पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा (KPK) के मुख्यमंत्री अली अमीन गंडापुर ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसियों की पोल दुनिया के सामने खोल दी है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में गंडापुर ने सीधे-सीधे पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियों ISI और MI पर आरोप लगाया कि वे तालिबानी आतंकियों को संरक्षण देती हैं और उन्हें राज्य में "अपने मिशनों" के लिए इस्तेमाल करती हैं।
ISI ने कहा छोड़ दो - "ये हमारे काम के लोग हैं"
गंडापुर ने कहा, "हमारे पुलिसकर्मी जान जोखिम में डालकर आतंकवादियों को गिरफ्तार करते हैं, लेकिन बाद में खुफिया एजेंसियों के दबाव में उन्हीं आतंकियों को छोड़ दिया जाता है।"
उन्होंने साफ शब्दों में कहा, ''ISI और MI के अफसर खुद हस्तक्षेप करते हैं और कहते हैं – ‘ये अच्छे तालिबान हैं, हमारे लोग हैं, इन्हें छोड़ दो।’"
'इनको वर्दी पहनाओ, कश्मीर भेजो' :
गंडापुर यहीं नहीं रुके। उन्होंने पाकिस्तान की 'गुड तालिबान' नीति को सिरे से खारिज कर दिया।
उन्होंने तीखे लहजे में कहा – "अगर ये आतंकवादी इतने ही ज़रूरी हैं तो इन्हें फौज में भर्ती करो, वर्दी पहनाओ और कश्मीर या जहाँ भी भेजना है भेजो, लेकिन खैबर पख्तूनख्वा की जनता पर इन्हें मत थोपो।"
"हम अपने शहरों में इन जैसे तत्वों को खुलेआम घूमने की अनुमति नहीं देंगे।"
पाकिस्तानी सेना और आतंकियों की जुगलबंदी बेनकाब
गंडापुर के इस साहसिक बयान ने एक बार फिर इस बात की पुष्टि कर दी है कि पाकिस्तान की सेना और उसकी खुफिया एजेंसियां किस तरह आतंकवादियों को 'रणनीतिक साधन' मानती हैं।
उन्होंने यह भी कहा, "मैं किसी से डरता नहीं। ये सच है और मैं बार-बार कहूंगा कि जब वे आतंकी दोबारा पकड़े गए, तो ISI और MI ने आकर कहा 'ये हमारे लोग हैं, हमें इनके ज़रूरत है।"
KPK के मुख्यमंत्री का यह बयान उस कड़वे सच को सामने लाता है जिसे भारत और दुनिया लंबे समय से कहती आ रही है पाकिस्तान आतंकवाद का पालक और संरक्षक है।
अब जब पाकिस्तान का ही एक मुख्यमंत्री आतंकवादियों और सेना की मिलीभगत का खुला पर्दाफाश कर रहा है, तो क्या दुनिया इस पर कार्रवाई करेगी?
गंडापुर का यह बयान न सिर्फ पाकिस्तान की आतंकी रणनीति को बेनकाब करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि पाकिस्तानी अवाम और वहां के स्थानीय नेता अब इस खतरनाक खेल से तंग आ चुके हैं।