पाकिस्तान के लिए नई मुश्किल और चीन के लिए नया रास्ता....
अफगानिस्तान ने वाखान कॉरिडोर में 121 किलोमीटर लंबी सड़क खोल दी है, जो चीन की सीमा तक जाती है। यानी अफगानिस्तान अब पाकिस्तान को बायपास कर चीन तक पहुंच बनाने की कोशिश में है।
लेकिन इस छोटे से रास्ते का असर सिर्फ अफगानिस्तान-पाकिस्तान तक सीमित नहीं है इसका कनेक्शन POTL, CPEC और भारत की मध्य एशिया तक पहुंच से भी है।
अब सवाल है कि आखिर कैसे ? और यह वाखान कॉरिडोर है क्या और इसकी इतनी चर्चा क्यों? तो चलिए बताते हैं....
दरअसल, वाखान अफगानिस्तान के उत्तर-पूर्व में बदख्शां प्रांत में करीब 350 किलोमीटर एक संकरी पट्टी है। इसके एक तरफ उत्तर में ताजिकिस्तान है, दूसरी तरफ दक्षिण में POTL यानी पाकिस्तान अधिक्रांत लद्दाख क्षेत्र का गिलगित-बाल्तिस्तान का हिस्सा और पूर्वी छोर पर चीन का शिनजियांग और पश्चिम में अफगानिस्तान का बाकी हिस्सा
यही कारण है कि अफगान सरकार भी इसे सिर्फ सड़क नहीं मान रही। उद्घाटन के दौरान अफगानिस्तान के ग्रामीण पुनर्वास और विकास मंत्री अब्दुल लतीफ मंसूर ने इसे देश के लिए रणनीतिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण परियोजना बताया। यानी काबुल की नजर में यह रास्ता आगे चलकर व्यापार और क्षेत्रीय संपर्क का नया जरिया बन सकता है। तो वहीं पाकिस्तान के लिए नई चुनौती।
क्यों नये मार्ग तलाश रहा अफ़ग़ानिस्तान ?
अफगानिस्तान के पास समुद्र तक सीधी पहुंच नहीं है। ऐसे में पाकिस्तान के कराची और ग्वादर जैसे बंदरगाह और उसके सड़क मार्ग लंबे समय से अफगान व्यापार के लिए महत्वपूर्ण रहे हैं।
लेकिन काबुल और इस्लामाबाद के रिश्ते पिछले कुछ समय से लगातार तनावपूर्ण रहे हैं। सीमा, सुरक्षा और व्यापार को लेकर दोनों के बीच खींचतान होती रही है।
ऐसे माहौल में अफगानिस्तान का चीन तक अपना दूसरा रास्ता तैयार करना पाकिस्तान के लिए महज सड़क का मामला नहीं है। क्योंकि पाकिस्तान की सबसे बड़ी ताकत ही उसकी भौगोलिक स्थिति रही है।
और अब अफगानिस्तान उसी भौगोलिक निर्भरता को कम करने का विकल्प तलाश रहा है।
क्यों महत्वपूर्ण है वाखान कॉरिडोर?
4 अक्टूबर 2026 को खोली गई यह सड़क करीब 121 किलोमीटर लंबी है और चीन की सीमा तक पहुंचती है।
इसे बनाने में करीब 365 मिलियन अफगानी, यानी लगभग 5.5 मिलियन डॉलर खर्च हुए हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक परियोजना में चार बड़े पुल, 66 कलवर्ट और करीब 3,100 मीटर रिटेनिंग वॉल भी बनाई गई हैं।
अब भारत का एंगल समझिए
वाखान कॉरिडोर के दक्षिण में POTL का गिलगित-बाल्तिस्तान क्षेत्र आता है। दूसरी तरफ इसी क्षेत्र से चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा यानी CPEC गुजरता है, जिस पर भारत लगातार अपनी आपत्ति दर्ज कराता रहा है।
अगर भविष्य में POTL का यह क्षेत्र भारत के नियंत्रण में आता है, तो वाखान के जरिए अफगानिस्तान और आगे मध्य एशिया तक संभावित जमीनी संपर्क भारत के लिए रणनीतिक महत्व हासिल कर सकता है।
यानी जिस भौगोलिक स्थिति का फायदा पाकिस्तान दशकों से उठाता आया है, वही भूगोल भविष्य में उसके लिए चुनौती भी बन सकता है।
दूसरी तरफ भारत और अफगानिस्तान के रिश्तों में भी हाल के समय में नजदीकियां बढीं हैं। अक्टूबर 2025 में अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी की नई दिल्ली यात्रा के दौरान दोनों देशों ने व्यापार, खनन और क्षेत्रीय संपर्क समेत कई मुद्दों पर बातचीत की थी। दोनों देशों ने भारत-अफगान एयर फ्रेट कॉरिडोर को भी आगे बढ़ाने पर सहमति जताई थी।
तो क्या वाखान CPEC की काट है?
अभी इसे सीधे CPEC का विकल्प कहना जल्दबाजी होगी। वाखान का रास्ता बेहद कठिन है और बड़े पैमाने के व्यापार के लिए अभी बहुत कुछ तैयार होना बाकी है। लेकिन असली बात यह है कि पाकिस्तान के पास जो भौगोलिक बढ़त थी, उसके सामने एक नया रास्ता दिखाई देने लगा है।
अफगानिस्तान चीन तक पहुंचने के लिए पाकिस्तान के रास्ते के अलावा विकल्प तलाश रहा है। चीन को अफगानिस्तान के साथ सीधे जुड़ने का एक नया रास्ता मिल रहा है और भारत के लिए यह पूरा घटनाक्रम POTL, CPEC और मध्य एशिया तक भविष्य की कनेक्टिविटी के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
इसलिए वाखान की यह सड़क अभी भले ही सिर्फ 121 किलोमीटर की हो, लेकिन नक्शे पर इसका असर इससे कहीं ज्यादा बड़ा हो सकता है।