मुनीर Vs इमरान, 4 अक्तूबर को पाकिस्तान में होगा तख्तापलट ?
03-अक्तूबर-2026
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मुनीर को अगर पाकिस्तान छोड़कर भागना पड़े, तो वो कहां जाएगा ?
फिलहाल पाकिस्तान के जो हालात हैं, उसमें ये सवाल हम ही नहीं, खुद मुनीर भी अपने आप से पूछ रहा होगा.
राजधानी इस्लामाबाद को खुली जेल में बदल दिया गया है. सड़कों पर कील लगे कंटेनर्स की दीवार है. जगह-जगह फोर्स तैनात कर दी गई है. विरोधी नेताओं को खुलेआम गन पॉइंट पर उठाया जा रहा है.
लेकिन क्यों..? इसकी वजह है 4 अक्टूबर.
चार अक्टूबर को इस्लामाबाद की सड़कों पर सैलाब होगा. एक तरफ है, PTI यानी इमरान खान की पार्टी, तो दूसरी तरफ JAAC यानी POJK में प्रदर्शन को लीड करने वाला दल. एक को इमरान खान की आजादी चाहिए तो दूसरे को अपने क्षेत्र की. जहां पाकिस्तान ने पिछले 8 दशकों से अवैध कब्जा किया हुआ है.
दो पार्टियां, एक मांग और निशाना मुनीर, कानूनी तानाशाह बनने के लिए पूरे देश को दांव पर लगा देने वाला एक सनकी जनरल.
4 अक्टूबर को होगी निर्णायक जंग. फैसला इस्लामाबाद की सड़कों पर होगा. कौन जीतेगा, सेना की गोली या पठान-कश्मीरियों के सीने?
आइए अब समझते हैं, इस कहानी की टाइमलाइन. मुनीर वर्सेज इमरान और PoJK की. सबसे पहले बात मुनीर वर्सेज इमरान खान की.
10 अप्रैल 2022 को अविश्वास प्रस्ताव के जरिए इमरान खान को पद से हटाया. इसके बाद शहबाज प्रधानमंत्री बना.
अक्टूबर 2022 में चुनाव आयोग ने इमरान को 5 साल के लिए चुनाव लड़ने से रोका.
9 मई 2023 को अल-कादिर ट्रस्ट भ्रष्टाचार मामले में इमरान को इस्लामाबाद हाईकोर्ट परिसर से पहली बार अरेस्ट किया.
लेकिन 11 मई 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने इस गिरफ्तारी को गैरकानूनी घोषित कर दिया और इमरान को जेल से छोड़ना पड़ा.
लेकिन ये आजादी ज्यादा दिनों तक नहीं चल सकी. 5 अगस्त 2023 को तोशाखाना भ्रष्टाचार मामले में कोर्ट ने इमरान को 3 साल की सजा सुनाई. जिसके बाद उनको लाहौर से अरेस्ट कर अडियाला जेल भेज दिया गया. तभी से इमरान अडियाला जेल में ही बंद हैं.
जनवरी 2025 में भ्रष्टाचार के एक और मामले में कोर्ट ने इमरान को 14 साल की सजा सुनाई. पत्नी बुशरा बीबी को भी 7 साल की जेल हुई. इमरान को अलग-अलग मामलों में कुल 60 से ज्यादा साल की सजा सुनाई जा चुकी है.
जेल में इमरान की तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही थी. अगस्त 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने उनको शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाने का ऑर्डर दिया. लेकिन 21 अगस्त 2026 को सेना उनको शिफा अस्पताल न ले जाकर PIMS ले गई, जहां चेकअप के बाद उनको फिर जेल भेज दिया गया.
इससे नाराज PTI कार्यकर्ताओं ने 27 सितंबर को इस्लामाबाद लॉन्ग मार्च का ऐलान किया. जिसके बाद पाकिस्तानी सेना हरकत में आई और इस्लामाबाद की किलेबंदी कर दी गई. PTI के नेता और कार्यकर्ताओं को उठा लिया गया.
20-21 सितंबर के आसपास इमरान की तीनों बहनों को भी गिरफ्तार कर लिया गया.
इस्लामाबाद में भारी किलेबंदी के कारण PTI ने मार्च को री-शेड्यूल कर 27 सितंबर से 4 अक्टूबर 2026 कर दिया.
लेकिन अब मुनीर के लिए ये खतरा, और भी बड़ा हो चुका है. इस बार PTI के साथ है पूरा विपक्षी गठबंधन, यानी TTAP तहरीक-ए-तहफुज-ए-आइन-ए-पाकिस्तान. ये लड़ाई अब मुनीर वर्सेज इमरान की न होकर सेना वर्सेज सियासत की हो गई है.
पाकिस्तानी नेता और आवाम, सेना के खिलाफ लामबंद हो चुके हैं.
इसी के साथ, POJK में जो चल रहा है, वो मुनीर के लिए हालातों को और ज्यादा चिंताजनक बनाता है. वहां पिछले 100 से ज्यादा दिनों से चल रहा प्रदर्शन अब अपने चरम पर पहुंच चुका है. POJK में सड़क पर बैठे लोग, 8 दशक पुराने पाकिस्तान के अवैध कब्जे को खत्म कर देना चाहते हैं. वो LoC को ही समाप्त कर देने पर अड़े हैं. JAAC नेता सरदार अमान खान ने पिछले दिनों एक सभा में कहा था कि वो loC को नहीं मानते हैं, और उसे हटाने के लिए जल्द ही वहां धरना दिया जाएगा.
जब PTI 4 अक्तूबर को इस्लामाबाद कूच करेगी. तब JAAC ने ब्लैक डे मनाने का ऐलान किया है. कमेटी ने जनता से अपील की है, कि-
2 महीनों का राशन स्टॉक कर लें
पाकिस्तान से आने वाले सभी रास्तों को सील कर दिया जाएगा
सभी टैक्सों का भुगतान रोक दिया जाएगा
सेना को खदेड़ने के लिए चक्का जाम होगा
अतिरिक्त फोर्स की तैनाती को हमला समझा जाएगा
अब एक तरफ मुजफ्फराबाद है तो दूसरी तरफ खैबर पख्तूनख्वा. दोनों का टारगेट एक है, इस्लामाबाद. बड़ा सवाल, क्या मुनीर के कंटनेर इस सैलाब को रोक पाएंगे?
हिंदुस्तान को हजारों घाव देने का सपना देखने वाले खुद अपने ही घर में बुरी तरह घिर चुके हैं. खोखला पाकिस्तान अंदर से टुकड़े-टुकड़े हो चुका है, अगर कुछ बाकी है तो उन टुकड़ों का बिखरना. इसी क्रम में 4 अक्टूबर का दिन पाकिस्तान में फौजी तानाशाही के पतन की नई इबारत लिखेगा.
लेकिन सबसे बड़ा सवाल... अगर बाजी पलट गई, तो मुनीर भागकर कहां जाएगा? इतिहास गवाह है, जब भी पाकिस्तान के जनरलों की कुर्सी डगमगाई है, उनके लिए सऊदी अरब के महल, लंदन के पॉश एस्टेट या बीजिंग के सेफ हाउस हमेशा खुले रहे हैं. लेकिन मुनीर के लिए ये रास्ता आसान नहीं होगा, क्योंकि इस बार जंग सिर्फ सत्ता की नहीं, बल्कि वजूद की है. जम्मू कश्मीर नाऊ दिल्ली