मुशर्रफ के बॉडी गार्ड से लेकर पहलगाम के गुनहगार तक, 20 लाख के इनामी आंतकी मूसा की पूरी कहानी

    02-अक्तूबर-2026
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,Hashim Moosa lashkar e taiba
 
पहलगाम के गुनहगार, लश्कर के 20 लाख के इनामी आतंकी मोहम्मद आसिफ उर्फ मूसा को सुरक्षाबलों ने 29 सितंबर को देर रात बडगाम में हुए एक एनकाउंटर में ढेर कर दिया.
 
मूसा कोई सामान्य आतंकी नहीं, बल्कि पाकिस्तानी फौज का एक ट्रेंड कमांडर था. जो एक समय में राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ का बॉडीगार्ड भी रह चुका था. मूसा का ये पाकिस्तान कनेक्शन पाकिस्तानी सेना और आतंक के गठजोड़ को एक बार फिर एक्सपोज करता है.
 
लेकिन कैसा था मूसा का मुशर्रफ के बॉडीगार्ड से लेकर मोस्टवांटेड आतंकी तक का सफर... डालते हैं एक नजर...
 
 
 
एनकाउंटर के बाद मूसा के पास जो पाकिस्तानी दस्तावेज मिले... उनके मुताबिक, उसका
 
  • असली नाम- मोहम्मद आसिफ
  • जन्म- 7 मार्च 1980
  • पता- न्यू चकरा, रावलपिंडी
अगर बात करें, आसिफ के पाकिस्तानी सेना में करियर की, तो
 
पाकिस्तानी सेना में करियर
  • 2000 में सेना में भर्ती हुआ
  • सर्विस नंबर- PA-3106947
  • रिटायरमेंट के समय पद- हवलदार
और उसके मुशर्रफ की सुरक्षा टीम का हिस्सा होने की जो हम बात कर रहे थे, ये समय था 2006 से 2008 के बीच.
 
मार्च 2023 में आसिफ यानी मूसा पाकिस्तानी सेना से रिटायर हुआ, जिसके बाद वो आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा. सितंबर 2023 में उसने जम्मू-कश्मीर में loC पार कर घुसपैठ के जरिये भारत में एंट्री ली. यहां लश्कर ने उसे चीफ ऑपरेशनल कमांडर बनाया. j&K में आसिफ लश्कर के लिए बड़ा काम का साबित हुआ. पाकिस्तानी फौज की ट्रेनिंग यहां काम आई और उसने बड़ा ogw नेटवर्क खड़ा कर दिया. कई बड़े आतंकी हमलों की रणनीति भी बनाई. इन्हीं में से एक था पहलगाम नरसंहार, जिसमें 22 अप्रैल 2025 को धर्म पूछकर 25 हिंदू पर्यटकों समेत कुल 26 लोगों को गोलियों से भून दिया गया था... और इसके अलावा हैं...
 
  • पुंछ में डेरा की गली हमला
  • 21 दिसंबर 2023
  • सेना की गाड़ी पर घात लगाकर हमला, 5 जवान वीरगति को प्राप्त
  • पुंछ IAF काफिले पर हमला
  • 4 मई 2024
  • भारतीय वायुसेना के काफिले पर अंधाधुंध फायरिंग, एक जवान वीरगति को प्राप्त
  • रियासी तीर्थयात्री बस हमला
  • 9 जून 2024
  • तीर्थयात्रियों की बस पर फायरिंग, बस खाई में गिरी, 9 निर्दोष लोग मरे
  • गगनगीर और गुलमार्ग हमले
  • अक्टूबर 2024
  • टनल निर्माण में लगे श्रमिकों और सेना के वाहनों पर हमले
 
पहलगाम आतंकी हमले के बाद से ही सेना परछाई की तरह उसका पीछा कर रही थी. लेकिन आसिफ पीर पंजाल के घने जंगलों में छिप कर बार-बार चकमा दे रहा था. 5 सितंबर 2026 को वो मरते-मरते बचा था, जब सुरक्षाबलों ने एक एनकाउंटर के दौरान उसे घेर लिया था, लेकिन वो बच निकलने में कामयाब रहा. उस दौरान उसका एक साथी यासिर मारा गया था.
 
तभी से आसिफ के दिन उल्टे घूमना शुरु हो चुके थे. बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाती, आखिरकार, एक खुफिया इनपुट के आधार पर सुरक्षाबलों ने बडगाम के जंगलों में उसे फिर घेर लिया, कार्रवाई को नाम दिया गया 'ऑपरेशन कोराग'. मूसा ने जब खुद को घिरता देखा, तो अपनी अमेरिकी M4 कार्बाइन से सुरक्षाबलों पर गोलियां बरसाना शुरु कर दिया, लेकिन इस बार भागने का कोई रास्ता नहीं था. भीषण मुठभेड़ में जवानों ने पहलगाम के गुनहगार की छाती को गोलियों से छलनी कर दिया.
 
बडगाम के जंगलों में मूसा की लाश गिरते ही जम्मू-कश्मीर में आतंक के एक चैप्टर का अंत हो गया. और इसी के स्क्रीन पर दिख रही इस फोटो में मौजूद लश्कर के चारों आतंकियों का जन्नत का वन-वे टिकट सेना कंफर्म कर चुकी है.
 
कहते हैं ना, आप भाग सकते हैं, लेकिन बच नहीं सकते. हमेशा की तरह, एक बार फिर, जस्टिस डिलिवर्ड...जम्मू कश्मीर नाऊ