पाकिस्तान में हिन्दू आस्था पर फिर हुआ प्रहार ; कराची में भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा खंडित'

    02-अप्रैल-2026
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Lord Krishna Idol Vandalised
 
 
पाकिस्तान में हिंदू आस्था और उससे जुड़ी सांस्कृतिक विरासत पर हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताज़ा मामला कराची से सामने आया है, जहां ऐतिहासिक ‘सागन मेसन बिल्डिंग’ में स्थापित भगवान श्रीकृष्ण और गोपियों की प्रतिमाओं को असामाजिक तत्वों ने बेरहमी से खंडित कर दिया।
 
 
1937 में निर्मित यह इमारत केवल एक ढांचा नहीं, बल्कि पाकिस्तान में हिंदू समुदाय की आस्था और साझा सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक थी। एमए जिन्ना रोड पर स्थित इस ऐतिहासिक भवन में न सिर्फ मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया गया, बल्कि पूरे परिसर में तोड़फोड़ कर इसे अपवित्र करने की कोशिश की गई। 
 
 
89 साल पुरानी विरासत पर ‘नफरत का हमला’
 
 
करीब 89 वर्षों से यह स्थल कराची की बहु-सांस्कृतिक पहचान को संजोए हुए था। भगवान श्रीकृष्ण और गोपियों की ये प्रतिमाएं न सिर्फ धार्मिक महत्व रखती थीं, बल्कि यह इस बात का प्रमाण भी थीं कि कभी यहां विविधता और सह-अस्तित्व की परंपरा जीवित थी। आज उसी विरासत को योजनाबद्ध तरीके से मिटाने की कोशिश की जा रही है।
 
 
 
 
 
अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमले, पाकिस्तान बेनकाब
 
 
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं की धार्मिक स्वतंत्रता कितनी असुरक्षित है। आए दिन मंदिरों, मूर्तियों और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाना वहां के मानवाधिकारों की वास्तविक स्थिति को उजागर करता है।
 
 
सख्त कार्रवाई की मांग
 
 
पाकिस्तान दरावर इत्तेहाद के चेयरमैन फकीर शिवा कच्छी ने इस घटना को “बेहद शर्मनाक” बताते हुए कहा कि यह केवल हिंदू समुदाय पर नहीं, बल्कि पूरे देश की सांझी विरासत पर हमला है। उन्होंने प्रशासन से सवाल किया कि आखिर कब तक अल्पसंख्यकों की आस्था यूं ही रौंदी जाती रहेगी? साथ ही मांग की गई है कि दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर कड़ी सजा दी जाए, और ऐतिहासिक भवन की मरम्मत के साथ ऐसे स्थलों की चौबीसों घंटे सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
 
 
इस घटना के बाद पाकिस्तान की कट्टरपंथी मानसिकता को लेकर फिर सवाल खड़े हुए हैं कि क्या पाकिस्तान में हिंदू होना अपराध बन चुका है? आखिरकार क्यों वहां की सांस्कृतिक विरासत को सुनियोजित तरीके से मिटाया जा रहा है? कराची की यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि उस कड़वी सच्चाई का आईना है, जहां नफरत के आगे इतिहास और आस्था दोनों असुरक्षित हैं।