Iran Protest : सड़कों पर लाशें-अस्पतालों में मातम, खामेनेई शासन की बर्बरता, 3000 से अधिक मौतों का दावा

निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर ओपन फायरिंग..

    14-जनवरी-2026
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iran death
 
Iran Protest 2026 : ईरान इस वक्त अपने इतिहास के सबसे भयावह दौर से गुजर रहा है। सड़कों पर लाशों के ढेर लगे हैं, अस्पताल शवगृह में तब्दील हो चुके हैं और हर तरफ अपनों को तलाशते परिजनों की चीख-पुकार सुनाई दे रही है। हिंसक प्रदर्शनों को कुचलने के नाम पर खामेनेई सरकार ने जिस बर्बरता का रास्ता चुना है, उसने पूरे देश को एक खुले नरसंहार में झोंक दिया है। प्रत्यक्षदर्शियों, मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक 3000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। यह ईरान के हालिया इतिहास का सबसे बड़ा जनसंहार माना जा रहा है।
  
 
 
 
 
निहत्थों पर गोलियां
 
 
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ ने पुष्टि की है कि सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों पर सीधे गोलियां बरसाईं। ज्यादातर प्रदर्शनकारी निहत्थे थे, उनके हाथों में न हथियार थे, न कोई सुरक्षा। गोलीबारी में सैकड़ों लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि हजारों लोग गोलियों और छर्रों से घायल हुए हैं। कई घायलों के सिर में फ्रैक्चर, सीने और पेट में गहरे जख्म पाए गए हैं।
 

Iran protest update 
 Image Source : REUTERS/Francesco Fotia
 
 
शवगृह के बाहर कतारें
 
 
ईरान के मानवाधिकार केंद्र ने एक डॉक्टर के हवाले से बताया कि घायलों की संख्या इतनी अधिक है कि सटीक आंकड़ा जुटाना नामुमकिन हो गया है। तेहरान समेत कई शहरों के अस्पतालों में हालात युद्ध क्षेत्र जैसे हो चुके हैं। एक नर्स के मुताबिक, “सिर्फ एक घंटे के भीतर 19 घायलों को भर्ती किया गया, सभी को गोली लगी थी।” वहीं, शोहादा अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया कि कई प्रदर्शनकारी अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ चुके थे। ज्यादातर को सिर में बेहद करीब से गोली मारी गई थी। कई गोलियां सीधे गले, फेफड़ों और दिल को चीरती हुई निकल गईं।
 
इंटरनेट बंद, फोन कॉल ठप
 
 
खामेनेई सरकार ने सच्चाई को दबाने के लिए इंटरनेट, मोबाइल नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय कॉल्स पर कई दिनों से प्रतिबंध लगा रखा है। इसके बावजूद, ईरान से रोंगटे खड़े कर देने वाले वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं। इन वीडियो में देखा जा सकता है कि मुर्दाघरों के बाहर बॉडी बैग में भरकर शव सड़कों पर रखे गए हैं। लाशों के ढेर में लोग अपने बेटों, भाइयों और पिता को पहचानने की कोशिश कर रहे हैं।
 
 
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गरीब तबका सबसे बड़ा शिकार
 
 
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, मृतकों में ज्यादातर आम नागरिक हैं, जो गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। ये वे लोग थे, जो सड़कों पर सिर्फ अपनी आवाज़ उठाने निकले थे, जवाब में उन्हें गोलियां मिलीं। ईरानी स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्थानीय मीडिया को बताया कि पूरे देश में अब तक 3000 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें कुछ सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। हालांकि, आशंका जताई जा रही है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।
 
 
दुनिया की खामोशी 
 
 
ईरान में जो हो रहा है, वह सिर्फ एक आंतरिक सुरक्षा कार्रवाई नहीं, बल्कि अपने ही नागरिकों के खिलाफ सत्ता का खूनी युद्ध है।
खामेनेई शासन ने विरोध की हर आवाज को कुचलने के लिए गोलियों को जवाब बना दिया है। आज ईरान की सड़कों पर सिर्फ लाशें नहीं बिछी हैं वहां इंसानियत, लोकतंत्र और मानवाधिकार भी खून से लथपथ पड़े हैं।