
अमेरिकी Foreign Agents Registration Act (FARA) के दस्तावेज़ों के अनुसार, अमेरिका में तैनात पाकिस्तानी उच्चायुक्त, राजनयिकों और रक्षा अधिकारियों ने 60 से ज्यादा बैठकों की मांग की। ये बैठकें अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों, सांसदों, पेंटागन, स्टेट डिपार्टमेंट और प्रभावशाली मीडिया संस्थानों के साथ प्रस्तावित की गई थीं। फोन कॉल, ईमेल और निजी मुलाक़ातों के ज़रिये पाकिस्तान लगातार यही कोशिश करता रहा कि अमेरिका भारत की सैन्य कार्रवाई को रुकवाए। यह साफ दिखाता है कि ऑपरेशन सिंदूर की मार पाकिस्तान के लिए कितनी भारी थी।
Treasure Trove documents on Pakistan's lobbying in Washington DC. FARA filing by Squire Patton Boggs show Pakistan side reaching out to number of US Lawmakers during height of India, Pakistan may conflict pic.twitter.com/NDul06D3sU
— Sidhant Sibal (@sidhant) January 7, 2026
जहां पाकिस्तान अमेरिका के सामने गिड़गिड़ा रहा था, वहीं भारत अपने रुख पर पूरी मजबूती से खड़ा रहा। भारत ने साफ कर दिया था- भारत-पाकिस्तान मामला द्विपक्षीय है, किसी तीसरे देश की मध्यस्थता स्वीकार नहीं होगी। यह भारत की कूटनीतिक ताक़त और आत्मविश्वास का प्रमाण था। दबाव के बावजूद भारत ने न तो अपना ऑपरेशन रोका और न ही किसी विदेशी दखल को मंज़ूरी दी। हालाँकि जब पाकिस्तान के DGMO ने भारत के DGMO से डायरेक्ट फ़ोन कॉल पर ऑपरेशन रोकने की गुहार लगाई तो भारत ने सीजफायर के लिए हामी भरी।
अमेरिकी दस्तावेज़ बताते हैं कि पाकिस्तान ने एक लॉबिंग फर्म के ज़रिये ट्रंप प्रशासन तक यह संदेश भिजवाया- “हमें चिंता है कि प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि भारत ने सिर्फ अपनी सैन्य कार्रवाई को पॉज़ किया है, पूरी तरह रोका नहीं है।” यानी पाकिस्तान खुद मान रहा था कि भारत दोबारा और भी कठोर कार्रवाई कर सकता है। इतना ही नहीं, ऑपरेशन सिंदूर में ‘जीत’ के अपने दावों को भी पाकिस्तान के ही दस्तावेज़ कमजोर साबित करते हैं। असल में भारत की कार्रवाई को झेलने में नाकाम रहने के बाद ही पाकिस्तान ने अमेरिका का रुख किया।
'We worry that PM Modi has said India has only paused its military action', Pakistan's lobby firm Squire Patton Boggs distributed this document on behalf of Islamabad after India Operation Sindoor in May 2025. FARA filing show. pic.twitter.com/MAlwUsee2j
— Sidhant Sibal (@sidhant) January 7, 2026
दिलचस्प बात यह है कि आर्थिक बदहाली से जूझ रहा पाकिस्तान, अमेरिका को अपने पक्ष में करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने से भी नहीं हिचका। नवंबर 2025 में न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने वॉशिंगटन की लॉबिंग फर्म को लगभग 5 मिलियन डॉलर (करीब 45 करोड़ रुपये) चुकाए। यानी अपने ही देश की जनता भले संकट में हो, लेकिन भारत से बचने के लिए पाकिस्तान ने अमेरिका में पैसा पानी की तरह बहाया।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने Javelin Advisors के जरिए काम कर रही Sedden Law LLP के साथ डील की। इसके कुछ ही समय बाद व्हाइट हाउस में पाक सेना प्रमुख असीम मुनीर की मौजूदगी, ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार दिलाने की अपील, बिजनेस और व्यापारिक लालच जैसे कदम उठाए गए। यह सब इस बात का सबूत है कि ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान की रणनीतिक नींव हिला दी थी।
अमेरिकी दस्तावेज़ों से हुआ यह खुलासा एक बार फिर साबित करता है कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की निर्णायक शक्ति का प्रतीक था। पाकिस्तान सिर्फ बयानबाज़ी में मज़बूत है, असल में वह दबाव में तुरंत झुक जाता है। भारत ने न सैन्य मोर्चे पर झुकाव दिखाया, न कूटनीतिक स्तर पर। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत डटा रहा, और पाकिस्तान अमेरिका के सामने गिड़गिड़ाता रहा अब यही सच्चाई अमेरिकी दस्तावेज़ों में दर्ज है।