
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह दावा करते रहे हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष को रुकवाया।हालांकि भारत की तरफ से भी यह स्पष्ट किया जा चुका कि 2025 मई माह हुए भारत पाकिस्तान के बीच हुए झड़प को सुलझाने में किसी भी तीसरे देश ने मध्यस्थता नहीं की। इसके अलावा कई रिपोर्ट्स में भी यह दावा किया जा चुका है। ऐसे में अब एक बार फिर खुद अमेरिका के एक शीर्ष सीनेटर ने ट्रंप के उस बेतुके दावे को सिरे से खारिज कर दिया है।
अमेरिकी सीनेट की शक्तिशाली इंटेलिजेंस कमेटी के अध्यक्ष और सीनेट इंडिया कॉकस के सह-अध्यक्ष मार्क वार्नर ने साफ कहा है कि भारत-पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव का समाधान किसी तीसरे देश ने नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच स्थापित संवाद माध्यमों के ज़रिये हुआ। वार्नर के मुताबिक, भारत सरकार, खुफिया एजेंसियों और अमेरिकी खुफिया कमेटी से मिली तमाम जानकारियाँ इस बात की पुष्टि करती हैं कि संघर्ष विराम भारत और पाकिस्तान की आपसी सहमति से हुआ था न कि वॉशिंगटन के किसी दबाव या हस्तक्षेप से।
पाकिस्तान ने मांगी रहम की भीख !
हकीकत यह है कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने पाकिस्तान में बैठे आतंकी ठिकानों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की थी। भारत ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि यह लड़ाई पाकिस्तान के खिलाफ नहीं, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ है। लेकिन जब पाकिस्तान ने अपने पाले-पोसे आतंकी संगठनों के समर्थन में जवाबी कार्रवाई शुरू की और जम्मू-कश्मीर, राजस्थान व पंजाब जैसे सीमावर्ती इलाकों में आम नागरिकों को निशाना बनाया, तब भारत ने सैन्य मोर्चे पर सख़्त रुख अपनाया। महज़ 48 घंटों के भीतर भारत की प्रभावी कार्रवाई ने पाकिस्तान को भारी नुकसान पहुँचाया। हालात ऐसे बने कि पाकिस्तान डर के मारे वैश्विक शक्तियों के दरवाज़े खटखटाने लगा और युद्ध रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गुहार लगाने लगा।
भारत ने ठुकराई मध्यस्थता
भारत की नीति शुरू से स्पष्ट रही है भारत-पाकिस्तान के बीच किसी भी मुद्दे पर तीसरे देश की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की जाएगी। यही कारण है कि भारत ने किसी भी वैश्विक दबाव को सिरे से नकार दिया। आख़िरकार, जब पाकिस्तान के DGMO ने भारत के DGMO से संपर्क कर युद्ध रोकने की अपील की, तब दोनों देशों के बीच सैन्य चैनल के ज़रिये बातचीत हुई और युद्धविराम की घोषणा की गई।
ट्रंप का ‘श्रेय अभियान’ और हकीकत
मार्क वार्नर ने ट्रंप के बार-बार किए जा रहे दावों को “अहंकार से प्रेरित” बताया और कहा कि अमेरिका ने सहायक भूमिका निभाने की कोशिश की हो सकती है, लेकिन ट्रंप का व्यक्तिगत हस्तक्षेप का दावा तथ्यहीन है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भारत-पाकिस्तान इससे पहले भी कई गंभीर संकट झेल चुके हैं और भारत अब उस पुरानी प्रतिद्वंद्विता से आगे निकल चुका है, जबकि पाकिस्तान आज भी भारत को लेकर जुनूनी रवैया अपनाए हुए है।
संदेश साफ़ है, यह घटनाक्रम एक बार फिर साबित करता है कि भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता पर खुद निर्णय करता है।आतंकवाद पर भारत की नीति निर्णायक और स्पष्ट है और भारत-पाकिस्तान के बीच किसी भी समझौते का श्रेय किसी तीसरे देश को नहीं, बल्कि भारत की सैन्य शक्ति और कूटनीतिक स्पष्टता को जाता है। ट्रंप चाहे जितनी बार इसका श्रेय लेने की कोशिश करें, लेकिन हकीकत यही है युद्ध भारत ने अपनी शर्तों पर रोका, पाकिस्तान ने मजबूरी में।