पाकिस्तान में हिंदू होना किसी बड़े अभिशाप से कम नहीं है। हिंदू समुदाय से ताल्लुक़ रखने के कारण यहाँ हर रोज़ अल्पसंख्यक हिंदुओं के साथ अमानवीय बर्बरता व अत्याचार जैसी घटनाएँ देखने को मिलती रहती हैं। हालाँकि ये बात अलग है कि पाकिस्तानी मीडिया व पाकिस्तानी हुक्मरान इन घटनाओं पर लगातार पर्दा डालने का काम करते आए हैं। यहाँ तक कि हर छोटी बड़ी घटनाओं पर मानवाधिकार हनन की दुहाई देने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ भी इन घटनाओं पर मुक़दर्शक की भूमिका में नज़र आते हैं। उन्हें पिछले 76 वर्षों से पाकिस्तान में रहने वाले अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार की घटनाएँ नज़र नहीं आती।
अल्पसंख्यक हिंदुओं पर लगातार हो रहे अत्याचार के बीच एक और ताज़ा मामला पाकिस्तान के सिंध प्रांत (Sindh Provinance) से सामने आया है। सिंध प्रांत के उमरकोट (Umerkot) में कोल्ही समुदाय (Kolhi Community in Pakistan) से ताल्लुक़ रखने वाले एक परिवार के ख़िलाफ़ स्थानीय पुलिस ने FIR दर्ज की है। जी हाँ FIR वो भी सिर्फ़ इस बात के लिए क्योंकि यह परिवार शादी के दौरान DJ संगीत बजा रहा था। लिहाज़ा DJ बजाए जाने को लेकर समारो पुलिस (Samaro Police) ने दूल्हे चंदर कोल्ही (Hindu groom Chandar Kolhi) को सरेआम ना सिर्फ़ अपमानित किया बल्कि उसके पूरे परिवार और यहाँ तक कि रिश्तेदारों के ख़िलाफ़ झूठा FIR दर्ज कर दिया।
आपको बता दें कि पाकिस्तान के दक्षिण प्रांत में रहने वाले कोल्ही समुदाय को अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त है। इस समुदाय के ख़िलाफ़ यहाँ हर रोज़ अनेक तरह के अत्याचार होते रहते हैं। उनकी बेटियों का जबरन अपहरण कर धर्म परिवर्तन करना फिर मुस्लिम युवक संग निकाह करना इसके अलावा हत्या, बलात्कार जैसी घटनाएँ आम बात हैं। इन सब घटनाओं के बीच अब शादी में DJ बजाने को लेकर दूल्हे और उसके पूरे परिवार के ख़िलाफ़ FIR दर्ज कर दिया गया। जोकि बेहद शर्मनाक स्थिति है।
इसे विडंबना ही कहेंगे कि एक तरफ़ उसी पाकिस्तान में मस्जिदों पर लगे लाउडस्पीकर से तेज आवाज़ में हर रोज़ आजान की जाती है। वहाँ के नेताओं के चुनाव प्रचार में तेज DJ साउंड और लाउडस्पीकर का प्रयोग किया जाता है। अय्याशियों में डूबे राजनेता अक्सर तेज अवाज में मुजरा कराते और नाचते गाते नज़र आते हैं। लेकिन उसी पाकिस्तान का यह अल्पसंख्यक हिंदुओं के ख़िलाफ़ दोहरा चरित्र ही है, जो एक अनुसूचित जाति के परिवार के ख़िलाफ़ शादी में DJ बजाए जाने को लेकर केस कर दिया जाता है। इससे भी शर्मनाक बात यह कि वहाँ की हुकूमत, पाकिस्तानी मीडिया और मानवाधिकार की दुहाई देने वाला समुदाय इन सब घटनाओं पर चुप्पी साधे हुए है।
हर बार की तरह सवाल सिर्फ़ इतना कि आख़िरकार कब तक ? कब तक ऐसे पाकिस्तान में हिंदुओं को अल्पसंख्यक होने की क़ीमत चुकानी होगी ?