#Defence : ब्रह्मोस की ताकत पर दुनिया को भरोसा ; इंडोनेशिया ने किया 3,800 करोड़ का सौदा

    12-मार्च-2026
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Brahmos missile indonesia
 
भारत की रक्षा क्षमताओं और आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ते कदम अब वैश्विक स्तर पर साफ दिखाई देने लगे हैं। एक समय जो देश रक्षा उपकरणों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर था, वही भारत आज दुनिया के कई देशों के लिए उन्नत हथियार प्रणालियों का भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता बनता जा रहा है। इसी क्रम में भारत को एक और बड़ी सफलता मिली है। फिलीपींस के बाद अब दुनिया के सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया ने भी भारत से 'ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल' प्रणाली खरीदने का फैसला किया है।
 
 
इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता 'रिको रिकार्डो सिरैत' ने सोमवार को इस समझौते की पुष्टि की। इस डील के साथ ही इंडोनेशिया, फिलीपींस के बाद दक्षिण-पूर्व एशिया का दूसरा देश बन गया है जिसने भारत की घातक ब्रह्मोस मिसाइल पर भरोसा जताया है। यह केवल एक रक्षा सौदा भर नहीं है, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की बढ़ती साख और तकनीकी क्षमता का भी प्रमाण है।
 
 
रिपोर्ट के अनुसार, भारत और इंडोनेशिया के बीच हुई इस रक्षा डील की कीमत करीब 450 मिलियन डॉलर (लगभग 3,800 करोड़ रुपये) बताई जा रही है। यह समझौता न केवल भारत के रक्षा निर्यात को नई ऊंचाई देने वाला है, बल्कि इंडोनेशिया की समुद्री सुरक्षा और तटीय रक्षा क्षमता को भी मजबूत करेगा। दरअसल, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते सामरिक समीकरणों के बीच कई देश अपनी रक्षा क्षमताओं को आधुनिक बना रहे हैं और इस दिशा में भारत एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में उभर रहा है।
 
 
इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय ने क्या कहा?
 
 
इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रिको रिकार्डो सिरैत के मुताबिक, भारत के साथ ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली की खरीद उनकी सैन्य क्षमता के आधुनिकीकरण का अहम हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यह सौदा विशेष रूप से तटीय सुरक्षा को मजबूत करने और राष्ट्रीय रक्षा तंत्र को अधिक प्रभावी बनाने की रणनीति के तहत किया गया है। रिको के अनुसार, यह समझौता जकार्ता और नई दिल्ली के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा। ब्रह्मोस जैसी उन्नत प्रणाली के शामिल होने से इंडोनेशिया की राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा और प्रतिरोधक क्षमता को भी बड़ा बल मिलेगा।
 
 
भारत की ब्रह्मोस पर कई देशों की नजर
 
 
रूस के सहयोग से ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत विकसित ब्रह्मोस मिसाइल आज दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिनी जाती है। इसकी क्षमता और विश्वसनीयता को देखते हुए कई अन्य देशों ने भी इसमें गहरी दिलचस्पी दिखाई है। रिपोर्ट के मुताबिक, वियतनाम भी लगभग 700 मिलियन डॉलर की संभावित डील को अंतिम रूप देने के करीब है। इसके अलावा थाईलैंड, सऊदी अरब, यूएई, ओमान, मिस्र और कुछ लैटिन अमेरिकी देश भी भारत के साथ ब्रह्मोस खरीद को लेकर बातचीत के चरण में हैं। यदि ये सौदे आगे बढ़ते हैं तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक रक्षा निर्यात के प्रमुख केंद्रों में शामिल हो सकता है।
 
 
ऑपरेशन सिंदूर में दिखी ब्रह्मोस की ताकत
 
 
भारत में निर्मित ब्रह्मोस मिसाइलों ने अपनी मारक क्षमता का प्रदर्शन केवल निर्यात बाजार में ही नहीं, बल्कि वास्तविक सैन्य अभियानों में भी किया है। पहलगाम हमले के बाद भारतीय सेना द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में ब्रह्मोस मिसाइल ने आतंकवादी ठिकानों को सटीक निशाना बनाकर ध्वस्त करने में अहम भूमिका निभाई थी। उस अभियान में भारतीय सेना ने ब्रह्मोस के साथ-साथ आकाश मिसाइल और एमआरएसएएम (बराक-8) जैसी उन्नत प्रणालियों का भी इस्तेमाल किया। यह भारत की बहुस्तरीय वायु एवं प्रहार क्षमता का स्पष्ट संकेत था।
 
 
ब्रह्मोस मिसाइल की प्रमुख खासियतें
 
 
ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसकी गति लगभग 3,700 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। इसकी मारक क्षमता लगभग 800 किलोमीटर तक मानी जाती है। यह मिसाइल अपने साथ 200 से 300 किलोग्राम तक वॉरहेड ले जाने में सक्षम है।
 
 
इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे जमीन, समुद्र और हवा - तीनों प्लेटफॉर्म से लॉन्च किया जा सकता है। साथ ही यह दुश्मन के रडार से बचने के लिए बेहद कम ऊंचाई पर उड़ान भरते हुए लक्ष्य को भेदने में सक्षम है, जिससे इसकी मारक क्षमता और भी घातक बन जाती है।
 
 
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मजबूत कदम
 
 
दरअसल, ब्रह्मोस जैसे अत्याधुनिक हथियारों का निर्यात यह दर्शाता है कि भारत अब केवल अपनी सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वह वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला का भी अहम हिस्सा बनता जा रहा है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ की नीतियों ने रक्षा क्षेत्र में नई ऊर्जा भरी है, जिसका परिणाम आज दुनिया देख रही है।
 
 
इंडोनेशिया के साथ हुआ यह समझौता इसी बदलते भारत की तस्वीर पेश करता है एक ऐसा भारत जो न केवल अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए सक्षम है, बल्कि मित्र देशों की सुरक्षा क्षमता को भी मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आने वाले समय में यदि ब्रह्मोस जैसे और स्वदेशी हथियार वैश्विक बाजार में अपनी जगह बनाते हैं, तो यह भारत को रक्षा क्षेत्र की महाशक्तियों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।