NIA की जांच में खुलासा, कश्मीर में अलगाववाद को बढ़ावा देने में दिल्ली स्थित पाकिस्तान हाई-कमीशन डायरेक्ट एक्टिव
    05-अक्तूबर-2019

 
 
एनआईए ने टेरर फंडिंग मामले में खुलासा करते हुये कहा है कि दिल्ली स्थित पाकिस्तान हाई-कमीशन सीधे तौर पर अलगाववादी नेताओं से जुड़ा हुआ था और उन्हें पैसे देता था। एनआईए ने 2017 आतंकी फंडिंग मामले में शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर लिबरल फ्रंट के प्रमुख यासीन मलिक और 4 अन्य कश्मीरियों के खिलाफ दिल्ली की एक अदालत में 3 हजार पेज की चार्जशीट दायर की है। चार्जशीट में उन्होंने कहा कि देश के खिलाफ अलगाववाद को बढ़ावा देने उन्हें पैसा मुहैया कराने और उनकी सहायता करने में पाकिस्तान हाई-कमीशन का भी हाथ है।
 
 
 
कश्मीर के अलगाववादी नेताओं ने माहौल खराब करने की रची थी साजिश
 
एनआईए ने बताया कि प्रशासन के प्रति लोगों के मन में उदासीनता पैदा करने और अशांति फैलाने के लिये यासीन मलिक के साथ जम्मू-कश्मीर डेमोक्रेटिक फ्रीडम पार्टी के अध्यक्ष शब्बीर अहमद शाह, जम्मू-कश्मीर मुस्लिम लीग पार्टी के अध्यक्ष मसरत आलम, दुख्तारन-ए-मिलत के संस्थापक सैयदा आसिया और पूर्व विधायक अब्दुल रशीद शेख भी शामिल थे।
 
घाटी में अशांति पैदा करने के लिये विदेशों से मिल रहा था पैसा
 
एनआईए को जांच में मिले इमेल, मैसेज और बैंक खातों से पता चला है कि अलगाववादी नेता यासीन और शब्बीर शाह को जम्मू-कश्मीर में अशांति और उग्रवाद पैदा करने के लिये विदेशों से पैसा मिलता था। एजेंसी ने कहा कि उनके पास सबूत है कि मसरत आलम भी विभिन्न आतंकवादी संगठनों के बीच सांठगांठ स्थापित करता था।
 
एजेंसी ने बताया की शुरुआती जांच में उन्हें कई मेल, मैसेज और चैट मिला था, जिससे पता चला कि ये पांचों अलगाववादी नेता एक दूसरे से जुड़े हुये है। एजेंसी को मिले एक वीडियो से पता चला कि ये नेता सीधे तौर पर पाकिस्तान से मदद मांगते  थे।