कैप्टन मच्छार ने कहा, को-पायलट मेरे पीछे बैठकर नमाज पढने लगा और मैं विमान उड़ा रहा था। लेकिन इसके करीब 4-5 मिनट बाद अचानक उनके सिर के पीछे जोरदार वार होता है।
पहले उन्हें लगा कि विमान में कोई गंभीर तकनीकी गड़बड़ी हुई है। लेकिन जब एक के बाद एक वार होने लगे तो उन्हें समझ आया कि हमला विमान पर नहीं, बल्कि उन पर ही हो रहा है।
हमले में स्मित गंभीर रूप से घायल हो चुके थे। बावजूद वे हमलावर को रोकने की कोशिश करते हैं लेकिन उनकी नजर धुंधली पड़ गई थी और उन्हें ठीक से दिखाई नहीं दे रहा था। इसी दौरान विमान तेजी से नीचे जाने लगा।
अब लड़ाई सिर्फ कॉकपिट की नहीं, 174 जिंदगियों की थी...
स्मित ने बताया कि वो घायल अवस्था में खून से लथपथ कॉकपिट में फर्श पर गिर चुके थे। उन्हें विमान के नीचे जाने की आवाजें सुनाई दे रही थीं और बाहर से यात्रियों के चिल्लाने की आवाज आ रही थी। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।
उन्हें पता था कि अगर कॉकपिट का दरवाजा नहीं खुला तो विमान पर दोबारा नियंत्रण पाना बेहद मुश्किल होगा। उन्होंने दरवाजे तक पहुंचने की कोशिश की। हालाँकि उन्हें पहली कोशिश में सफलता नहीं मिली, लेकिन दूसरी कोशिश में उन्होंने दरवाजे का नॉब घुमाया और उसे खोलने में कामयाब हो गए।
दरवाजा खुलते ही क्रू मेंबर्स और कुछ यात्रियों ने अंदर पहुंचकर हमलावर को काबू किया और विमान पर दोबारा नियंत्रण हासिल किया। विमान की सऊदी अरब के तबुक में आपात लैंडिंग कराई गई। और सभी यात्री सुरक्षित बच गए।
कैप्टन मच्छार को सम्मान देने जा रहा इजराइल
इजराइली PM नेतन्याहू ने कैप्टन मच्छार से बातचीत के दौरान उनके साहस की जमकर सराहना की और उन्हें इजराइल ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया का हीरो बताया। अब इस साहसिक कदम के बाद इजराइल कैप्टन मच्छार को सबसे बड़ा सम्मान देने जा रहा है।
दरअसल, बातचीत के दौरान ही PM नेतन्याहू ने कहा कि वो इस बार के स्वतंत्रता दिवस पर जश्न की मशाल जलाने के लिए कैप्टन मच्छार और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को न्योता देना चाहता हैं। यानि इतिहास में यह पहली बार होगा जब किसी अन्य देश के नागरिक और राष्ट्राध्यक्ष द्वारा मशाल जलाया जाएगा। ये सम्मान कैप्टन मच्छार समेत समस्त भारतवासियों के लिए गर्व की बात है।