मध्य-पूर्व एक बार फिर युद्ध की आहट से गूंज उठा है। इज़राइल ने ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई प्रमुख शहरों पर ‘प्रिवेंटिव अटैक’ के नाम पर व्यापक सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है। भारतीय समयानुसार शनिवार सुबह तेहरान और अन्य संवेदनशील इलाकों में तेज धमाकों की आवाजें सुनी गईं। हवाई हमलों के सायरन लगातार बजते रहे, और शहरों के ऊपर लड़ाकू विमानों की गतिविधियां देखी गईं।
इज़राइल डिफेंस फोर्स (IDF) ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि यह हमला संभावित खतरे को निष्क्रिय करने के उद्देश्य से किया गया है। दूसरी ओर, ईरान ने तत्काल प्रभाव से अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है और सभी वाणिज्यिक उड़ानों को रोक दिया है। इज़राइल में भी एयर अटैक सायरन बजने लगे हैं। संवेदनशील इलाकों को खाली कराया जा रहा है और नागरिकों से सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की गई है।
‘लायंस रोअर’ : युद्ध अभियान का नया नाम
इज़राइल ने अपने इस नए सैन्य अभियान को ‘लायंस रोअर’ (शेर की दहाड़) नाम दिया है। यह नाम प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्वयं तय किया। सूत्रों के अनुसार, सेना ने प्रारंभ में इस ऑपरेशन के लिए कोई अन्य नाम प्रस्तावित किया था, लेकिन राजनीतिक नेतृत्व ने इसे अधिक आक्रामक और प्रतीकात्मक नाम देने का निर्णय लिया।
अमेरिका-इज़राइल का संयुक्त अभियान?
कतर स्थित मीडिया नेटवर्क अल जज़ीरा ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया है कि यह कार्रवाई अमेरिका और इज़राइल का संयुक्त सैन्य ऑपरेशन हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, हमले का एक लक्ष्य ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के कार्यालय के निकट का क्षेत्र था। हमले के तुरंत बाद खामेनेई को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया। हालांकि वाशिंगटन की ओर से औपचारिक पुष्टि सीमित रही है, लेकिन घटनाक्रम से स्पष्ट है कि अमेरिका इस संकट में गहराई से जुड़ा हुआ है।
ट्रम्प का सख्त संदेश
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक वीडियो संदेश में घोषणा की कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन का उद्देश्य अमेरिकी नागरिकों, सैनिकों और सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ट्रम्प ने आरोप लगाया कि ईरान की गतिविधियां लंबे समय से अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए खतरा रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान की नौसैनिक क्षमताओं और परमाणु ठिकानों को पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा यदि तेहरान ने आक्रामक रुख नहीं छोड़ा।
परमाणु वार्ता और मिसाइल विवाद
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत जारी थी। 2015 का संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA) जिससे ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल (2017–2021) में अमेरिका को बाहर कर लिया था अब भी वैश्विक कूटनीति का केंद्र बना हुआ है। इस समझौते के तहत ईरान ने संवर्धित यूरेनियम का भंडार सीमित रखने, सेंट्रीफ्यूज की संख्या घटाने और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को निरीक्षण की अनुमति देने पर सहमति दी थी। लेकिन मौजूदा वार्ता में सबसे बड़ा विवाद ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को लेकर है।
अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने हाल में चार प्रमुख शर्तें रखीं -
यूरेनियम एनरिचमेंट पर पूर्ण प्रतिबंध
संवर्धित यूरेनियम का निष्कासन
लंबी दूरी की मिसाइलों की संख्या सीमित करना
क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों को समर्थन समाप्त करना
ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि मिसाइल कार्यक्रम उसकी “रेड लाइन” है। तेहरान का तर्क है कि यह उसकी रक्षा नीति का मूल आधार है और इसे छोड़ना राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता होगा।
क्षेत्रीय संतुलन पर असर
मध्य-पूर्व में पहले से ही अस्थिर भू-राजनीतिक समीकरण इस हमले के बाद और जटिल हो गए हैं। यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो खाड़ी क्षेत्र, लेबनान, सीरिया और इराक में सक्रिय विभिन्न गुट भी इसमें शामिल हो सकते हैं। तेल बाजारों में अस्थिरता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
भारत की एडवाइजरी
इज़राइल स्थित भारतीय दूतावास ने वहां रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। नागरिकों से कहा गया है कि वे स्थानीय सरकार और होम फ्रंट कमांड के निर्देशों का पालन करें। अपने निकटतम सुरक्षित शेल्टर की जानकारी रखें। गैर-जरूरी यात्रा से बचें। आधिकारिक अलर्ट और समाचारों पर लगातार नजर रखें।
आपात स्थिति में 24×7 हेल्पलाइन (+972-54-7520711) या [email protected] पर संपर्क करने की सलाह दी गई है।
मध्य-पूर्व की यह ताजा सैन्य टकराहट केवल दो देशों के बीच सीमित संघर्ष नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन की परीक्षा बनती जा रही है। परमाणु वार्ता की मेज और युद्ध के मैदान के बीच की दूरी अब खतरनाक रूप से सिमट चुकी है। आने वाले दिन तय करेंगे कि यह संघर्ष सीमित सैन्य कार्रवाई तक रहेगा या क्षेत्रीय युद्ध में बदल जाएगा।