अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर किया भीषण प्रहार ; 19 पाकिस्तानी चौकियों पर कब्ज़ा, 55 से अधिक पाकिस्तानी फ़ौज को मारने का दावा

    27-फ़रवरी-2026
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Afghanistan attack Pakistan
 
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पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर इस समय अपने करियर के सबसे बड़े संकट से जूझ रहे हैं। एक तरफ भारत के साथ पुराना और अनसुलझा तनाव, दूसरी ओर बलूचिस्तान में 'Balochistan Liberation Army (BLA)' के लगातार घातक हमले, और अब तीसरी तरफ अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के साथ खुली जंग इन तीनों मोर्चों ने इस्लामाबाद की नींद उड़ा दी है।
 
 
27 फरवरी 2026 तक हालात इतने खतरनाक हो चुके हैं कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर छिड़ा संघर्ष अब ‘ओपन वॉर’ में बदल गया है। गुरूवार देर रात अफगानिस्तान ने डूरंड लाइन पर पाकिस्तान के खिलाफ पलटवार करते हुए जोरदार हमला बोला है। डूरंड लाइन यानि वो सीमा रेखा जिसे अफगानिस्तान कभी आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं करता और जिसे लेकर दशकों से तनाव बना हुआ है।
 
 
 
 
 
कैसे शुरू हुई यह जंग?
 
 
दोनों देशों के बीच टकराव की चिंगारी 22 फरवरी को भड़की, जब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के भीतर कथित तौर पर आतंकियों के ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की। इसके जवाब में गुरुवार देर रात अफगान तालिबान ने पलटवार किया। अफगानिस्तान के प्रमुख मीडिया नेटवर्क TOLO News के अनुसार, तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने दावा किया कि इस हमले में 55 से अधिक पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। अफगान सरकार का कहना है कि 23 पाकिस्तानी सैनिकों के शव उसके कब्जे में हैं और पाकिस्तान के एक सैन्य मुख्यालय सहित 19 चौकियों पर कब्जा कर लिया गया है। सिर्फ इतना ही नहीं सोशल मीडिया पर कई ऐसी वीडियो भी वायरल हो रही हैं जिसमें पाकिस्तानी सैनिकों को तालिबान ने बंधक बनाया है और पाकिस्तानी फ़ौज तालिबान के आगे गिड़गिड़ाती नजर आ रही है।
 
 
पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई: ‘गजब लिल हक’
 
 
अब दूसरी तरफ अफगानिस्तान के इस भयानक हमले से बौखलाए इस्लामाबाद ने भी तुरंत जवाबी कार्रवाई की घोषणा की। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, सरकार ने “ऑपरेशन गजब लिल हक” शुरू किया है। ऐसी ख़बरें सामने आ रही हैं जिसमें पाकिस्तानी वायुसेना ने काबुल, नंगरहार समेत कई इलाकों में हवाई हमले किए हैं।
 
 
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने तीखा बयान देते हुए कहा “हमारे सब्र की सीमा पार हो चुकी है, अब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच खुला युद्ध छिड़ गया है।” यह बयान केवल प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि औपचारिक युद्ध की घोषणा जैसा माना जा रहा है।
 
 
 
 
 
सीमा पर आग: नंगरहार से पक्तिका तक
 
 
नंगरहार, नूरिस्तान, कुनार, खोस्त, पक्तिया और पक्तिका जैसे संवेदनशील बॉर्डर इलाकों में भीषण संघर्ष जारी है। गोश्ता जिला (नंगरहार) और कुनार प्रांत की चौकियां डूरंड लाइन के बेहद करीब स्थित हैं, जहां दोनों ओर से भारी हथियारों से फायरिंग हो रही है।
 
 
ताजा रिपोर्ट के मुताबिक मोहमंद (तोरखेल और गुरसल), चित्राल (अरंडू) और कुर्रम जिले के कुछ हिस्सों में भी लगातार गोलाबारी हो रही है। सूत्रों का दावा है कि कुर्रम के कुछ स्थानीय लोग भी पाकिस्तान की ओर से जवाबी कार्रवाई में शामिल हुए हैं।
 
 
अंदरूनी मोर्चे पर भी घिरा पाकिस्तान
 
 
यह संघर्ष ऐसे समय में भड़का है जब पाकिस्तान पहले से ही अंदरूनी अस्थिरता से जूझ रहा है। बलूचिस्तान में Balochistan Liberation Army के हमलों ने सेना की मुश्किलें बढ़ा रखी हैं। आए दिन होने वाले घातक हमले पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
 
 
दूसरी ओर, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के खिलाफ की गई कार्रवाई भी उल्टा असर डालती दिख रही है। पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी अफगानिस्तान में हालिया हमलों में कम से कम 28 TTP लड़ाकों के मारे जाने की खबर है, जिसने तालिबान को सीधे टकराव के लिए उकसाया।
 
 
 
 
 
रणनीतिक संकट में फंसा इस्लामाबाद
 
 
आज पाकिस्तान एक साथ चौतरफा घिरा दिखाई दे रहा है:
 
 
1. भारत के साथ स्थायी तनाव - सीमा पर लगातार अविश्वास और कूटनीतिक दबाव।
 
 
2. बलूचिस्तान में विद्रोह - BLA के हमले और अलगाववाद की लपटें।
 
 
3. अफगानिस्तान के साथ खुला युद्ध - तालिबान से सीधी सैन्य भिड़ंत।
 
 
4. पंजाब प्रांत में भी PTI समर्थक मुनीर सेना और शहबाज शरीफ के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं।
 
 
यह स्थिति पाकिस्तानी सेना के लिए गंभीर रणनीतिक चुनौती है। संसाधन सीमित हैं, अर्थव्यवस्था पहले से दबाव में है, और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भरोसे का संकट बना हुआ है।
 
 
क्या यह युद्ध लंबा चलेगा?
 
 
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह टकराव लंबा खिंचता है, तो न केवल पाकिस्तान बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर गहरा असर पड़ेगा। डूरंड लाइन का विवाद, TTP की मौजूदगी और सीमा पार आतंकी नेटवर्क ये सभी कारक इस संघर्ष को और जटिल बना रहे हैं।
 
 
फिलहाल एक बात साफ है जनरल आसिम मुनीर के सामने यह केवल सीमा पर चल रही जंग नहीं, बल्कि पाकिस्तान की सैन्य और राजनीतिक साख की लड़ाई भी है। दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में यह नया अध्याय कितना खतरनाक मोड़ लेगा, यह आने वाले दिनों में तय होगा। लेकिन इतना निश्चित है कि इस बार आग सीमाओं तक सीमित नहीं है—यह पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकती है।