पीएम मोदी ग्लोबल गोलकीपर्स अवॉर्ड से सम्मानित, पाकिस्तान ने बिल गेट्स से की थी अवॉर्ड न देने की अपील
    25-सितंबर-2019

 
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को न्यूयॉर्क में मंगलवार को स्वच्छ भारत अभियान के सफल संचालन और उनमें सुधारों के प्रयासों के लिए बिल ऐंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने उन्हें प्रतिष्ठित ग्लोबल गोलकीपर्स अवॉर्ड से सम्मानित किया है। पीएम मोदी को यह अवॉर्ड माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स ने दिया है। इस मौके पर पीएम ने कहा कि यह सम्मान उन भारतीयों को समर्पित हैं, जिन्होंने स्वच्छ भारत मिशन को एक जन आंदोलन में बदला और स्वच्छता को अपनी दैनिक जीवन का हिस्सा बनाया। यह पुरस्कार हर साल देश में विकास के उपलब्धि के लिए एक विश्व नेता को दिया जाता है।
 
पीएम ने कहा यह पुरस्कार प्रमाण है लोगों ने अपनाया स्वच्छता
 
पीएम नरेन्द्र मोदी ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि उन्हें महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती के अवसर पर यह पुरस्कार मिला। आगे उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार प्रमाण है कि अगर 130 करोड़ लोगों की जनशक्ति किसी एक संकल्प को पूरा करने में जुट जाती है, तो किसी भी चुनौती को जीता जा सकता है। सरकार द्वारा स्वच्छ भारत अभियान शुरु किया गया था, लेकिन देश की जनता ने इसे आंदोलन का रूप दिया था।
 
देश के ग्रामीण क्षेत्रों में बने 11 करोड़ शौचालय से स्वास्थ्य में हुआ सुधार
 
पीएम मोदी ने कहा कि 11 करोड़ शौचालय के निर्माण से ग्रामीण स्तर पर एक बड़ा सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि “मुझे बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन की एक रिपोर्ट से पता चला है कि भारत में बेहतर ग्रामीण स्वच्छता के कारण बच्चों में हर्ट (दिल) की समस्याओं में कमी आयी है, और महिलाओं के बॉडी मास इंडेक्स में भी सुधार हुआ है।
 
 
 
 2022 तक पूरा होगा सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्ति अभियान
 
नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत में अभी अनेकों जनआंदोलन चल रहे है,मुझे विश्वास है कि 130 करोड़ भारतीय उन जनआंदोलन को भी सफल बनायेंगे। उन्हीं जनआंदोलन में से एक है सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्ति अभियान, जिसे भारत 2022 तक पूरा करेगा।
 
 
बिल ऐंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने कहा कि स्वच्छता के स्तर पर भारत में हुआ सुधार
 
फाउंडेशन ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन से पहले भारत में 50 करोड़ से अधिक लोगों के पास सुरक्षित सफाई उपलब्ध नहीं था, लेकिन अब सफाई को लेकर भारी बहुमत हैं। स्वच्छ भारत मिशन दुनिया भर के अन्य देशों के लिए एक सब मॉडल के रुप में काम कर सकता है, जिसके अनुसार गरीब लोगों के लिए स्वच्छता की पहुंच में सुधार करने की आवश्यकता है।