अमित शाह के दौरे से पहले J&K बैंक में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई शुरू, चेयरमैन परवेज़ को हटाकर आर.के. छिब्बर बने पहले नॉन-कश्मीरी बोर्ड डायरेक्टर, श्रीनगर हेडक्वार्टर पर स्टेट विजिलेंस की छापेमारी
    08-जून-2019
 
 
 
 
जम्मू कश्मीर में भ्रष्टाचार की जड़ बन चुके जम्मू एंड कश्मीर बैंक के आला अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू हो चुकी है। जम्मू कश्मीर प्रशासन ने आज J&K बैंक के सर्वेसर्वा चेयरमैन और बोर्ड डायरेक्टर परवेज़ अहमद को पद से हटाकर आर के छिब्बर को नया चेयरमैन और बोर्ड डायरेक्टर नियुक्त कर दिया। आजादी के बाद पहले नॉन-कश्मीरी चेयरमैन होंगे। मतलब साफ है कि J&K बैंक में फैले कश्मीरियों के वर्चस्व को तोड़ा जाना शुरू हो गया है। परवेज अहमद को पद से हटाये जाने के बाद आज स्टेट विजिलेंस की टीम ने J&K बैंक के श्रीनगर स्थित हेडक्वार्टर पर छापेमारी शुरू कर दी। जो फिलहाल बैंक के कागजात की छानबीन कर रही है। संभावना जताई जा रही है कि भ्रष्टाचार और भर्तियों में धांधली के आरोप में पूर्व चेयरमैन परवेज़ अहमद को गिरफ्तार भी किया जा सकता है।
 
 
J&K बैंक का इतिहास और भ्रष्टाचार-धांधली की कहानी
 
 
1. J&K बैंक को 1938 में महाराजा हरि सिंह ने स्थापित किया था। आजादी के बाद ये स्टेट के कब्ज़ें में आ गया। इसके बाद इसमें भर्तियों में धांधली और पैसों के अवैध लेन-देन का अड्डा बन गया। जिसमें कश्मीर घाटी के लोगों का कब्जा रहा। पिछले साल इसके 80 साल का जश्न मनाया था। इस कार्यक्रम में J&K बैंक के फाउंडर महाराजा हरि सिंह की तस्वीर या कोई जिक्र तक नही था। यहां तक कि ऑफिशियल वेबसाइट में भी महाराजा हरि सिंह या फिर उन अधिकारियों का जिन्होंने इसको स्थापित किया, उनका कोई जिक्र नही है।
 
 
2. J&K बैंक में संस्थानिक दादागिरी ऐसी है कि पब्लिक बैंक होने के बावजूद भी इस बैंक को आरटीआई के दायरे में नहीं लाया गया। राज्य सरकार के तमाम कर्मचारियों की सैलरी इसी बैंक के जरिये आती है। इसके अलावा ये बैंक पब्लिक बैंक होने के नाते हमेशा सरकारी सहायता लेता रहा है। लेकिन बदले में ऑटोनोमी के नाम पर हमेशा प्राइवेट बैंक की तरह रवैया बनाये रखा। सरकार के प्रति कभी उत्तरदायी नहीं रहा।
 
 
3. J&K बैंक में कर्मचारियों की भरती में हमेशा आला अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और पारदर्शिता न अपनाये जाने के आऱोप लगते रहे। लेकिन कभी कोई कार्रवाई या जांच नही हुई। इसके अलावा बैंक के अधिकारियों पर हवाला के पैसों का हेर-फेर करने के भी आरोप लगते रहे हैं। जिनका उपयोग कश्मीर में आतंकवाद फैलाने में किया जाता रहा है। लेकिन इसको लेकर भी कभी जांच नहीं हुई।
 
 

 
 
 
 
4. 2018 में क्लर्क की भरती में कश्मीरी अभ्यर्थियों को जम्मू क्षेत्र के अभ्यर्थियों के मुकाबले कम अंक आने के बावजूद भी प्राथमिकता दी गयी। जब जम्मू के अभ्यर्थियों ने सवाल उठाये तो राज्य प्रशासन के दवाब में मामले को दबाने के लिए जम्मू के अभ्यर्थियों को भी भरती कर लिया। परीक्षा पास न करने वाले कश्मीरी अभ्यर्थियों को निकाले बिना।
 
 
5. J&K बैंक KYC (Know Your Customer) के नियमों को फॉलो नहीं करता। जिसके चलते रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया ने बैंक पर 3 करोड़ का फाइन भी लगाया था। इसके अलावा इस बैंक के नॉन-पर्फॉर्मिंग एसेट्स भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं।