दिल्ली ब्लास्ट के मुख्य आरोपी डॉ. उमर की हुई पहचान ; DNA टेस्ट से बड़ा खुलासा, केंद्र ने माना आतंकी हमला

    13-नवंबर-2025
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Delhi blast case update
 
DelhiBlast : 10 नवंबर को लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए भीषण धमाके के मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी की पहचान DNA टेस्ट के जरिए हो गई है। जांच एजेंसियों को उमर की कार से दांत, हड्डियां, खून से सने कपड़ों के टुकड़े और पैर का हिस्सा मिला था, जो स्टीयरिंग व्हील और एक्सीलेटर के बीच फंसा हुआ था। ये सभी सैंपल उमर की मां के DNA से मैच कर गए हैं, जिससे उसकी मौत की पुष्टि हो गई है।
 
 
CCTV फुटेज में कैद हुआ धमाके का क्षण
 
 
धमाके से जुड़ा अब तक का सबसे स्पष्ट 10 सेकेंड का CCTV फुटेज सामने आया है। इसमें दिख रहा है कि शाम 6:51 बजे लाल किला मेट्रो स्टेशन के सिग्नल पर करीब 20 गाड़ियां खड़ी थीं। जैसे ही सिग्नल ग्रीन हुआ, सफेद i20 कार में तेज धमाका हुआ। विस्फोट इतना जबरदस्त था कि आसपास की गाड़ियों के परखच्चे उड़ गए और आग की लपटें कई फीट ऊपर तक उठीं। इस ब्लास्ट में 12 लोगों की मौत और 25 से अधिक घायल हुए थे। घायलों का इलाज दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में जारी है।
 
 
 
 
केंद्र सरकार ने माना ‘आतंकी हमला’
 
  
बुधवार को हुई कैबिनेट मीटिंग में केंद्र सरकार ने दिल्ली कार ब्लास्ट को आतंकी हमला घोषित किया। इसके साथ ही गृह मंत्रालय ने एनआईए, एनएसजी और दिल्ली पुलिस को संयुक्त जांच के निर्देश दिए हैं।
 
 
मुख्य आरोपी की कार हरियाणा में बरामद
 
 
फोरेंसिक जांच के दौरान एक और बड़ा सुराग मिला। पुलिस को एक लाल ईको स्पोर्ट्स कार (DL10-CK-0458) हरियाणा के खंदावली गांव में लावारिस हालत में मिली। यह कार डॉ. उमर नबी के नाम पर रजिस्टर्ड थी। सूत्रों के मुताबिक, यह वही कार थी जो धमाके की साजिश में शामिल रही थी। फिलहाल NSG की बम स्क्वाड टीम वाहन की बारीकी से जांच कर रही है। दिलचस्प बात यह है कि यह गाड़ी उमर के ड्राइवर की बहन के घर के पास खड़ी मिली थी।
 
 
तीन बड़े खुलासे: कैसे बुनी गई थी दिल्ली को दहलाने की साजिश
 
 
1. जनवरी में लाल किले की रेकी की गई थी
 
जांच में पता चला है कि डॉ. उमर नबी और अल फलाह यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मुजम्मिल गनी ने जनवरी 2025 में कई बार लाल किले की रेकी की थी। दोनों ने वहां की सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ के पैटर्न का अध्ययन किया था।
शक है कि इनका पहला निशाना 26 जनवरी था, लेकिन उस समय योजना विफल हो गई।
 
 
2. 6 दिसंबर को हमले की थी नई योजना
 
पूछताछ में सामने आया कि उमर दिल्ली में 6 दिसंबर को एक और बड़ा धमाका करना चाहता था। लेकिन इससे पहले ही डॉ. मुजम्मिल की गिरफ्तारी हो गई, जिससे पूरी साजिश ध्वस्त हो गई। अब तक कुल 8 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जिनमें से 6 डॉक्टर हैं। इस मॉड्यूल का संचालन फरीदाबाद से किया जा रहा था। मुख्य फरार आरोपी डॉ. निसार, जो डॉक्टर्स एसोसिएशन ऑफ कश्मीर का अध्यक्ष है, अब भी लापता है।
 
 
3. खाद की बोरियों में छिपाया गया था विस्फोटक
 
 
फरीदाबाद पुलिस को एक किराए के कमरे से 2900 किलो विस्फोटक सामग्री मिली है। डॉ. मुजम्मिल गनी यह सामग्री खाद की बोरियां बताकर जमा कर रहा था। पड़ोसियों के अनुसार, उसने कहा था कि "ये खाद कश्मीर ले जानी है", जबकि दरअसल वह विस्फोटक था।
पुलिस ने इलाके के CCTV फुटेज जब्त कर लिए हैं।
 
 
‘व्हाइट कॉलर’ टेरर मॉड्यूल का खुलासा
 
 
जांच एजेंसियों ने बताया कि यह हमला किसी सामान्य आतंकी मॉड्यूल का नहीं, बल्कि एक “व्हाइट कॉलर टेरर नेटवर्क” का हिस्सा था —
जिसमें डॉक्टर, प्रोफेसर और पेशेवर लोग शामिल थे। इस नेटवर्क का सीधा संबंध जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद जैसे आतंकी संगठनों से है। फरीदाबाद की डॉ. शाहीन शाहिद, जो अब पुलिस हिरासत में है, ने बताया कि वह पिछले दो वर्षों से विस्फोटक सामग्री इकट्ठा कर रही थी।
 
 
देशभर में 200 धमाकों की साजिश
 
 
सूत्रों के मुताबिक, इस मॉड्यूल की योजना सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं थी। आतंकियों ने देशभर में 200 IED धमाके करने की साजिश रची थी —
 
जिसमें लाल किला, इंडिया गेट, कॉन्स्टिट्यूशन क्लब, गौरी शंकर मंदिर, साथ ही गुरुग्राम, फरीदाबाद, रेलवे स्टेशन और बड़े मॉल्स शामिल थे। उनका उद्देश्य धार्मिक स्थलों पर हमले कर सांप्रदायिक तनाव फैलाना था। इसके लिए उन्होंने कश्मीर के डॉक्टरों को इसलिए चुना ताकि वे बिना शक के यात्रा कर सकें।
 
 
सुसाइड कार बॉम्बिंग नहीं था हमला
 
 
फोरेंसिक जांच से यह भी स्पष्ट हुआ है कि यह धमाका सुसाइड कार बॉम्बिंग जैसा हमला नहीं था। कार ने किसी इमारत या लक्ष्य को नहीं टक्कर मारी। संभावना है कि विस्फोट अकस्मात ट्रिगर हुआ हो या टाइमर से संचालित रहा हो।
 
 
दिल्ली ब्लास्ट ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने नए तरह के शिक्षित आतंकी नेटवर्क की चुनौती खड़ी कर दी है। डॉक्टरों, शिक्षकों और प्रोफेशनल्स से बना यह व्हाइट कॉलर मॉड्यूल इस बात का प्रमाण है कि आतंक अब केवल सीमा पार से नहीं, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों के भीतर से भी जन्म ले रहा है।