Op.Sindoor के बाद बढ़ी ब्रह्मोस की मांग ; अब इंडोनेशिया भी खरीदेगा भारत की घातक मिसाइल, कतार में कई अन्य देश...'

    10-मार्च-2026
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Brahmos missile news
 
भारत के रक्षा क्षेत्र में तेजी से बढ़ती ताकत और विश्वसनीयता का एक और बड़ा उदाहरण सामने आया है। अब दक्षिण–पूर्व एशिया का महत्वपूर्ण देश इंडोनेशिया भी भारत की अत्याधुनिक ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल खरीदने की तैयारी में है। यह केवल एक रक्षा सौदा नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती सैन्य और तकनीकी साख का प्रतीक बनता जा रहा है।
 
 
इंडोनेशिया खरीदेगा ब्रह्मोस !
 
 
इंडोनेशिया ने भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने के लिए औपचारिक समझौता किया है। इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रिको रिकार्डो सिरैत ने सोमवार को अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स को इसकी जानकारी दी।
 
 
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत और रूस की संयुक्त कंपनी ब्रह्मोस एयरोस्पेस इस समय जकार्ता के साथ लगभग 200 मिलियन से 350 मिलियन डॉलर (करीब 1700 से 3000 करोड़ रुपये) की डील को अंतिम रूप देने के लिए उन्नत स्तर की बातचीत कर रही है।
 
 
रिको सिरैत ने कहा कि यह समझौता इंडोनेशिया की सेना के मिलिट्री हार्डवेयर और डिफेंस कैपेबिलिटीज़ के आधुनिकीकरण की व्यापक योजना का हिस्सा है। इंडोनेशिया दक्षिण-पूर्व एशिया में अपनी समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना चाहता है और ब्रह्मोस जैसे अत्याधुनिक हथियार इसके लिए अहम माने जा रहे हैं।
 
 
फिलीपींस बन चुका है पहला विदेशी खरीदार
 
 
इंडोनेशिया से पहले फिलीपींस भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला पहला विदेशी देश बना था। भारत ने 19 अप्रैल 2024 को फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइलों की पहली खेप सौंप दी थी। यह डील जनवरी 2022 में 375 मिलियन डॉलर (करीब 3130 करोड़ रुपये) में तय हुई थी।
 
 
भारतीय वायुसेना के C-17 ग्लोबमास्टर विमान के जरिए इन मिसाइलों को फिलीपींस मरीन कॉर्प्स तक पहुंचाया गया था। फिलीपींस ने इन मिसाइलों को साउथ चाइना सी के तटीय इलाकों में तैनात करने की योजना बनाई है, ताकि चीन से बढ़ते तनाव के बीच अपनी समुद्री सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।
 
 
ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम के हर यूनिट में
 
 
दो मिसाइल लॉन्चर
 

एक एडवांस्ड रडार
 

एक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर
 
 
शामिल होता है। इसकी मदद से सिर्फ 10 सेकेंड के भीतर दो मिसाइलें दागी जा सकती हैं, जो दुश्मन के जहाजों और सैन्य ठिकानों को पलभर में तबाह कर सकती हैं। भारत फिलीपींस को इस सिस्टम के संचालन और प्रशिक्षण में भी मदद दे रहा है।
 
 
ऑपरेशन “सिंदूर” में ब्रह्मोस की ताकत
 
 
भारत की इस सुपरसोनिक मिसाइल की ताकत केवल कागजों तक सीमित नहीं है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार ऑपरेशन “सिंदूर” के दौरान ब्रह्मोस मिसाइल ने पाकिस्तान में दुश्मन के ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया था। इस ऑपरेशन के बाद दुनिया भर के रक्षा विश्लेषकों का ध्यान इस मिसाइल पर गया और कई देशों ने भारत से इसे खरीदने में रुचि दिखाई। आज स्थिति यह है कि एशिया, मध्य पूर्व और लैटिन अमेरिका के कई देश ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम खरीदने के लिए भारत से बातचीत कर रहे हैं।
 
 
क्या है ब्रह्मोस मिसाइल?
 
 
ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज़ सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक मानी जाती है। इसे भारत के DRDO (डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन) और रूस की NPOM कंपनी ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। दोनों देशों के बीच इस परियोजना को लेकर समझौता 1998 में हुआ था।
 
 
2007 में पहली बार भारतीय सेना को ब्रह्मोस मिसाइल मिली और इसके बाद भारतीय सेना के तीनों अंग आर्मी, नेवी, एयरफोर्स को यह अत्याधुनिक मिसाइल प्रणाली सौंप दी गई।
 
 
ब्रह्मोस की ताकत
 
 
ब्रह्मोस की तकनीकी क्षमताएं इसे दुनिया की सबसे खतरनाक एंटी-शिप मिसाइलों में शामिल करती हैं।
 
 
मुख्य विशेषताएं:
 
 
स्पीड: मैक 2.8 (ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना)
 

रेंज: करीब 290 किलोमीटर
 

लॉन्च प्लेटफॉर्म: जमीन, जहाज, पनडुब्बी और लड़ाकू विमान
 

लक्ष्य पर अत्यंत सटीक प्रहार
 

दुश्मन के रडार से बचने की क्षमता
 
 
यह मिसाइल इतनी तेज़ है कि दुश्मन की एयर डिफेंस सिस्टम को प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय मिलता है।
 
 
पनडुब्बी से भी हो सकता है लॉन्च
 
 
ब्रह्मोस मिसाइल को पनडुब्बी से 40 से 50 मीटर गहराई से भी दागा जा सकता है। इसकी सफल टेस्टिंग 2013 में की गई थी। इससे भारतीय नौसेना की मारक क्षमता कई गुना बढ़ गई।
 
 
क्यों पड़ा नाम “ब्रह्मोस”?
 
 
ब्रह्मोस नाम को लेकर दो प्रमुख मान्यताएं हैं। पहली मान्यता के अनुसार यह नाम भारत की ब्रह्मपुत्र नदी और रूस की मोस्कवा नदी के नाम को जोड़कर रखा गया है। जबकि कुछ रिपोर्टों के अनुसार यह नाम भगवान ब्रह्मा के दिव्य अस्त्र “ब्रह्मास्त्र” से प्रेरित है, जो इसकी विनाशकारी शक्ति को दर्शाता है।
 
 
ब्रह्मोस-II पर भी काम जारी
 
 
भारत अब ब्रह्मोस का अगला और अधिक उन्नत संस्करण ब्रह्मोस-II भी विकसित कर रहा है। बताया जा रहा है कि यह हाइपरसोनिक मिसाइल होगी जिसकी गति और रेंज दोनों मौजूदा ब्रह्मोस से कहीं अधिक होगी। इसकी संभावित रेंज 1500 किलोमीटर तक हो सकती है।
 
 
भारत बन रहा है रक्षा निर्यात का बड़ा केंद्र
 
 
ब्रह्मोस मिसाइल की अंतरराष्ट्रीय मांग इस बात का प्रमाण है कि भारत अब केवल हथियार खरीदने वाला देश नहीं रहा, बल्कि दुनिया के बड़े रक्षा निर्यातकों में तेजी से उभर रहा है। आज कई देश अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने के लिए भारत के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाना चाहते हैं। ब्रह्मोस मिसाइल इस बदलाव का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुकी है।
 
  
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ब्रह्मोस भारत के रक्षा निर्यात का सबसे बड़ा “गेम चेंजर” हथियार साबित हो सकता है। दक्षिण-पूर्व एशिया से लेकर मध्य पूर्व तक कई देश अब इस सुपरसोनिक मिसाइल को अपनी सेना में शामिल करने के लिए कतार में खड़े हैं। इस तरह ब्रह्मोस केवल एक मिसाइल नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती सैन्य शक्ति, तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रभाव का प्रतीक बन चुकी है।