| 15-फ़रवरी-2023 |

जम्मू संभाग से लगभग 140 किलो मीटर दूर उत्तर की ओर रियासी जिले में स्थित ऐतिहासिक धार्मिक तीर्थ स्थल शिवखोड़ी के आधार शिविर रनसू में लगने वाले 3 दिवसीय महाशिवरात्रि मेले की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। शुक्रवार से मेले का आगाज हो जाएगा, जिसमें काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर देवाधि देव महादेव के दर्शन करेंगे। मेले का शुभारंभ शिवखोड़ी श्राइन बोर्ड के चेयरमैन एवं डिविजनल कमिश्नर जम्मू रमेश कुमार करेंगे।
महाशिवरात्रि मेले में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। इसे लेकर रियासी जिले के SSP अमित गुप्ता ने मेला स्थल का निरीक्षण करने के बाद पुलिसकर्मियों से मेले में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु पर पैनी नजर रखने की बात कही है।जिला पुलिस और CRPF के जवान मेला स्थल पर तैनात कर दिए गए हैं। श्रद्धालुओं के लिए 2 पर्ची काउंटर बनाए गए हैं। अगर टीआरसी के निकट पहले पर्ची काउंटर पर किसी तरह से यात्री पर्ची प्राप्त नहीं कर पाते हैं तो वह थोड़ा आगे जाकर मुख्य द्वार के निकट दूसरे काउंटर से यात्रा पर्ची प्राप्त कर सकते हैं।
जानकारी के मुताबिक 17 तारीख से शुरू हो रहे महाशिवरात्रि मेले के पहले दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके अलावा जिले के विभिन्न विभागों व स्वयं सहायता समूह की तरफ से शिव भक्तों की जागरूकता के लिए प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इस दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विभिन्न संस्थाओं द्वारा लंगर की व्यवस्था की गई है। मेले के तीसरे दिन रविवार को के जम्मू कश्मीर स्टाइल रेसलिंग एसोसिएशन और पर्यटन विभाग की ओर से विशाल दंगल का आयोजन किया जाएगा। यह महाशिवरात्रि मेला 17 से 19 फरवरी तक चलेगा।
पौराणिक कथाओं में मंदिर से जुड़ी ऐसी मान्यता है कि एक बार भस्मासुर नामक राक्षस ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए घोर तपस्या की थी। भस्मासुर की तपस्या से भगवान शिव ने प्रसन्न होकर उसे साक्षात दर्शन दिया और कोई वर मांगने को कहा। तभी भस्मासुर ने भगवान शिव से यह वर मांगा कि हे भगवान, आप मुझे ऐसा वर दीजिए की मैं जिसके सर पर भी हाथ रखूं वो तुरंत भस्म हो जाए।

भगवान भोलेनाथ ने तथास्तु कहते हुए भस्मासुर को यह वर दे दिया। तभी भस्मासुर ने भगवान शिव से कहा कि मैं आपके सर पर अपना हाथ रखना चाहता हूं। जिसके बाद भगवान शिव बहुत ही चिंतित हुए। इस दौरान भस्मासुर और भगवान शिव के बीच युद्ध भी हुआ। युद्ध के बाद भी भस्मासुर ने हार नहीं मानी। तब भगवान शिव वहां से निकलकर एक ऊंची पहाड़ी पर जा पहुंचे। यहां भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से वार कर एक गुफा का निर्माण किया और परिवार के साथ अंदर चले गए।
भगवान शिव तो गुफा के अंदर चले गए परंतु उन्हें ढूंढते हुए जब भस्मासुर ने गुफा के अंदर प्रवेश करने का प्रयास किया तो विशाल काय होने के कारण वह गुफा में प्रवेश नहीं कर सका। वो गुफा के बाहर ही भगवान शिव का इंतजार करने लगा। ये सब देख भगवान विष्णु ने 'मोहिनी' का अवतार लिए भस्मासुर की समक्ष प्रकट हो गए।
मोहिनी को देख भस्मासुर आकर्षित होने लगा। भगवान विष्णु ने अपनी माया से भस्मासुर को पूरी तरह से मोहित कर लिया और अपने साथ नृत्य कराने लगे। नृत्य करते करते एक वक्त पर विष्णु ने अपना हाथ अपने सर पर रखा, भगवान विष्णु को ऐसा करता देख भस्मासुर ने भी अपना हाथ अपनी सर पर रखा और वह तुरंत भस्म हो गया।

मंदिर से जुड़ी मान्यता है कि यहां जो भी भक्त सच्ची श्रद्धा से पहुंचता है उसकी मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती हैं। शिव खोड़ी गुफा के भीतर भगवान शिव के साथ, मां पार्वती, गणेश, कार्तिकेय और नंदी की पिंडियों के भी दर्शन होते हैं। पिंडियों पर गुफा की छत से जल की बूंदे गिरने से प्राकृतिक अभिषेक स्वतः ही होता रहता है। भगवान शिव द्वारा बनाई गई इस गुफा में महाशिवरात्रि के दिन भारी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। महाशिवरात्रि के दौरान यहां 3 दिनों तक मेले का आयोजन भी किया जाता है।