मध्य पूर्व में जारी भीषण तनाव के बीच ईरान ने अपनी हवाई सुरक्षा को मजबूत करने के लिए जिस चीनी एयर डिफेंस सिस्टम पर भरोसा किया था, वही संकट की घड़ी में नाकाम साबित होता दिखा। अमेरिकी और इजराइली हवाई हमलों के दौरान तेहरान समेत कई संवेदनशील ठिकानों की रक्षा में चीन का अत्याधुनिक माना जाने वाला HQ-9B एयर डिफेंस सिस्टम प्रभावी ढंग से रोकथाम नहीं कर सका। इस घटनाक्रम ने न केवल ईरान की सुरक्षा रणनीति पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि चीन के हथियारों की विश्वसनीयता पर भी नई बहस छेड़ दी है।
क्या है चीन का HQ-9B एयर डिफेंस सिस्टम?
HQ-9B को चीन की सरकारी रक्षा कंपनी 'China Aerospace Science and Industry Corporation' (CASIC) ने विकसित किया है। यह सिस्टम रूसी S-300PMU और अमेरिकी Patriot PAC-2 की तकनीक से प्रेरित माना जाता है, हालांकि चीन इसे पूरी तरह स्वदेशी बताता है।
इसकी प्रमुख विशेषताएँ:
रेंज: लगभग 260 किमी
ऊँचाई क्षमता: 50 किमी तक
ट्रैकिंग क्षमता: 100 तक लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है
एक साथ हमला: 6–8 टारगेट पर
टेक्नोलॉजी: एक्टिव रडार होमिंग और पैसिव इंफ्रारेड सीकर
चीन ने इसे बीजिंग, तिब्बत और दक्षिण चीन सागर जैसे रणनीतिक इलाकों में तैनात कर रखा है।
ईरान ने क्यों खरीदा था HQ-9B?
इजराइल के संभावित हमलों और क्षेत्रीय अस्थिरता को देखते हुए ईरान ने अपनी वायु सुरक्षा को मजबूत करने के लिए चीन से HQ-9B खरीदा था। बताया जाता है कि यह डील तेल के बदले हथियार समझौते के तहत हुई थी। 2025 के संघर्ष में जब रूसी S-300PMU-2 इजराइली मिसाइलों के सामने कमजोर साबित हुआ, तब ईरान ने विकल्प के तौर पर चीन का रुख किया।
कहाँ-कहाँ तैनात था HQ-9B?
रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान ने HQ-9B को अपने सबसे संवेदनशील और रणनीतिक ठिकानों की सुरक्षा में लगाया था:
नतांज न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स
फोर्डो यूरेनियम एनरिचमेंट फैसिलिटी
IRGC के मिसाइल और UAV बेस
तेहरान और इस्फ़हान के आसपास के एयरबेस
इसे लंबी दूरी के सिस्टम जैसे बावर-373, मध्यम दूरी के खोरदाद-15 और राड, तथा कम दूरी के टोर-M2 और पैंटसिर-S1 के साथ एकीकृत कर मल्टी-लेयर डिफेंस बनाया गया था।
फिर भी क्यों नाकाम रहा?
विशेषज्ञों के अनुसार संभावित कारण ये हो सकते हैं:
इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर: इजराइल और अमेरिका की उन्नत जैमिंग तकनीक
स्टील्थ तकनीक: आधुनिक स्टील्थ एयरक्राफ्ट और प्रिसिजन गाइडेड म्यूनिशन
नेटवर्क सेंटरिक वॉरफेयर: रियल टाइम इंटेलिजेंस और सटीक लक्ष्य साधना
ओवरसैचुरेशन अटैक: एक साथ कई दिशाओं से हमले
यदि ये सिस्टम कागजों पर जितना मजबूत बताया गया था, जमीन पर उतना प्रभावी नहीं दिखा, तो यह चीन की रक्षा तकनीक के दावों पर बड़ा प्रश्नचिन्ह है।
ऑपरेशन सिंदूर में भी हुआ था तबाह
यह वही हथियार है जिसका एक वर्जन (HQ-9P) पाकिस्तान में तैनात था और जिसे भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पूरी तरह से तबाह कर दिया था। उस समय भी इसकी प्रभावशीलता पर सवाल उठे थे। अब ईरान में हुई घटनाओं ने इन सवालों को और गहरा कर दिया है।
क्या चीनी हथियार सिर्फ दिखावा हैं?
चीन पिछले कुछ वर्षों से वैश्विक हथियार बाजार में तेजी से उभर रहा है। पाकिस्तान, ईरान और कई अफ्रीकी व एशियाई देशों को वह बड़े पैमाने पर रक्षा उपकरण बेच रहा है। लेकिन यदि संकट की घड़ी में ये सिस्टम दुश्मन के आधुनिक हमलों को रोकने में विफल रहते हैं, तो यह केवल एक देश की नहीं बल्कि चीन के पूरे रक्षा निर्यात मॉडल की विश्वसनीयता पर असर डाल सकता है।
निष्कर्ष
ईरान ने अपनी सामरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए जिस चीनी HQ-9B पर भरोसा किया, वह वास्तविक युद्ध जैसी स्थिति में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सका। यह घटना केवल एक सैन्य असफलता नहीं, बल्कि वैश्विक हथियार बाजार में विश्वास, तकनीकी श्रेष्ठता और रणनीतिक गठबंधनों पर भी गहरा प्रभाव डाल सकती है। अब दुनिया की निगाहें इस पर हैं कि क्या चीन अपने सिस्टम की कमियों को दूर करेगा या फिर यह घटनाक्रम उसके रक्षा उद्योग की साख पर स्थायी दाग बन जाएगा।