उज्जैन रेप पीड़िता के लिए देवदूत बने आचार्य राहुल शर्मा ; खून से लथपथ, दर्द से कराहती दर-दर भटकती नाबालिग को पहुंचाई मदद

28 Sep 2023 18:08:32

MP Ujjain
 
 
मध्यप्रदेश के उज्जैन से एक मानवता को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक 12 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म की घटना घटित हुई है। मामला संज्ञान में आने के बाद पुलिस ने अभी तक इस मामले में 5 आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। इन आरोपियों से पुलिस सख्ती से पूछताछ कर रही है। बताया जा रहा है कि यह घटना 25 सितम्बर की है। वहीं रेप पीड़िता बच्ची के बारे में पता चला है कि ये बच्ची मध्य प्रदेश के सतना की रहने वाली है। पुलिस की एक टीम को जांच के लिए सतना भेजा गया है।
 
 
गुरुकुल आचार्य राहुल शर्मा ने बढया मदद का हाथ
 
 
दरअसल इस घटना के बाद 12 वर्षीय नाबालिग लड़की अर्धनग्न और लहूलुहान अवस्था में दर्द से कराहती घंटो सड़कों पर घूमती रही। लेकिन इस बीच कोई भी उसकी मदद के लिए आगे नहीं आया। काफी देर तक सड़कों पर घूमते घूमते वो पीड़िता एक आश्रम के करीब पहुंची जहाँ गुरुकुल डंडी सेवा आश्रम के पुजारी और आचार्य राहुल शर्मा की नजर इस पीड़िता पर पड़ी। आचार्य राहुल शर्मा ने तनिक भी देर किए बिना तुरंत उस बालिका के पास पहुंचे और उसके अर्धनग्न पड़े शरीर को अपने अंगवस्त्र से ढंका। इस बारे में आचार्य राहुल शर्मा ने दैनिक भास्कर के साथ बातचीत करते हुए पूरी आपबीती सुनाई कि क्या कुछ हुआ।
 
 
आचार्य ने सुनाई आपबीती
 
 
मीडिया से बातचीत करते हुए गुरुकुल के आचार्य राहुल शर्मा ने बताया कि ‘मुझे कहीं इमरजेंसी में गुरुकुल से बाहर जाना था। इसी दौरान मैंने देखा कि एक बदहवास बालिका इसी मार्ग से बड़नगर क्षेत्र की ओर पैदल जा रही थी। मैंने देखा बालिका के पांव पूरी तरह वस्त्र विहीन थे। ऊपर उसने छोटा-सा वस्त्र धारण कर रखा था। जिसे बार-बार खींचकर वह अपने शरीर को ढकने का प्रयास कर रही थी। मैंने उसे अपना तुरंत ऊपरी अंगवस्त्र दे दिया। जिससे उसने अपने शरीर को ढका और फिर उसके बाद बालिका को अपने आश्रम में लाया। इस बीच वो काफी डरी और सहमी हुई थी। मैंने मेरे आश्रम में उसे स्वल्पाहार करवाया।
 
 
आचार्य राहुल शर्मा ने बताया कि ‘मैंने बच्ची से पूछा, भूख लग रही है? उसने मुझे हां का एहसास कराया। मैंने उसे आश्रम से लेकर नाश्ता और चाय दी। उसे जितना लगा, उतना उसने खाया। मैं उसे बार-बार पूछने का प्रयास किया कि तुम्हारा नाम क्या है? तुम कहां से आई हो? कहां की रहने वाली हो? या किस समय से उज्जैन में हो? तुम्हारे माता-पिता का कोई नाम नंबर याद हो तो वह मुझे बताओ। तुम यहां पर बिल्कुल सुरक्षित हो। तुम्हें यहाँ किसी प्रकार का कोई भय नहीं है। मैंने बार-बार उसे विश्वास दिलाया लेकिन वो इतनी डरी थी कि वो कुछ भी बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी।
 
 
10-20 मिनट होने के बाद भी उससे कोई बात नहीं हो सकी लेकिन कुछ देर बाद उसने कुछ बोलने की कोशिश की। वह कुछ बोल रही थी लेकिन मैं शायद उसकी भाषा समझ नहीं पा रहा था। मैंने उसे पेन और कॉपी भी दी कि तुम इस पर कुछ लिखकर बताओ। जब वह कुछ नहीं लिख पाई तो मैंने तुरंत 100 नंबर पर डायल किया।
 
 
दो से तीन बार मेरा कॉल कट किया गया। उसके पश्चात मैंने महाकाल मंदिर के कुछ प्रशासनिक लोगों को कॉल किया। उन्होंने मुझे महाकाल थाने के नंबर दिए। मैंने वहां पर शिकायत दर्ज कराई। उसके बाद एफआईआर दर्ज कराई गई। मैंने बच्ची को पुलिस के हवाले किया ताकि वह सुरक्षित हाथों में चली जाए। मुझे कहीं इमरजेंसी मीटिंग में जाना था। लेकिन इसके बावजूद अपने सारे कार्यों को मैंने स्थगित करके अपनी नजर के सामने पीड़िता को पुलिस को सौंपा।'' फिलहाल पुलिस ने अभी तक इस मामले में 5 आरोपियों को हिरासत में ले लिया है और उनसे पूछताछ जारी है।
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
Powered By Sangraha 9.0