"हमारे जवानों का हौसला बुलंद, हर परिस्थिति से निपटने को तैयार"- LAC को लेकर संसद में रक्षामंत्री का बयान
   15-सितंबर-2020
 
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भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा  पर जारी तनाव के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को लोकसभा में विस्तार से बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मैं सदन से यह अनुरोध करता हूं कि हमारे दिलेरों की वीरता एवं बहादुरी की प्रशंसा करने में मेरा साथ दें। उन्होंने कहा कि हमारे बहादुर जवान अत्यंत मुश्किल परिस्थतियों में अपने अथक प्रयास से समस्त देशवासियों की सुरक्षा कर रहे हैं। राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि सेना के लिए विशेष अस्त्र-शस्त्र और गोला बारूद की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। उनके रहने के तमाम बेहतर सुविधाएं दी गई हैं। उन्होंने कहा कि लद्दाख में हम एक चुनौती के दौर से गुजर रहे हैं। यह समय है कि यह सदन अपने जवानों को वीरता का एहसास दिलाते हुये उन्हें संदेश भेजे कि पूरा सदन उनके साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति पहले से अलग है। हम सभी परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार हैं। जब भी देश के समक्ष कोई चुनौती आयी है, इस सदन ने सेना के प्रति पूरी प्रतिबद्धता दिखाई है। हमारे सेना के जवानों का जोश और हौसला बुलंद है।
 


 


राजनाथ सिंह ने कहा कि हम सीमाई इलाकों में सभी समस्या का हल शांतिपूर्ण तरीके से करने के पक्ष में हैं। हमने चीनी रक्षा मंत्री से रूस में मुलाकात की थी। हमने कहा कि इस मुद्दे का शांतिपूर्ण तरीके से हल करना चाहते हैं। सरकार भारत की संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। 10 सितंबर को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की थी। जयशंकर ने कहा कि अगर चीन पूरी तरह से समझौते को माने तो विवादित इलाके से सेना को हटाया जा सकता है।




राजनाथ सिंह ने सदन को बताया कि अभी की स्थिति के अनुसार चीन ने एलएसी के अंदरूनी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में सैनिक और गोला बारूद जमा कर रखे हैं। चीन की कार्रवाई के जवाब में हमारी सेना ने पूरी काउंटर तैनाती कर रखी है। सदन को आश्वस्त रहना चाहिए कि हमारी सेना इस चुनौती का सफलतापूर्वक सामना करेगी। उन्होंने बताया कि बीते 29-30 अगस्त की रात को पैंगोंग लेक के साउथ बैंक इलाके में चीन ने यथास्थिति बदलने का प्रयास किया था। हमारी सेना ने उनके प्रयास विफल कर दिया। चीन की तरफ से द्विपक्षीय संबंधों का अनादर पूरी तरह दिखता है। भारत ने एलएसी का सम्मान किया है और 1993-1996 के समझौते को स्वीकार किया है। लेकिन चीन की तरफ से ऐसा नहीं हुआ है, उनकी कार्रवाई के कारण ही सीमा पर झड़प हुये हैं।
 


 


उन्होंने आगे कहा कि एलएसी को लेकर भारत और चीन की धारणा अलग-अलग है। एलएसी पर शांति बहाल की जाएगी यह बात दोनों पक्षों ने माना है। भारत का मानना है कि द्विपक्षीय संबंधों को विकसित किया जा सकता है। साथ ही साथ ही सीमा मुद्दे पर चर्चा की जा सकती है। एलएसी पर किसी भी हरकत का द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ेगा। समझौते में जिक्र है कि एलएसी पर दोनों देश कम से कम सेना रखेंगे। चीन ने 38 हजार स्कावयर किलोमीटर भूमि परअनिधिकृत कब्जा लद्दाख में कर रखा है। चीन अरुणाचल प्रदेश की सीमा से लगे लगभग 90 हजार स्कायर किलोमीटर की भूमि को भी अपना बताता है।
 


 

रक्षा मंत्री ने कहा कि 15 जून को चीन के साथ गलवान घाटी में खूनी संघर्ष में हमारे जवानों ने बलिदान दिया और चीनी पक्ष को भी भारी नुकसान पहुंचाया। जहां संयम की जरूरत थी वहां हमारे जवानों ने संयम रखा और जहां शौर्य की जरूरत थी वहां शौर्य प्रदर्शित किया है। किसी को भी हमारी सीमा की सुरक्षा के प्रति हमारे प्रतिबद्धता पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए।
 


उन्होंने कहा कि मैंने भी लद्दाख जाकर अपने शूरवीरों के साथ कुछ समय बिताया है और मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि मैंने उनके अदम्य साहस, शौर्य और पराक्रम को महसूस किया है। अप्रैल से पूर्वी लद्दाख की सीमा पर चीन की सेनाओं की संख्या तथा उनके युद्ध सामाग्री में वृद्धि हुई है। हमारी सेना के नार्मल पेट्रोलिंग में चीनी सेना ने व्यवधान शुरू किया था,  जिसके कारण ही फेस ऑफ की स्थिति उत्पन्न हुई है। उन्होंने कहा कि हमारे बहादुर जवानों ने चीनी सेना को भारी क्षति पहुंचाई है और सीमा की भी सुरक्षा की है।