कोरोना से लड़ने के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा निर्मित कोरोना रोधी दवा को मरीजों के लिए आपात इस्तेमाल को मंजूरी मिल गई है। यह दवा एक पाउडर की तरह सैशे में आती है, जिसे आसानी से पानी में घोलकर लिया जा सकेगा। शोध के दौरान बड़ी संख्या में ये दवा लेने वाले शख्स आरटीपीसीआर टेस्ट में निगेटिव पाए गए हैं। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने कोरोना के इलाज के लिए इस दवा के इमरजेंसी यूज को मंजूरी दे दी है। ये दवा डीआरडीओ के इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड अलायड साइंसेस (INMAS) और हैदराबाद सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्युलर बायोलॉजी (सीसीएमबी) के साथ मिलकर तैयार की है। इस दवा को अभी 2-deoxy-D-glucose (2-DG) नाम दिया गया है और इसकी मैनुफैक्चरिंग की जिम्मेदार हैदराबाद स्थित डॉ. रेड्डी लैबोरेट्रीज को दी गई है।
बता दें कि यह दवा अस्पताल में भर्ती कोरोना मरीज को तेजी से स्वस्थ होने में मदद करती है और ऑक्सीजन पर उसकी निर्भरता को कम करती है। इस दवा को इलाज के दौरान कोरोना के मध्यम और गंभीर मरीजों को दी जा सकती है। भारत में अभी तक कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज में रेमडेसिविर, फेबिफ्लू जैसी दवाओं के साथ कुछ नेजल स्प्रे को भी डॉक्टरी सलाह औऱ कोविड प्रोटोकॉल के तहत इस्तेमाल किया जा रहा है।
डीआरडीओ के डॉक्टर एके मिश्रा ने एक न्यूज़ चैनल को बताया कि साल 2020 में ही कोरोना की इस दवा को बनाने का काम शुरू किया गया था। उन्होंने कहा कि साल 2020 में जब कोरोना का प्रकोप जारी था, उसी दौरान डीआरडीओ के एक वैज्ञानिक ने हैदराबाद में इस दवा की टेस्टिंग की थी। डॉक्टर एके मिश्रा ने बताया किसी भी टिशू या वायरस के ग्रोथ के लिए ग्लूकोज़ का होना बहुत ज़रूरी होता है। लेकिन अगर उसे ग्लूकोज़ नहीं मिलता तो उसके मरने की उम्मीद बढ़ जाती है। इसी को हमने मिमिक करके ऐसा किया कि ग्लूकोज़ का एनालॉग बनाया है, वायरस इसे ग्लूकोज़ समझ कर खाने की कोशिश करेगा। लेकिन ये ग्लूकोज़ नहीं है, इस वजह से वायरस की मौत हो जाएगी। यही इस दवाई का बेसिक प्रिंसिपल है। साथ ही उन्होंने कहा कि इस दवा से ऑक्सीजन की कमी भी नहीं होगी। जिन मरीज़ों को ऑक्सीजन की जरूरत है, उन्हें इसको देने के बात फायदा होगा और वायरस की मौत भी होगी। जिससे इंफेक्शन का चांस कम होगा और मरीज़ जल्द से जल्द रिकवर होगा। डॉक्टर एके मिश्रा ने बताया कि इस दवा के तीसरे फेज़ के ट्राएल के अच्छे नतीजे आए हैं। जिसके बाद इसके इमरजेंसी इस्तेमाल की मंज़ूरी मिली है। उन्होंने कहा कि हम डॉ रेड्डीज़ के साथ मिलकर ये कोशिश करेंगे कि हर जगह और हर नागरिक को मिले। एके मिश्रा ने बताया कि इस दवाई को हर तरह के मरीज़ को दिया जा सकता है। हल्के लक्षण वाले कोरोना मरीज़ हो या गंभीर मरीज़, सभी को इस दवाई को दी जा सकेगी। बच्चों के इलाज में भी ये दवा कारगर साबित होगी। हालांकि उन्होने कहा कि बच्चों के लिए इस दवा की डोज़ अलग होगी। उम्मीद जताई जा रही है कि बाजार में इस दवा के आने के बाद कोरोना के मामले कम होंगे।