जम्मू कश्मीर में भारी बारिश से आई बाढ़ और भूस्खलन ने बुनियादी ढांचे को गहरी चोट पहुँचाई है। लोक निर्माण विभाग (PWD) की रिपोर्ट के मुताबिक अब तक करीब 2500 सड़कें प्रभावित हुई हैं, जिनमें से 1500 को बहाल कर लिया गया है, जबकि करीब 1000 सड़कें अब भी बंद हैं। शुरुआती अनुमान बताता है कि नुकसान 100 करोड़ रुपये से अधिक का है, हालांकि विभाग इसका विस्तृत आकलन अभी कर रहा है।
सबसे बड़ी मार प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत बनी नई सड़कों पर पड़ी है। कई जगहों पर भारी भूस्खलन से डंगे खिसक गए, पुल टूट गए और मार्ग ध्वस्त हो गए, जिससे आमजन की आवाजाही पूरी तरह ठप पड़ गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो लोग पैदल ही सफर करने को मजबूर हैं।
जम्मू संभाग में सबसे ज्यादा नुकसान
बारिश और भूस्खलन से सबसे अधिक असर जम्मू संभाग में देखने को मिला है।
कठुआ, सांबा, जम्मू, रियासी, उधमपुर, किश्तवाड़, डोडा, राजौरी, रामबन और पुंछ जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
वहीं, कश्मीर संभाग में अनंतनाग और कुलगाम जिलों में गंभीर नुकसान हुआ है, जबकि अन्य जिलों में कुछ जगहों पर हल्की घटनाएं हुईं।
PWD ने JCB और टिपर मशीनों की मदद से कई क्षेत्रों में सड़कों से मलबा हटाया है। जहां भूस्खलन कम है, वहां से मशीनों को प्रभावित इलाकों में शिफ्ट किया जा रहा है। लेकिन सबसे बड़ी चुनौती है – मलबे को ठिकाने लगाना, जिसे कई बार किलोमीटरों दूर ले जाना पड़ रहा है।
केंद्र से मिलेगा राहत पैकेज
PWD नुकसान का विस्तृत ब्योरा तैयार कर रहा है, जिसे जल्द ही केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। इसके आधार पर बजट जारी होगा और सड़कों की मरम्मत व पुनर्निर्माण का कार्य शुरू किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि अगर मौसम अनुकूल रहा, तो आगामी एक हफ्ते में सभी सड़कें बहाल कर दी जाएँगी।
संकट से सबक
जम्मू-कश्मीर में बार-बार आने वाले भूस्खलन ने यह भी दिखाया है कि इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण में टिकाऊ और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की जरूरत है। कमजोर इलाकों में सड़कों और पुलों की मजबूती पर दोबारा काम करना होगा, ताकि भविष्य में ऐसी तबाही से बचा जा सके।