14 अगस्त, विभाजन की विभीषिका ; मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदी की कहानी – भाग 2
    14-अगस्त-2023

Partition Of India 14th August 1947 Story.. 
 
आजादी के वक्त भारत की आबादी करीब 40 करोड़ थी। 1947 में अंग्रेजी हुकूमत से भारत स्वतंत्र तो हुआ लेकिन भारत को इस आजादी के लिए बंटवारे की कीमत चुकानी पड़ी। आजादी मिलने के काफी पहले से ही मुसलमान अपने लिए एक अलग मुल्क की मांग कर रहे थे। इनकी अगुआई मुस्लिम लीग के मोहम्मद अली जिन्ना कर रहे थे। हिंदू बहुल भारत में मुसलमानों की आबादी करीब एक चौथाई थी। जिन्ना की जिद ने अंग्रेजों को यहां से जाते-जाते एक लकीर खींच देने का मौका दे गई। ऐसी लकीर जो आज भी उथल-पुथल मचाती रहती है। सिर्फ इस लकीर की वजह से दुनिया ने सबसे बड़ा विस्थापन देखा। करीब 1.45 करोड़ लोग विस्थापित हुए। बंटवारे के वक्त हुए दंगों में लाखों लोग मारे गए। जिन लोगों ने एक साथ आजादी का सपना देखा, वो ही एक-दूसरे को मारने पर आमादा हो गए। सबसे ज्यादा दर्द महिलाओं ने झेला। उन्हें पुरुषों की लड़ाई में महिला होने की कीमत चुकानी पड़ी।
 
 
Partition of India Pakistan 1947
 
इलस्ट्रेटेड लंदन न्यूज, 5 जुलाई, 1947 डिजिटल फोटो आर्काइव्स NMML, नई दिल्ली
 
 
9 जून, 1947 ‘अखिल भारतीय मुस्लिम लीग’ की बैठक
 
 
9 जून, 1947 को नई दिल्ली के इम्पीरियल होटल में ‘अखिल भारतीय मुस्लिम लीग’ की बैठक हुई थी। इस बैठक में विभाजन की मांग वाला प्रस्ताव लगभग सर्वसम्मति से पारित हुआ। इसके पक्ष में 300 और विरोध में मात्र 10 मत पड़े। लीग के कई नेता पाकिस्तान के नए अधिराज्य के 2 भागों, पूरब और पश्चिम में, विभाजित होने से नाखुश थे। जैसा कि समय ने साबित किया, यह एक व्यावहारिक विचार नहीं था। कालांतर में यह सिद्ध भी हो गया। 1971 में पूर्वी पाकिस्तान, पाकिस्तान से अलग हो गया और एक नए स्वतंत्र राष्ट्र के रूप मे बांग्लादेश का गठन हुआ।
 
 
Partition of India- 1947
 
2 जून 1947 को भारतीय नेताओं के साथ बैठक माउंटबेटन के बाएं से जिन्ना, लियाकत अली खान, सरदार अब्दुर रब निश्तार, सरदार बलदेव सिंह, आचार्य कृपलानी, सरदार पटेल और पंडित नेहरू
 
 
4 जून को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में लॉर्ड माउंटबेटन ने, 14 / 15 अगस्त को स्वतंत्रता की तारीख के रूप में घोषित किया। यह आकस्मिक था। माउंटबेटन द्वारा घोषित समय सारिणी पर अमल के लिए 18 जुलाई को ब्रिटिश संसद द्वारा भारत का स्वतंत्रता अधिनियम पारित किया गया था।
 
 
Nata Bazar Lahore
 
दंगो की आग में झुलस कर तबाह हुआ लाहौर का नाटा बाजार
 
 
amritsar during partition
 
दंगो के दौरान अमृतसर की गलियों में गस्त लगाते ब्रिटश सैनिक
 
 
Rawalpindi during partition
 
रावलपिंडी के पास मांडेर गाँव में दुकानों और घरों में लगाई गई आग की तस्वीर
 
 
 
  during partition
 
हिंसक दंगो के बाद  ध्वस्त हुईं इमारतें
 

Cyril Radcliffe 
 
सिरिल रैडक्लिफ
 
 
रेडक्लिफ को सौंपा गया रेखा खींचने का काम
 
 
रेडक्लिफ, वह व्यक्ति जिन्हें विभाजन के लिए रेखा खींचने का काम सौंपा गया था। वह पहले कभी भारत नहीं आए थे। उनके पास जटिलताओं को समझने का कोई तरीका नहीं था। जब उनसे पहली बार पंजाब सीमा आयोग के प्रमुख के रूप में दायित्व निभाने के लिए संपर्क किया गया था, उनसे जून 1948 तक कार्य पूरा करने की उम्मीद की गई थी। लेकिन जैसा कि सत्ता हस्तांतरण का कार्य तीव्र कर दिया गया था, उनके पास रेखा खींचने के लिए महज तीन सप्ताह था। इस प्रक्रिया को एक व्यक्तिगत एजेंडे की तरह लागू किया गया था। रिपोर्ट से पता चलता है कि पूरी योजना और इसके कार्यान्वयन को समय से पहले किए जाने को, वायसराय की व्यक्तिगत जीत के रूप में देखा गया था।
 
Cyril Radcliffe 1947
 
 
भारत के विभिन्न हिस्सों को दहला देने वाली 1946 और 1947 में हुई सांप्रदायिक हिंसा की व्यापकता और क्रूरता पर विस्तार से लिखा गया है। हिंसा की प्रकृति न केवल लोगों के जीवन को नष्ट करने, बल्कि दूसरे समूह की सांस्कृतिक और भौतिक उपस्थिति को भी मिटा देने की थी। यह यथार्थ है कि जिन क्षेत्रों ने इस हिंसा को देखा, उन्होंने उन्हीं समुदायों को सदियों से सह अस्तित्व में रहते देखा था। पंजाब, बिहार, संयुक्त प्रांत और निश्चित रूप से बंगाल कुछ ऐसे उदाहरण हैं, जहां सह-अस्तित्व जीवन का एक तरीका रहा है। झड़पें होती थीं, लेकिन वह आमतौर पर स्थानीय थीं और जितनी जल्दी शुरू होती थीं, उतनी ही जल्दी खत्म भी होती थीं। 1947 से पूर्व के पंजाब में एक भी ऐसे गांव की पहचान कठिन होगी, जिस पर किसी खास समुदाय द्वारा विशिष्टता के साथ दावा किया जा सके।
 
 
 1947 INDIA PAKISTAN
 
यह समाचार पत्र वर्णानुक्रम में अंबाला, हरियाणा में लापता हिंदू और सिख शरणार्थियों के नाम सूचीबद्ध करता है। यह इस बात पर प्रकाश डालता है कि विभाजन के तुरंत बाद उपमहाद्वीप में लाखों लोगों के लिए स्थिति कितनी विकट और अनिश्चित थी। जैसा कि कुछ परिवारों ने अपने रिश्तेदारों को मरते हुए देखा, अन्य लगातार इस चिंता में रहते थे कि उनके प्रियजन के साथ क्या हुआ होगा। लोगों ने सहायता के लिए सरकार को लिखा, हालांकि, अधिकांश पत्र अनुत्तरित थे क्योंकि सरकार मानवीय संकट से निपटने के लिए संघर्ष कर रही थी। फिर भी, लोगों ने इस आशा और प्रत्याशा को भी आगे बढ़ाया कि शायद वे अपने लापता रिश्तेदारों को फिर से ढूंढ लेंगे।
 
 
जून 1947 में, माउंटबेटन ने सर सिरिल रैडक्लिफ (बैरिस्टर) को दो सीमा आयोगों की अध्यक्षता करने के लिए कहा एक बंगाल के लिए और एक पंजाब के लिए। उन्हें भारत का कोई ज्ञान नहीं था और वे इससे पहले कभी भारत नहीं आए थे। माउंटबेटन ने इसे एक अनुकूल बिन्दु माना क्योंकि कोई भी उन पर पक्षपाती होने का आरोप नहीं लगा सकता था। सीमा आयोग के सदस्य समान रूप से अलग-अलग थे, और विभाजन पर सहमत नहीं हुए थे। इस प्रकार निर्णय लेने की जिम्मेदारी रैडक्लिफ को सौंप दी गई थी। वे 8 जुलाई को भारत आए और उन्होंने 12 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट पूरी कर ली थी।
 
 
 1947 INDIA PAKISTAN
 
 नए आशियाने की तलाश