इन्फैंट्री डे पर लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि, पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा - पैदल सेना बहादुरी का प्रतीक
   27-अक्तूबर-2019

 
उत्तरी सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह ने 73 वें इन्फैंट्री डे के दिन रविवार को उधमपुर के ध्रुव शहीद स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। वहीं पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया कि “इन्फेंट्री दिवस की हमारे सभी बहादुर पैदल सैनिकों को शुभकामनाएं। हमारी पैदल सेना परिश्रम और बहादुरी का परिचय देती है। प्रत्येक भारतीय पैदल सेना के उत्कृष्ट सेवा के लिये आभारी है।"
 
 
 
 
बता दें कि आजादी के बाद पहली बार आज ही के दिन पैदल सेना ने कश्मीर में पाकिस्तानी घुसपैठियों के साथ युद्ध लड़ा था। पैदल सेना भारतीय थल सेना की रीढ़ की हड्डी के समान है। इसको 'क्वीन ऑफ द बैटल' यानी 'युद्ध की रानी' भी कहा जाता है। किसी भी युद्ध में पैदल सैनिकों की बड़ी भूमिका होती है।
 
 
 
इन्फैंट्री डे का इतिहास
 
 
देश को आजाद हुये दो महीने हो चुके थे। आजादी के समय तक जम्मू-कश्मीर के शासक महाराजा हरि सिंह ने भारत में विलय नहीं किया था। लेकिन आजादी के दो महीने बाद अक्टूबर में जब पाकिस्तान को पता चला की हरिसिंह भारत में विलय करने की तैयारी में है, तब पाकिस्तान बौखला गया। जिसके बाद पाकिस्तान ने कश्मीर को जबरन हड़पने की योजना बनायी। 24 अक्टूबर 1947 की सुबह करीब 5 हजार पाकिस्तानी हमलावरों की एक फौज कश्मीर में घुसपैठ करके घुसने में सफल हो गयी। वहीं 26 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर राजा हरिसिंह ने भारत में विलय करने की मंजूरी दे दी और विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर दिया। जिसके तुरंत बाद भारत सरकार ने भारतीय सेना की सिख रेजिमेंट की पहली बटालियन के दस्ते को हवाई जहाज से दिल्ली से श्रीनगर भेज दिया। इन पैदल सैनिकों के जिम्मे कश्मीर में घुसपैठ करने वाले आक्रमणकारी पाकिस्तानियों से लड़ना और कश्मीर को उनसे मुक्त कराना था। बता दें कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में आक्रमणकारियों के खिलाफ यह पहल सैन्य अभियान था। भारतीय पैदल सैनिकों ने बहादुरी के साथ लड़ते हुये आखिरकार कश्मीर को पाकिस्तानी हमलावरों के चंगुल से 27 अक्टूबर 1947 को मुक्त करा दिया था। चूंकि इस पूरे सैन्य अभियान में सिर्फ पैदल सेना का ही योगदान था, इसलिये इस दिन को इन्फैंट्री डे ( पैदल सेना दिवस) के रूप में मनाया जाता है।