हिंदू पायलट ने बचाई यहूदियों की जान, 'नाराज फूफाओं' के मुंह पर क्यों लगा ताला ?

    02-अक्तूबर-2026
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Indian Captain Smit Machhar
  
हर युद्ध सीमाओं पर नहीं लड़ा जाता, बल्कि इनमें से कुछ लड़े जाते हैं, 35 हजार फीट की ऊंचाई पर, कॉकपिट में.
 
ऐसा ही कुछ हुआ, सऊदी अरब और जॉर्डन की हवाई सीमा पर. जब करीब 174 यहूदी लगभग मौत के मुंह में थे, तभी हवा में होता है एक चमत्कार, ओमान के मुस्लिम पायलट और उसके जिहादी मकसद के बीच में आ जाता है, एक सनातनी.
 
हजारों फीट ऊपर इस कुरुक्षेत्र में अपना धर्म निभाते हुए, चाकू लगने, गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद भारतीय पायलट स्मित मच्छार इजरायली यात्रियों को सकुशल इस खतरे से बाहर लाने में अहम भूमिका निभाते हैं.
एक जिहादी 9/11 को दोहराने ही वाला था, लेकिन समय रहते उसे रोक लिया गया.
 
दो धर्म, दो सोच, दो लोग और 35 हजार फीट की ऊंचाई पर दांव पर 174 लोगों की जान. एक के धर्म ने प्लेन क्रैश करने के लिए प्रेरित किया. जबकि दूसरे के धर्म ने अपनी जान दांव पर लगाकर लोगों को बचाने के लिए.
 
 
 
पूरा इजरायल बम-बम है. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उन्हें सच्चा हीरो मानते हुए उनकी बहादुरी को सलाम किया.
 
भारत को भी अपने बहादुर बेटे पर गर्व है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तो उनका एक और रिश्ता है. दोनों ही गुजरात से हैं. उन्होंने स्मित से फोन पर बात की और बहादुरी की जमकर तारीफ की.
 
 
 
इतना ही नहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी स्मित की तारीफ की. उन्होंने कहा- 'गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उसने गजब की सूझबूझ दिखाई. वह एक हीरो है, जिसने हमलावर का मुकाबला किया. ट्रंप ने हमलावर को आतंकवादी तक कहा. 
 
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की जमकर सराहना की है. अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर जी ने कहा- कैप्टन स्मित मच्छार असली हीरो हैं, संकट की इस घड़ी में उन्होंने जो पराक्रम दिखाया, वह अद्वितीय है.
 
लेकिन अफ़सोस, जहां पूरी दुनिया स्मित इस बहादुरी को सलाम कर रही है, वहीं लेफ्ट-लिबरल मीडिया इस खौफनाक आतंकी साज़िश पर पर्दा डालने में जुटा है. न्यूज़ हेडलाइंस में बेशर्मी से शब्दों की ऐसी बाज़ीगरी की जा रही है, मानो यह दो पायलटों के बीच का कोई विवाद हो.
 
 
 
  • BBC इसे दो पायलेटों के बीच का झगड़ा बताता है.
  • दि न्यूयॉर्क टाइम्स इसे लिखता है, पायलट और को-पायलट के बीच कहासुनी.
  • दि वॉल स्ट्रीट जनरल इसे कॉकपिट में दो पायलटों के बीच हाथापाई लिखता है.
  • CCN इसे दो पायलटों के बीच हिंसक विवाद बताता है.
 
इतना ही नहीं, हैरानी की बात है कि जो लोग गाज़ा और ईरान के नाम पर दिन-रात छाती पीटते हैं, आंसू बहाते हैं, ऐसे तथाकथित सेक्युलर और लिबरल यहूदियों के नरसंहार की इस कोशिश पर या तो चुप हैं या इसे इजरायली प्रोपेगेंडा बता रहे हैं.
 
लेकिन सवाल है कि क्यों...
 
  • क्योंकि बचाने वाला हिंदू है, धर्मपरायण हिंदू, जो खतरे के समय 35 हजार फीट की ऊंचाई पर कॉकपिट में हनुमान चालीसा पढ़ता रहा.
  • क्योंकि वो उसी राज्य से आता है, जिससे RSS के स्वयंसेवक, बीजेपी के नेता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आते हैं.
  • क्योंकि उसने यहूदियों को बचाया है.
भारत और सनातन विरोधी इस गैंग, इन नाराज फूफाओं के गले यह नहीं उतर रहा कि बचाने वाला एक 'सनातनी' है, उसने यहूदियों को बचा लिया. हमलावर एक खास सोच और समुदाय से आता है. वे एक बार फिर एक्सपोज हो गए हैं. आतंक को धर्म से नहीं जोड़ने की उनकी नौटंकी फिर खोखली साबित हुई.
 
लेकिन शब्दों को कितना भी घुमा लिया जाए, यह सच नहीं बदलेगा कि जब 35 हज़ार फीट की ऊंचाई पर एक विचार मौत बांट रहा था, तब सनातन के संस्कारों ने अपनी जान दांव पर लगाकर ज़िंदगी के लिए लड़ जाना चुना. सनातन ने दुनिया को अपना वृहद परिवार ही माना है, जिसे कहते हैं वसुधैव कुटुंबकम. और केवल उपदेश ही नहीं दिया, 35 हजार फीट की ऊंचाई पर उसके बेटे ने इसे साबित भी किया है. जम्मू कश्मीर नाऊ..