Iran Unrest : ईरान बीते दो हफ्तों से अभूतपूर्व राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। 28 दिसंबर 2025 से शुरू हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों ने देश की आंतरिक स्थिरता को गहरी चोट पहुंचाई है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि हर गुजरते दिन के साथ स्थिति और अधिक विस्फोटक होती जा रही है।
मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों के अनुसार, अब तक इन प्रदर्शनों में 2,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कुछ स्वतंत्र रिपोर्ट्स मृतकों की संख्या 3,000 से भी ज्यादा बता रही हैं। सड़कों पर हिंसा, सुरक्षाबलों की कार्रवाई, इंटरनेट शटडाउन और व्यापक दमन ने ईरान को लगभग अघोषित आपातकाल की स्थिति में धकेल दिया है।
एयरस्पेस बंद, वैश्विक उड़ानों पर असर
ईरान में बढ़ती हिंसा का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय परिवहन पर भी पड़ा है। बुधवार को ईरान ने अचानक अपना एयरस्पेस बंद कर दिया, जिससे भारत, यूरोप और उत्तरी अमेरिका के बीच उड़ानों का संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
एयर इंडिया और इंडिगो जैसी प्रमुख भारतीय एयरलाइंस को अपने फ्लाइट रूट बदलने पड़े हैं। इन रूट परिवर्तनों के कारण कई उड़ानों में घंटों की देरी हुई, जबकि कुछ फ्लाइट्स को पूरी तरह रद्द करना पड़ा। दोनों एयरलाइंस ने यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी कर स्पष्ट किया है कि सुरक्षा कारणों से यह फैसला लिया गया है, लेकिन इससे यात्रियों की परेशानी काफी बढ़ गई है।
ईरान में फंसे भारतियों के लिए एडवाइजरी
इस संकट के बीच सबसे बड़ी चिंता ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर है। वर्तमान में ईरान में करीब 10,000 से 12,000 भारतीय मूल के लोग मौजूद हैं। इनमें बड़ी संख्या छात्रों की है, जिनमें 2,000 से 3,000 कश्मीरी छात्र मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JKSA) ने इन छात्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि बार-बार इंटरनेट बंद किए जाने और हिंसक हालातों के कारण छात्रों से संपर्क करना बेहद मुश्किल हो गया है। इससे भारत में बैठे उनके परिजनों की चिंता और बेचैनी लगातार बढ़ती जा रही है।
निकासी योजना पर असमंजस!
भारतीय दूतावास ने ईरान में रह रहे सभी भारतीय नागरिकों को यथाशीघ्र देश छोड़ने की सलाह दी है। हालांकि, छात्रों और उनके संगठनों का कहना है कि अब तक किसी औपचारिक निकासी योजना की घोषणा नहीं की गई है। इस असमंजस की स्थिति ने हालात को और जटिल बना दिया है। छात्र और उनके माता-पिता लगातार सरकार से सुरक्षित निष्कासन की मांग कर रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक कोई ठोस रोडमैप सामने नहीं आया है।
व्यापार पर मंडराता खतरा
ईरान में जारी अस्थिरता का असर भारत-ईरान व्यापार पर भी पड़ता दिख रहा है। पहले ही अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते दोनों देशों के बीच व्यापार में भारी गिरावट आ चुकी है। मौजूदा हालात में शिपिंग रूट्स और तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने भारत के व्यापार घाटे को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं।
आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2019 में भारत-ईरान व्यापार 17.6 बिलियन डॉलर का था, जो 2024 में घटकर मात्र 2.3 बिलियन डॉलर रह गया। वर्तमान में ईरान के साथ भारत का व्यापार कुल व्यापार का केवल 0.2 फीसदी है। हालांकि, यदि समुद्री और ऊर्जा आपूर्ति मार्ग प्रभावित होते हैं, तो इसका अप्रत्यक्ष असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
भारत की रणनीतिक परियोजना पर संकट
ईरान में पैदा हुए हालातों का सबसे बड़ा रणनीतिक असर चाबहार बंदरगाह परियोजना पर पड़ता नजर आ रहा है। भारत इस परियोजना में करीब 500 मिलियन डॉलर का निवेश कर चुका है। चाबहार बंदरगाह भारत के लिए पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान, मध्य एशिया और यूरोप तक पहुंच का एक अहम वैकल्पिक मार्ग है।
यह बंदरगाह भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और रणनीतिक नीति का केंद्र बिंदु रहा है, लेकिन ईरान की मौजूदा राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक अस्थिरता इस परियोजना के भविष्य पर सवाल खड़े कर रही है। यदि हालात जल्द नहीं सुधरे, तो भारत की यह दीर्घकालिक रणनीतिक कोशिश गंभीर संकट में फंस सकती है।
भारत के लिए चुनौती!
ईरान में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शन अब केवल एक आंतरिक संकट नहीं रहे, बल्कि उन्होंने क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर प्रभाव डालना शुरू कर दिया है। भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, छात्रों की निकासी, व्यापारिक हित और चाबहार जैसी रणनीतिक परियोजनाएं सब कुछ इस संकट से सीधे तौर पर जुड़ गया है। आने वाले दिनों में भारत सरकार के लिए यह स्थिति कूटनीतिक संतुलन, मानवीय जिम्मेदारी और रणनीतिक हितों के बीच एक कठिन परीक्षा साबित हो सकती है।