'भीख मांगने में हमें आती है शर्म...' ; आर्थिक तंगी पर पाकिस्तानी PM शहबाज शरीफ का बड़ा कबूलनामा

31 Jan 2026 13:36:23
 
Pakistani PM Shehbaz Sharif
 
पाकिस्तान आज अपने इतिहास के सबसे अंधकारमय और अपमानजनक दौर से गुजर रहा है। आर्थिक तंगी, भुखमरी, आसमान छूती महंगाई और विदेशी कर्ज की किस्तों का पहाड़ इन तमाम बोझों तले पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि पाकिस्तान न सिर्फ़ विकास के लिए, बल्कि पुराने कर्ज की किस्त चुकाने के लिए भी नया कर्ज लेने को मजबूर है। एक ऐसा देश, जो कभी भारत से टक्कर लेने के सपने देखता था, आज अपनी सरकार चलाने के लिए आईएमएफ और दूसरे देशों के सामने कटोरा लेकर खड़ा है।
 
 
खुले मंच से कबूलनामा: 
 
 
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अब खुद इस कड़वे सच को दुनिया के सामने स्वीकार कर लिया है। एक सार्वजनिक मंच से उन्होंने कहा कि जब वह और सेना प्रमुख (फील्ड मार्शल) आसिम मुनीर दुनिया भर में देशों के दरवाज़े खटखटाते हैं, तो उन्हें शर्मिंदगी महसूस होती है।
 
 
शहबाज शरीफ ने बिना लाग-लपेट के कहा कि “जब हम किसी देश के सामने पैसे मांगते हैं, तो हमारा सिर शर्म से झुक जाता है। कर्ज लेने की एक कीमत होती है और वह कीमत इज्जत से चुकानी पड़ती है।” यह बयान पाकिस्तान की बदहाली का सबसे बड़ा सबूत है।
 
 
 
 
 
 
वायरल वीडियो ने खोली पोल
 
 
शहबाज शरीफ का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है। वीडियो में वह यह स्वीकार करते नजर आते हैं कि पाकिस्तान को चलाने के लिए उन्हें बार-बार दूसरे देशों से कर्ज मांगना पड़ा। उन्होंने यह भी माना कि कई बार कर्ज देने वाले देशों की ऐसी शर्तें भी माननी पड़ीं, जिन्हें वह खुद पूरा नहीं करना चाहते थे।
 
 
शहबाज ने साफ कहा कि “कर्ज देने वाला ताकतवर होता है और लेने वाले को उसकी ख्वाहिशें न चाहते हुए भी पूरी करनी पड़ती हैं।” हालांकि यह वीडियो कब और कहां का है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इसकी सच्चाई पाकिस्तान की मौजूदा हालत से पूरी तरह मेल खाती है।
 
 
पाकिस्तान की विदेश नीति का हाल
 
 
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि वह और आसिम मुनीर कई देशों के पास गए और कहा आईएमएफ का प्रोग्राम चल रहा है, एक्सटर्नल गैप है, आप इतने बिलियन डॉलर दे दें। उन्होंने माना कि कुछ देशों ने मना नहीं किया, लेकिन यह भी कहा कि कर्ज मांगने वाला हमेशा झुका हुआ ही होता है। यह वही पाकिस्तान है जो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नैतिकता और खुद्दारी का झूठा पाठ पढ़ाता रहा है।
 
 
हर पाकिस्तानी पर बढ़ता कर्ज देश डूब रहा है
 
 
आंकड़े पाकिस्तान की असलियत खुद बयां कर रहे हैं। दिसंबर 2025 तक पाकिस्तान का कुल विदेशी कर्ज 52.366 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका है और यह लगातार बढ़ता ही जा रहा है।
 
 
पाकिस्तानी संसद में पेश वित्तीय नीति के मुताबिक:
 
 
प्रति व्यक्ति कर्ज 13% बढ़कर 3,33,000 रुपये हो गया है
 
 
वित्त वर्ष 2023-24 में यह आंकड़ा 2,94,098 रुपये था
 
 
यानी हर पाकिस्तानी पैदा होते ही कर्जदार बन रहा है
 
 
कर्ज जनता के लिए, ऐश हुक्मरानों के लिए!
 
 
सबसे बड़ा और शर्मनाक सच यह है कि पाकिस्तान की आम जनता महंगाई, बेरोजगारी और भुखमरी से जूझ रही है, जबकि उसी कर्ज के पैसों से पाकिस्तान के हुक्मरान और सेना अपने महल, ऐशो-आराम और विदेशों में संपत्तियां बना रहे हैं।
 
 
इतना ही नहीं, यही कर्ज का पैसा सीमापार आतंकवाद को बढ़ावा देने, भारत के खिलाफ आतंकियों को पालने-पोसने, आतंकी नेटवर्क को जिंदा रखने में भी इस्तेमाल किया जाता रहा है। दुनिया से भीख लेकर पाकिस्तान पहले अपनी सेना और सत्ता की जेबें भरता है, और फिर उसी पैसे से क्षेत्र की शांति को आग में झोंकता है।
 
 
सच स्वीकार करने को मजबूर पाकिस्तान
 
 
शहबाज शरीफ का यह बयान दरअसल पाकिस्तान की नाकामी की स्वीकारोक्ति है। एक ऐसा देश, जो खुद आर्थिक रूप से दिवालिया है, वह दूसरों को धमकाने और अस्थिर करने की नीति पर चलता रहा और आज उसी का नतीजा भुगत रहा है। कर्ज में डूबा पाकिस्तान अब न झूठ छिपा पा रहा है, न सच्चाई से भाग पा रहा है। उसकी बदहाली, उसकी औकात और उसकी असफल नीतियां अब पूरी दुनिया के सामने बेनकाब हो चुकी हैं। 
 
 
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