटों में से सिर्फ 18 पर जीत दर्ज कर पायी। बाकी सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की।
 


 
इसकी 2 वजहें बेहद साफ मानी जा रही हैं। पहली, बीडीसी चुनाव में बीजेपी नेताओं की आपस में टिकट बंटवारे को लेकर भारी सिर-फुटौव्वल देखने को मिली। आसानी से जीतने की गफलत में टिकट बेचने के आरोप भी लगे। काफी उम्मीदवारों के टिकट अंतिम समय में बदले गये, जिसमें से ज्यादातर उम्मीदवार निर्दलीय लड़े और जीते।
 
बीजेपी अध्यक्ष रविंद्र रैना ने खुद एक टीवी को दिये इंटरव्यू में कहा है कि करीब 50 फीसदी उम्मीदवार बीजेपी के बाग़ी उम्मीदवार हैं जोकि जीतकर आयें हैं।
 
बीजेपी ने चुनाव में प्रचार को गंभीरता से नहीं लिया, बीडीसी चुनाव में भी स्थानीय नेता स्थानीय मुद्दों पर बात करने के बजाय पाकिस्तान विरोधी बयानबाज़ी में ही उलझे रहे।
 

 
दूसरी वजह, कांग्रेस, पीडीपी और एनसी के अघोषित उम्मीदवार रहे, जोकि भले ही इन पार्टियों के टिकट पर चुनाव न लड़े हों। लेकिन अपनी जमीन पर पकड़ बनाये रखने के लिए इन पार्टियों के स्थानीय नेताओं ने अपने उम्मीदवारों को निर्दलीय चुनाव लड़वाया और जितवाया। यानि तीनों पार्टी के नेताओं ने पर्दे के पीछे से चुनाव लड़ा।
 
इन चुनावों में भारी बीजेपी के कमज़ोर प्रदर्शन के बाद बीजेपी ने राज्य के नेताओं से जवाब तलब किया है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी महासचिव राम माधव फिलहाल राज्य के दौरे पर हैं, जोकि शनिवार को राज्य की लीडरशिप से बैठक कर चुनाव में कमज़ोर प्रदर्शन पर चर्चा करेंगे। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह स्टेट बीजेपी के प्रदर्शन से खुश नहीं हैं। बताया जा रहा है कि इसमें नेताओं की जमकर खिंचाई संभव है।