पाकिस्तान में एक बार फिर अज्ञात हमलावर एक्टिव हो चुके हैं। पडोसी मुल्क पाकिस्तान में इस बार अज्ञात हमलावरों के निशाने पर था प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का एक बड़ा चेहरा - लश्कर कमांडर शेख यूसुफ अफरीदी। खैबर पख्तूनख्वा के पहाड़ी इलाके में अज्ञात हमलावरों ने उसे बेहद सुनियोजित तरीके से गोलियों से छलनी कर मौत के घाट उतार दिया। स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों ने इस घटना को “टारगेट किलिंग” करार दिया है - एक ऐसा शब्द, जो अब पाकिस्तान में तेजी से आम होता जा रहा है, खासकर उन लोगों के लिए जो आतंकी नेटवर्क से जुड़े रहे हैं।
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आतंकी अफरीदी जैसे ही अपने ठिकाने के पास पहुंचा, घात लगाए बैठे हमलावरों ने उस पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। गोलियों की बौछार इतनी तेज थी कि उसे संभलने या भागने का कोई मौका नहीं मिला। घटनास्थल पर ही उसकी मौत हो गई, जबकि हमले को अंजाम देने के बाद हमलावर पास के पहाड़ी इलाकों में गायब हो गए। यह हमला न सिर्फ सटीक था, बल्कि पेशेवर तरीके से अंजाम दिया गया-जिससे साफ संकेत मिलता है कि हमलावरों को उसकी हर गतिविधि की सटीक जानकारी थी। इससे पहले भी लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक सदस्यों में शामिल और अमेरिका द्वारा वैश्विक आतंकवादी घोषित मौलाना आमिर हमजा पर लाहौर में जानलेवा हमला हुआ था, जिसमें वो बुरी तरह जख्मी था।
कौन था शेख यूसुफ अफरीदी?
शेख यूसुफ अफरीदी खैबर पख्तूनखवा के जखा खेल कबीले से ताल्लुक रखता था और पश्तूनों की अफरीदी शाखा का हिस्सा था। वह कट्टर इस्लामी विचारधारा अहले-हदीस (सलाफी) से प्रभावित एक मौलाना था, जिसने आतंक के नेटवर्क में अपनी गहरी पकड़ बना ली थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह लश्कर चीफ हाफिज मोहम्मद सईद का बेहद करीबी सहयोगी था और आतंकी संगठन के प्रांतीय स्तर पर बेहद प्रभावशाली कमांडरों में गिना जाता था। उसकी भूमिका केवल वैचारिक नहीं, बल्कि ऑपरेशनल भी थी। बताया जाता है कि वह आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए युवाओं की भर्ती कर उन्हें जिहादी प्रशिक्षण दिलवाता और फिर जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों के लिए भेजता था।
पाकिस्तान में आतंकियों की ‘साइलेंट क्लीन-अप’ लिस्ट!
पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान में कई बड़े आतंकी चेहरे इसी तरह अज्ञात हमलावरों के हाथों मारे गए हैं। यह सिलसिला एक पैटर्न की ओर इशारा करता है:
शाहिद लतीफ - जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा पठानकोट हमले का मास्टरमाइंड, अक्टूबर 2023 में सियालकोट में ढेर
परमजीत सिंह पंजवाड़ - खालिस्तान कमांडो फोर्स चीफ, मई 2023 में लाहौर में हत्या
अबू कासिम कश्मीरी - लश्कर कमांडर, सितंबर 2023 में रावलकोट की मस्जिद में मारा गया
हंजला अदनान - हाफिज सईद का करीबी, दिसंबर 2023 में कराची में गोली मारकर हत्या
बशीर अहमद पीर - हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर, फरवरी 2023 में रावलपिंडी में ढेर
अकरम गाजी - लश्कर का प्रमुख कमांडर, नवंबर 2023 में बाजौर में मारा गया
दाऊद मलिक - मसूद अजहर का सहयोगी, अक्टूबर 2023 में वजीरिस्तान में हत्या
ख्वाजा शाहिद - सुंजवान हमले का मास्टरमाइंड, नवंबर 2023 में PoJK में सिर कटा शव मिला
सैयद खालिद रजा - अल-बद्र मुजाहिदीन से जुड़ा कमांडर, फरवरी 2023 में कराची में हत्या
कैसर फारूक - लश्कर का संस्थापक सदस्य, सितंबर 2023 में कराची में ढेर
क्या संकेत देता है यह पैटर्न?
पाकिस्तान में बैठे भारत के दुश्मनों की लगातार हो रही इन हत्याओं ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं क्या पाकिस्तान के भीतर ही आतंकी नेटवर्क आपसी संघर्ष का शिकार हो रहे हैं? या फिर कोई संगठित “क्लीन-अप ऑपरेशन” चुपचाप चल रहा है? एक बात साफ है पाकिस्तान की सरजमीं पर पनपे ये आतंकी अब खुद असुरक्षित होते जा रहे हैं। जिस नेटवर्क को उन्होंने खड़ा किया, वही अब उनके लिए सबसे बड़ा खतरा बनता दिख रहा है।