“आर्टिकल 370 भारत का आंतरिक मुद्दा, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में हम भारत के साथ”- श्रीनगर दौरे के बाद प्रेस कांफ्रेंस में यूरोपियन सांसदों का बयान
   30-अक्तूबर-2019

 
कश्मीर 2 दिवसीय दौरे पर श्रीगर पहुंचे यूरोपियन सांसदों ने बुधवार को एक प्रेस कांफ्रेंस की। जिसमें डेलीगेशन ने जम्मू कश्मीर में मामले में कहा कि आर्टिकल 370 भारत का आंतरिक मुद्दा है और कहा कि भारत-पाकिस्तान को आपस में बात करनी चाहिए।
 
साथ ही डेलिगेशन की ओर से कहा गया कि भारत एक शांतिप्रिय देश है और कश्मीर के लोगों को काफी उम्मीदें हैं। श्रीनगर में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में यूरोपियन यूनियन सांसदों ने कहा कि हमारे दौरे को राजनीतिक निगाह से देखा गया, जो बिल्कुल ठीक नहीं है। हम सिर्फ यहां पर हालात की जानकारी लेने आए थे।
 
डेलीगेशन में शामिल सांसदों ने आतंकवाद के मसले पर कहा कि हम आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में साथ हैं, आतंकवाद का मसला यूरोप के लिए भी काफी महत्वपूर्ण है। हालांकि एक सवाल के जवाब में सांसदों ने कहा कि वो इस दौरे की रिपोर्ट यूरोपीय संसद में सबमिट नहीं करेंगे।
 
जम्मू कश्मीर के दौरे पर हो रही राजनीति के सवाल के जवाब में सांसदों ने कहा कि अनुच्छेद 370 के बारे में उन्होंने कहा कि ये भारत का आंतरिक मसला है, अगर भारत-पाकिस्तान को शांति स्थापित करनी है तो दोनों देशों को आपस में बात करनी होगी।अपने घाटी के दौरे के बारे में EU सांसदों ने कहा हमें वहां रहने का ज्यादा समय नहीं मिला, लेकिन वहां ना जाने से बेहतर थोड़े समय के लिए जाना ही रहा।
 
EU सांसदों का श्रीनगर दौरा
 
दरअसल मंगलवार को यूरोपीय संसद के 23 सांसद श्रीनगर पहुंचे थे। श्रीनगर में इन सांसदों ने स्थानीय नेताओं, अधिकारियों, सरपंचों से मुलाकात की थी। साथ ही तमाम सांसद श्रीनगर की मशहूर डल झील भी गए। कश्मीर घाटी के ताजा हालात पर इन सांसदों को भारतीय सेना ने प्रेजेंटेशन भी दी। इससे पहले ये दल नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से भी मिला था। जिसमें जम्मू कश्मीर समेत देश के अन्य विषयों पर विस्तार से चर्चा की गयी थी।
 
लेकिन विपक्षी दलों और लेफ्ट मीडिया ने शुरू से ही इस दौरे पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिये। कांग्रेस समेत तमाम दलों ने सवाल उठाये कि जब भारत के विपक्षी दलों को जम्मू कश्मीर में जाने की इजाजत नहीं है, तो यूरोपियन सांसदों को क्यों बुलाया गया।