'बैग में फिलिस्तीन फ्लैग, जिहादी सोच के चलते पहले भी एक्शन', जानिए कौन है कैप्टन स्मित पर हमला करने वाला को-पायलट

UAE ने आतंकी हमला बताकर लेफ्ट लिबरल मीडिया के मुंह पर मारा करारा तमाचा

    03-अक्तूबर-2026
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Omani co-pilot Hamam al-Hammami Flydubai Terrorist attack
 
नई दिल्ली: 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही ‘फ्लाईदुबई’ की फ्लाइट FZ1073 में जो कुछ हुआ, वह एक आतंकी वारदात थी। ना सिर्फ UAE की शुरुआती जांच में इस बात की पुष्टि की गई है बल्कि हमलावर को-पायलट की आतंकी सोच वाली पूरी कुंडली भी सामने आ गई है।
 
UAE ने साफ़ तौर पर यह माना है कि आरोपी को-पायलट जिहादी मानसिकता से प्रेरित था और वो विमान को क्रैश कराना चाहता था। 
 
UAE के मुताबिक, को-पायलट ने कॉकपिट में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर Crash Axe से हमला किया और विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश की। जांच के मुताबिक, उसका मकसद विमान को इजराइल में क्रैश कराना था।
 
 
 
यानी 174 यात्रियों को लेकर उड़ रहा विमान कुछ ही पलों में एक ऐसे आतंकी हमले की चपेट में आ गया, जिसमें सैकड़ों लोगों की जान खतरे में पड़ गई थी। तो चलिए आपको बताते हैं आरोपी कौन था? जांच में क्या सामने आया और आतंकी मानसिकता के कारण पहले किस तरह से उसके खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी थी?
 
 
 
जांच में सामने आई अहम बातें:
 
हमलावर का नाम 29 वर्षीय हमाम अल-हमामी है जो कि ओमान का रहने वाला है।
  
  • हमाम अल-हमामी का जन्म संयुक्त अरब अमीरात में हुआ था।
  • उसके पिता ओमानी और माता सीरियाई मूल की हैं।
  • उसके पास ओमान की नागरिकता है।
  • इसमें एक लंबा हिस्सा सीरिया में भी बीता था। 
  • सीरिया में रहते हुए वह इस्लामिक कट्टरपंथी विचारों से जुड़ा था।
  • वह अलकायदा और कट्टरपंथी आतंकी विचारधारा से जुड़ा रहा है।
  • अल-हमामी ने ओमान एयर और रॉयल एयर मोरक्को में काम किया था।
  • 2024 में ओमान एयर में पायलट ट्रेनिंग के दौरान उसके पास कट्टरपंथी सामग्री मिली।
  • 'फ्री फिलिस्तीन’ के पोस्टर और दूसरी फिलिस्तीनी समर्थन वाली वस्तुएं मिली थी।
  • इसके बाद उसे पायलट ट्रेनिंग से हटाया गया।
  • बाद वह फ्लाईदुबई से जुड़ा। 
  • करीब 8 महीने से FlyDubai एयरलाइन के साथ काम कर रहा था
  • पूछताछ में उसने बताया कि वो विमान को क्रैश कराना चाहता था।
 
यानी, इस घटना से पहले ही उसकी आतंकी विचारधारा वाली सोच सामने थी। लिहाजा अब जांच का बड़ा सवाल यही है कि इन तमाम संकेतों के बावजूद वह फ्लाईदुबई के कॉकपिट तक कैसे पहुंचा। और उसे को-पायलट की जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई?
 
इस बीच इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी वीडियो जारी कर कड़ी चेतावनी दे दी है। उन्होंने इस घटना को आतंकी वारदात बताते हुए कहा कि को-पायलट को जिसने भी इस घटना को अंजाम देने के लिए निर्देशित किया था उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
 
 
 
UAE की जांच रिपोर्ट ने जहां एक तरफ आरोपी की कट्टरपंथी आतंकी विचारधारा और जिहादी सोच को बेनकाब किया, वहीं दूसरी तरफ लेफ्ट-लिबरल मीडिया के रिपोर्ट्स पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। BBC, SKY News, AFP News जैसे तमाम लेफ्टिस्ट मीडिया की न्यूज़ हेडलाइंस में बेशर्मी से शब्दों की ऐसी बाज़ीगरी की जा रही है, मानो यह दो पायलटों के बीच का कोई विवाद हो।
  
 
 
और यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि भारत से जुड़े मामलों में अंतरराष्ट्रीय मीडिया की कवरेज को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। चाहे वो 26/11 हमले के दौरान कसाब को लेकर की गई कवरेज हो, चाहे हिन्दू आतंकवाद की नैरेटिव गढ़ने की कोशिश हो या फिर G20 और BRICS जैसे बड़े वैश्विक आयोजनों के दौरान भारत की तस्वीर धूमिल करने की कोशिश।
 
भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका की तस्वीर के साथ कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने ऐसी हेडलाइंस और तस्वीरों को ज्यादा जगह दी, जिनमें भारत की उपलब्धियों से ज्यादा गरीबी, झुग्गियां, राजनीतिक विवाद और मोदी सरकार की आलोचना केंद्र में रही।
 
The Guardian - “What Modi won’t show the G20”
इस लेख का पूरा फोकस G20 की मेजबानी की उपलब्धियों के बजाय भारत में मुसलमानों के साथ कथित भेदभाव, पुलिस कार्रवाई और स्कूलों में कथित दुर्व्यवहार पर था।
The Guardian - “Ashamed of our presence
G20 से ठीक पहले दिल्ली की झुग्गियों के आसपास लगाए गए पर्दों और गरीब आबादी को छिपाने के मुद्दे को प्रमुखता दी गई।
BBC - “Delhi G20: How India is asserting its global presence”
BBC ने G20 की ब्रांडिंग, मोदी की तस्वीरों वाले पोस्टर और कमल के लोगो की तुलना BJP के चुनाव चिह्न से की। इसी रिपोर्ट में झुग्गियों को पर्दों से ढकने, बेघर लोगों और दिल्ली में प्रतिबंधों को भी प्रमुखता दी गई।
  
लेकिन इस बार तस्वीर साफ है। UAE ने आधिकारिक बयान जारी कर घटना की गंभीरता सामने रख दी है। अब सवाल उन हेडलाइंस पर भी उठेंगे, जिन्होंने शुरुआत में इस पूरे मामले की असली गंभीरता को सामने नहीं रखा। नैरेटिव चाहे जितना बनाया जाए, तथ्य आखिरकार सामने आ ही जाते हैं....