POJK वापसी पर सेना की तैयारी ; सरकार के आदेश का है इंतज़ार - लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी
   23-नवंबर-2022

Army preparations on POJK
 
 
उत्तरी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) को लेकर बड़ा बयान दिया है। कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने पत्रकारों द्वारा PoJK को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा कि भारतीय सेना 'पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर' (PoJK) को वापस लेने जैसे आदेशों को पूरा करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। गौरतलब है इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह कई बार इस बात को दोहरा चुके हैं क‍ि पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाला जम्मू-कश्मीर (PoJK) भारत का हिस्‍सा है और हम इसे हर हालत में लेकर रहेंगे।
 
 
सेना को है सरकार के आदेश का इंतज़ार
 
 
आपको बता दें कि पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू कश्मीर को लेकर भारत की संसद में प्रस्‍ताव भी पारित हो चुका है। लिहाजा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के PoJK वापस लेने के बयान पर उत्तरी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा क‍ि 'जहां तक भारतीय सेना का संबंध है, वह भारत सरकार द्वारा दिए गए किसी भी आदेश को हर हाल में पूरा करेगी। जब भी इस तरह के आदेश दिए जाएंगे, हम इसके लिए हमेशा तैयार रहेंगे। सरकार जब भी PoJK की वापसी को लेकर आदेश देगी तो सेना उस आदेश पर उचित कार्रवाई करते हुए आदेश का पालन करेगी।
 
 
युद्ध विराम टूटने का देंगे मुंह तोड़ जवाब
 
 
युद्ध विराम को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच हुए समझौते के सवाल पर उत्तरी सेना के कमांडर उपेंद्र द्विवेदी ने कहा क‍ि सेना हमेशा यह सुनिश्चित करने के लिए तैयार है कि दोनों देशों के बीच युद्धविराम की समझ कभी न टूटे क्योंकि यह दोनों देशों के हित में है। लेकिन अगर कभी भी टूटा तो हम उन्हें करारा जवाब देंगे।
 
 
 
 
 
PoJK पर पाकिस्तान का 75 वर्षों से है अवैध कब्ज़ा
 
 
दरअसल 1947 में देश के विभाजन के चंद महीनों बाद पाकिस्तानी सेना ने अपने नापाक मंसूबो का परिचय देते हुए 22 अक्टूबर 1947 को जम्मू-कश्मीर के बड़े हिस्से पर हमला कर दिया था। इस हमले के दौरान पाकिस्तानी सैनिकों ने हजारों की संख्या में निर्दोष हिंदूओं, सिखों की सरेआम हत्या की थी और वर्षों पुराने ऐतिहासिक मंदिरों और गुरुद्वारों जैसे सभी धार्मिक स्थलों में तोड़फोड़ मचाई थी। सिर्फ इतना ही नहीं हैवानियत की सारी हदें पार करते हुए पाकिस्तानी सैनिकों ने उन सभी पवित्र स्थानों को गलत कार्यों के जरिये अपवित्र करने का भी काम किया था।
 
 
इन घटनाओं के बाद उस वक्त बड़ी संख्या में लोग विस्थापित होने के लिए मजबूर हो गये थे। बीते 75 से पीओजेके अर्थात ''पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू कश्मीर'' और (PoTL) अर्थात ''पाकिस्तान अधिक्रांत टेरिटरी ऑफ लद्दाख'' में बचे मंदिरों, गुरुद्वारों और बौद्ध स्थानों को भी हमलावरों ने चुन-चुन कर क्षतिग्रस्त करने का काम किया है। वहां मौजूद ऐतिहासिक मंदिरे, गुरुद्वारों की इमारतें पूरी तरह से खंडित हो चुकी है। PoJK पर पाकिस्तान का 75 वर्षों से अवैध कब्ज़ा है। लेकिन अब बदलते समय के साथ-साथ तमाम PoJK विस्थापितों के साथ पुरे देश की यह मांग है कि पाकिस्तान के अवैध कब्जे में जो हमारा हिस्सा है उसे वापस लिया जाए और PoJK विस्थापितों को उनका हक़ प्रदान किया जाए।
 
 
PoJK
  
प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव का कार्यकाल जम्मू-कश्मीर के लिए अनेक उतार-चढ़ाव वाला था। एक तरफ कश्मीर घाटी से हिन्दुओं का नरसंहार और निष्कासन लगातार जारी था। वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में भारत के खिलाफ आतंकवादियों के प्रशिक्षण की शुरुआत हो चुकी थी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पाकिस्तान की भाषा को समर्थन मिलने लगा था। साल 1993 में अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट में उप-सहायक सचिव (दक्षिण एशिया) जॉन मैलोट भारत के दौरे पर थे। उन्होंने कश्मीर में भारतीय सेना पर मानवाधिकारों के उल्लंघन का झूठा आरोप लगा दिया।
 
 
यह सोची-समझी साजिशें थी, जिनकी भूमिका पाकिस्तान के तत्कालीन 2 प्रधानमंत्रियों ने लिखी थी। साल 1990 में बेनजीर भुट्टो और फिर 1991-93 के बीच नवाज शरीफ ने पीओजेके के लगातार कई दौरे किये। भुट्टो ने 13 मार्च, 1990 में मुज़फ्फराबाद की एक सभा में भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों का सार्वजनिक समर्थन किया। शरीफ भी पीछे नहीं थे और पीओजेके से ‘कश्मीर बनेगा पाकिस्तान’ जैसे युद्धक नारे लगाने शुरू कर दिए।
 

About POJK
 
 
 
22 फरवरी, 1994 संसद में PoJK पर संकल्प पारित
 
 
अब इस मामलें पर तुरंत प्रभावी कार्रवाई की जरुरत थी। इसलिए भाजपा ने प्रमुख विपक्षी दल के नाते केंद्र सरकार पर दवाब बनाना शुरु कर दिया। इसमें कोई दो राय नहीं है कि प्रधानमंत्री राव एक सुलझे हुए व्यक्ति थे। उन्होंने भी समस्या की गंभीरता को समझा और पहला कदम 22 फरवरी, 1994 को उठाया। उस दिन संसद ने PoJK पर एक संकल्प पारित किया था। लोकसभा के अध्यक्ष शिवराज पाटिल और राज्यसभा के सभापति के. आर. नारायणन (भारत के उपराष्ट्रपति) ने जम्मू-कश्मीर राज्य सम्बन्धी इस प्रस्ताव को दोनों सदनों के समक्ष रखा। जिसमें सर्वसम्मति से जोर दिया गया कि पाकिस्तान को (अविभाजित) जम्मू-कश्मीर के कब्जे वाले इलाकों को खाली करना होगा जिसपर पाकिस्तान ने अवैध कब्ज़ा कर रखा है।
 
 
लगभग साल बाद केंद्र सरकार ने POJK को लेकर दूसरा कदम उठाया। साल 1995 में पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू कश्मीर और उत्तरी इलाकों (गिलगित-बल्तिस्तान) पर विदेश मंत्रालय की स्टैंडिंग कमेटी ने संसद में एक रिपोर्ट पेश की। भाजपा के पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी इसकी अध्यक्षता कर रहे थे। इस सर्वदलीय कमेटी में लोकसभा और राज्यसभा से 45 सदस्यों को शामिल किया गया था, जिन्होंने दोहराया कि पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है।
 
 
साथ ही कमेटी ने सुझाव दिया कि पीओजेके और गिलगित-बल्तिस्तान में मानवाधिकारों के हनन पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष आवाज़ उठाई जानी चाहिए। यह दोनों अभूतपूर्व कदम थे, जोकि सालों पहले ही उठा लिए जाने चाहिए थे। हालाँकि अब वर्षों बाद एक बार फिर PoJK की वापसी पर आवाज़ उठने लगी है। केंद्र सरकार की तरफ से भी ये स्पष्ट किया गया है कि पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाला जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और इसे पाकिस्तान को खाली करना चाहिए।
 
 
मुख्य बिंदु :
 
 
PoJK का क्षेत्रफल : 13,297 वर्ग किलोमीटर (अविभाजित जम्मू कश्मीर का लगभग 15 % क्षेत्र

मुख्य शहर : मीरपुर, भिम्बर, कोटली, देवबटाला और मुजफ्फराबाद

अक्टूबर 1947 से पाकिस्तान के अवैध कब्जे में

पाकिस्तानी सेना द्वारा अक्टूबर-नवंबर 1947 में लाखों हिन्दू और सिखों का नरसंहार

पाकिस्तानी सेना द्वारा हजारों बहन बेटियों के साथ बलात्कार

लाखों परिवारों में से महज लगभग 50 हजार परिवार हुए विस्थापित
 
 
 
Written By : उज्जवल मिश्रा