भारत-EU ऐतिहासिक व्यापार समझौते की दहलीज पर ; ट्रम्प के टैरिफ वॉर के बीच भारत बन रहा वैश्विक भरोसे का केंद्र

    21-जनवरी-2026
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India EU Trade Deal

 
India EU Trade Deal: दुनिया की बदलती भू-राजनीति और व्यापारिक अनिश्चितताओं के दौर में भारत एक बार फिर वैश्विक अर्थव्यवस्था का स्थिर स्तंभ बनकर उभर रहा है। इसका ताजा संकेत दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) से मिला, जहां यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भारत-यूरोपीय यूनियन के बीच होने वाले ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) का खुला संकेत दिया।
 
 
उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस प्रस्तावित समझौते को “Mother of All Deals” बताते हुए कहा कि भारत और EU अब एक ऐसी डील के बेहद करीब हैं, जो करीब 200 करोड़ लोगों के लिए नया बाजार खोलेगी और वैश्विक GDP के लगभग 25 प्रतिशत हिस्से को कवर करेगी। 
 
 
गणतंत्र दिवस पर ऐतिहासिक ऐलान की तैयारी 
 
 
WEF दावोस में उर्सुला ने स्पष्ट किया कि वह 25 से 27 जनवरी के बीच भारत दौरे पर रहेंगी और 27 जनवरी को होने वाले भारत-EU शिखर सम्मेलन में इस समझौते के पूरा होने की औपचारिक घोषणा की जा सकती है। उन्होंने कहा, “मैं भारत जा रही हूं। अभी कुछ काम बाकी है, लेकिन हम एक ऐतिहासिक समझौते की दहलीज पर हैं। यह डील यूरोप को दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते और सबसे गतिशील देश भारत के साथ व्यापार करने का फर्स्ट-मूवर एडवांटेज देगी।” यह बयान सिर्फ एक व्यापारिक समझौते का संकेत नहीं, बल्कि भारत पर बढ़ते वैश्विक भरोसे की मुहर है।
 
 
 
 
 
FTA क्या होता है और यह डील क्यों अहम है? 
 
 
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) वह समझौता होता है, जिसके तहत दो देश या समूह आपसी व्यापार को आसान बनाने के लिए....
  • आयात-निर्यात शुल्क (टैरिफ) घटाते हैं

  • गैर-जरूरी व्यापार बाधाएं हटाते हैं

  • सेवाओं, निवेश और सप्लाई चेन को मजबूत करते हैं

भारत-EU FTA का मतलब है कि भारतीय उत्पादों और सेवाओं को 27 यूरोपीय देशों के बाजार में बड़ी पहुंच मिलेगी, जबकि यूरोपीय कंपनियों को भारत जैसे विशाल और युवा बाजार में मजबूत अवसर मिलेंगे।

 
भारत-EU व्यापार को कितना फायदा?
 

वर्तमान में भारत और यूरोपीय संघ के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2023-24 में 137.41 अरब डॉलर रहा। इस FTA के लागू होने के बाद व्यापार के दोगुना होने की संभावना है। भारतीय टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटो पार्ट्स, आईटी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़ा फायदा मिलेगा। सेवाओं पर टैरिफ कम होने से भारतीय प्रोफेशनल्स को यूरोप में ज्यादा अवसर मिलेंगे साथ ही, दोनों पक्ष रक्षा सहयोग समझौता और 2026-2030 के लिए रणनीतिक रोडमैप भी घोषित कर सकते हैं।
 
 
टैरिफ वॉर के बीच क्यों अहम है यह डील?
 
 
यह समझौता ऐसे समय सामने आ रहा है, जब अमेरिका की नई टैरिफ नीतियों और व्यापारिक प्रतिबंधों ने पूरी वैश्विक सप्लाई चेन को अस्थिर कर दिया है। डोनाल्ड ट्रम्प की टैरिफ वॉर से भारत, यूरोपीय संघ के सभी 27 देश सीधे प्रभावित हुए हैं। ऐसे माहौल में भारत-EU का एक-दूसरे के करीब आना यह दर्शाता है कि दुनिया अब स्थिर, भरोसेमंद और नियम-आधारित व्यापार साझेदार की तलाश में है और भारत उस कसौटी पर खरा उतर रहा है।
 
 
भारत की रणनीति: नए बाजार, कम निर्भरता
 
 
भारत इस समझौते के जरिए अमेरिकी बाजार पर अत्यधिक निर्भरता कम करना चाहता है। भारतीय उत्पादों के लिए नए और स्थायी बाजार तैयार कर रहा है। “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” को वैश्विक मंच दे रहा है। साथ ही यूरोप के साथ गहरा व्यापारिक रिश्ता भारत को चीन-केंद्रित सप्लाई चेन का मजबूत विकल्प भी बनाता है।
  
 
गणतंत्र दिवस पर यूरोप की मौजूदगी: प्रतीकात्मक संदेश
 
 
इस बार भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा, यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत-EU रणनीतिक साझेदारी का प्रतीकात्मक संदेश है कि यूरोप भारत को एक भरोसेमंद वैश्विक नेतृत्वकर्ता मान रहा है।
  
 
19 साल का इंतजार होगा खत्म !
 

भारत-EU FTA की यात्रा आसान नहीं रही। पहली बातचीत 2007 में शुरू हुई लेकिन नियमों और महत्वाकांक्षाओं के मतभेद के चलते 2013 में वार्ता ठप हो गई। करीब 9 साल के अंतराल के बाद जून 2022 में बातचीत दोबारा शुरू हुई और अब लगभग 19 साल बाद, 2026 की शुरुआत में यह डील फाइनल होने जा रही है। 

 
UK के बाद EU: भारत की बढ़ती वैश्विक पकड़ 
 
 
भारत पहले ही यूनाइटेड किंगडम के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट कर चुका है। इस समझौते के तहत भारत के 99% सामान UK में जीरो टैरिफ पर जाएंगे। UK के 99% सामान भारत में औसतन 3% टैरिफ पर आएंगे। 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 120 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। अब EU के साथ यह समझौता भारत को वैश्विक व्यापार का केंद्रीय खिलाड़ी बना देगा।  
 
 
टैरिफ वॉर के दौर में भारत बना भरोसे का नाम
 
 
जब दुनिया व्यापार युद्धों, संरक्षणवाद और अनिश्चितताओं से जूझ रही है, तब भारत संवाद, स्थिरता और दीर्घकालिक साझेदारी का रास्ता चुन रहा है। भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट सिर्फ एक व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत की बढ़ती साख, रणनीतिक समझ और नेतृत्व क्षमता का प्रमाण है। दावोस से दिल्ली तक यह संदेश साफ है भारत अब सिर्फ उभरती अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि वैश्विक निर्णय-निर्माता बन चुका है।