बांग्लादेश को गुमराह करने में जुटा पाकिस्तान..! झूठ बोलकर बेच रहा अपना कबाड़ फाइटर जेट JF-17

    08-जनवरी-2026
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Pakistan JF17
 
मई माह में हुए ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय वायुसेना की तकनीकी और रणनीतिक श्रेष्ठता को जिस तरह उजागर किया, उसने पाकिस्तान के वर्षों से बनाए जा रहे सैन्य भ्रम की नींव हिला दी। उस सैन्य टकराव में पाकिस्तान ने अपने सबसे प्रचारित लड़ाकू विमानों—F-16 और JF-17 को मैदान में उतारा, लेकिन भारतीय वायुसेना की एयर डॉमिनेंस, नेटवर्क-सेंट्रिक वारफेयर और आधुनिक प्लेटफॉर्म्स के सामने पाकिस्तानी वायुसेना पूरी तरह असहाय नजर आई।
 
 
इसके बावजूद पाकिस्तान न केवल अपनी हार को स्वीकार करने से इनकार कर रहा है, बल्कि उसी ऑपरेशन को आधार बनाकर आज दुनिया को यह समझाने की कोशिश कर रहा है कि उसका JF-17 थंडर एक ‘सफल युद्ध-परीक्षित’ लड़ाकू विमान है। हाल के दिनों में बांग्लादेश से लेकर मध्य-पूर्व तक पाकिस्तान इसी झूठे प्रचार के सहारे अपने लड़ाकू विमान बेचने की कोशिश में जुटा है।
 
 
 
 
 
पाकिस्तान का झूठा सैन्य प्रचार  
 
 
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में है और वह IMF, सऊदी अरब और चीन की आर्थिक बैसाखियों पर टिका हुआ है। ऐसे में हथियार निर्यात को वह अपनी आर्थिक संजीवनी के तौर पर पेश कर रहा है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ तक यह दावा कर चुके हैं कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान को इतने डिफेंस ऑर्डर मिल रहे हैं कि आने वाले समय में IMF से कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
 
 
इसी रणनीति के तहत पिछले महीने पाकिस्तान ने लीबिया की पूर्वी स्थित लीबियन नेशनल आर्मी के साथ 4 अरब डॉलर से अधिक का हथियार सौदा किया, जिसे देश की अब तक की सबसे बड़ी डिफेंस डील में से एक बताया जा रहा है। इस सौदे में JF-17 थंडर फाइटर जेट और ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट शामिल हैं। इसके अलावा पाकिस्तान ने बांग्लादेश के साथ भी JF-17 फाइटर जेट की संभावित बिक्री को लेकर बातचीत की है। इससे साफ है कि पाकिस्तान अब दक्षिण एशिया और मध्य-पूर्व से बाहर भी अपने हथियार निर्यात का दायरा बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
 

Bangladesh Air Chief And Pakistan Air Chief 
 
बांग्लादेश भी दिखा रहा रूचि ! 
 
 
इसी प्रचार का हिस्सा है यह दावा कि बांग्लादेश JF-17 फाइटर जेट खरीदने में रुचि दिखा रहा है, और यह भी कि भारत के साथ टकराव के दौरान इस विमान ने अपनी “काबिलियत साबित” की। दोनों देशों के बीच इस डील पर बातचीत तभी हुई जब बांग्लादेश वायु सेना के प्रमुख ने पाकिस्तान का दौरा किया था। बांग्लादेश के वायुसेना प्रमुख एयर चीफ़ मार्शल हसन महमूद ख़ान ने अपने हालिया पाकिस्तान दौरे के दौरान पाकिस्तान से जेएफ़-17 ब्लॉक-3 लड़ाकू विमान 'ख़रीदने में दिलचस्पी' दिखाई है। 
 
 
पाकिस्तानी वायुसेना के अनुसार, मंगलवार को हुई मुलाक़ात में, "पाकिस्तान के एयर चीफ़ मार्शल ज़हीर अहमद बाबर सिद्धू ने प्रशिक्षण विमानों की तेज़ डिलीवरी के साथ-साथ पूरा ट्रेनिंग सिस्टम और दीर्घकालिक तकनीकी मदद देने का आश्वासन भी दिया। साथ ही उस झूठ का चूरन भी दिया जिसे पाकिस्तान लगातार दुनिया के सामने बेच रहा है। पाकिस्तान ने भरोसा दिया कि इस विमान ने भारत से सैन्य टकराव के दौरान काबिलियत दिखाई थी। लेकिन वास्तविकता यह है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान JF-17 की सीमाएं खुलकर सामने आ गई थीं। भारतीय वायुसेना ने न केवल पाकिस्तान के हवाई अभियानों को निष्क्रिय किया, बल्कि उसके कई F-16 और JF-17 विमानों को मार गिराने में भी सफलता हासिल की।
 
 
पाकिस्तान की कड़वी आर्थिक सच्चाई  
 

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री भले ही देश के हथियार उद्योग को आर्थिक कायाकल्प का ज़रिया बताने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। तथाकथित ‘डिफेंस बूम’ के दावों के बावजूद पाकिस्तान आज भी गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। वर्तमान में पाकिस्तान 7 अरब डॉलर के IMF प्रोग्राम के तहत काम कर रहा है, जो उसका अब तक का 24वां बेलआउट पैकेज है।

 
इससे पहले 2023 में मिला 3 अरब डॉलर का अस्थायी पैकेज सिर्फ इतना ही कर पाया था कि पाकिस्तान संप्रभु डिफॉल्ट से बच सके। उल्लेखनीय है कि यह IMF सहायता भी पाकिस्तान को तब मिली, जब सऊदी अरब और खाड़ी देशों ने आपातकालीन फंडिंग और जमा राशि के रोलओवर के जरिए मदद की। यह स्थिति पाकिस्तान की आर्थिक कमजोरी को साफ तौर पर उजागर करती है।
 
 
Pakistan JF17
 
 
JF-17 थंडर: कागज़ पर मजबूत, युद्ध में कमजोर
 
 
JF-17 थंडर को चीन की चेंगदू एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन और पाकिस्तान एयरोनॉटिकल कॉम्प्लेक्स ने मिलकर विकसित किया है। इसका नवीनतम संस्करण JF-17C ब्लॉक-III एक 4.5-जेनरेशन, सिंगल-इंजन, मल्टी-रोल फाइटर बताया जाता है। इसमें AESA रडार, आधुनिक एवियोनिक्स और हवा से हवा तथा हवा से जमीन मार करने वाले हथियार लगाए गए हैं। कागज़ पर यह विमान भले ही आधुनिक दिखाई देता हो, लेकिन वास्तविक युद्ध और ऑपरेशनल अनुभव इसकी कमजोरियों को बार-बार उजागर करते रहे हैं।
 
 
इंजन की विश्वसनीयता
 
 
रडार और सेंसर की सीमित क्षमता
 
 
स्ट्रक्चरल इंटीग्रिटी को लेकर सवाल
 
 
हथियारों की सटीकता पर संदेह
 
 
2019 में भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान भी JF-17 अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाया था। इसके अलावा पिछले साल म्यांमार का एक JF-17 फाइटर जेट दुर्घटनाग्रस्त होकर आग का गोला बन गया, जिस पर विद्रोही गुटों ने मार गिराने का दावा किया।
 
 
अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाकिस्तान के दावे 
 
 
पाकिस्तान JF-17 को एक “एक्सपोर्ट सक्सेस स्टोरी” के तौर पर पेश करता रहा है।
 
 
अजरबैजान को JF-17C ब्लॉक-III की आपूर्ति 1.6 बिलियन डॉलर की डील के तहत की गई।
 
 
म्यांमार, नाइजीरिया और लीबिया को भी ये विमान बेचे गए।
 
 
सऊदी अरब के साथ कथित तौर पर कर्ज को JF-17 डील में बदलने पर बातचीत की खबरें सामने आईं।
 
 
लेकिन इन दावों के बीच एक अहम तथ्य यह है कि अधिकांश खरीदार देश या तो आर्थिक रूप से कमजोर हैं या फिर उनके पास विकल्प बेहद सीमित हैं। यही वजह है कि पाकिस्तान अपने विमान को कम कीमत और आक्रामक प्रचार के जरिए बेचने की कोशिश करता है।
 
 
ईराक ने पाकिस्तान के झूठ का किया पर्दाफाश
 
 
हाल ही में पाकिस्तान से यह रिपोर्ट्स सामने आई थीं कि ईराकी सरकार जल्द ही पाकिस्तान से 12 JF-17 थंडर ब्लॉक-III लड़ाकू विमान खरीदेगी, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 66.4 करोड़ डॉलर बताई जा रही थी। पाकिस्तान ने इस खबर को अपनी बड़ी कूटनीतिक और सैन्य सफलता के तौर पर प्रचारित किया।
 
 
लेकिन अब इस दावे की पूरी तरह पोल खुल चुकी है। ईराकी वायुसेना के आधिकारिक सूत्रों ने साफ तौर पर कहा है कि ईराक की ओर से JF-17 खरीदने की कोई योजना नहीं है। इस विषय पर कोई बातचीत या चर्चा नहीं हुई और किसी भी तरह का समझौता या डील अस्तित्व में नहीं है। 
 
 
ईराकी वायुसेना के इस बयान ने पाकिस्तान के झूठे दावों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेनकाब कर दिया है। यह मामला साफ दिखाता है कि पाकिस्तान किस तरह अफवाहों और मनगढ़ंत खबरों के सहारे अपने हथियार बेचने की कोशिश करता है।
 
 
बांग्लादेश के लिए चेतावनी
 
 
ईराक प्रकरण के बाद यह सवाल और गंभीर हो जाता है कि क्या बांग्लादेश जैसे देश को पाकिस्तान के दावों पर भरोसा करना चाहिए। ऑपरेशन सिंदूर ने साबित कर दिया कि JF-17 जैसे विमान आधुनिक युद्ध में भारत जैसे देश की वायुसेना के सामने टिक नहीं सकते। पाकिस्तान का उद्देश्य स्पष्ट है कमजोर और विकासशील देशों को झूठे दावों और सस्ती कीमतों के जाल में फंसाकर अपना सैन्य कबाड़ बेचना।
 
 
बहरहाल, ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं था, बल्कि यह पाकिस्तान की वायु शक्ति के झूठे मिथक का अंत भी था। JF-17 का प्रचार वास्तविक युद्ध अनुभव से मेल नहीं खाता। ईराक जैसे मामलों ने पाकिस्तान के झूठे दावों को बेनकाब किया है।  भारतीय वायुसेना की तकनीकी बढ़त और रणनीतिक क्षमता ने पाकिस्तान की सीमाओं को उजागर कर दिया है। आज जब पाकिस्तान JF-17 को दुनिया में बेचने की कोशिश कर रहा है, तो उसके दावे नहीं बल्कि इराक जैसे देशों के स्पष्ट इनकार उसकी असलियत बयान कर रहे हैं।
 
 
 Written By : Arnav Mishra (Ujjawal)