Shri Amarnath Shrine Board ने वर्ष 2026 की अमरनाथ यात्रा के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। बोर्ड ने घोषणा की है कि वार्षिक यात्रा के लिए एडवांस रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 15 अप्रैल से देशभर की 554 निर्धारित बैंक शाखाओं में शुरू होगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए इस बार रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को और अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और डिजिटल बनाया गया है।
‘पहले आओ, पहले पाओ’
अधिकारियों के अनुसार, यात्रा परमिट का वितरण ‘फर्स्ट-कम, फर्स्ट-सर्व’ के आधार पर किया जाएगा। हर दिन और हर मार्ग (बालटाल व पहलगाम) के लिए सीमित कोटा निर्धारित किया गया है। ऐसे में श्रद्धालुओं को सलाह दी गई है कि वे समय रहते अपना पंजीकरण सुनिश्चित करें।
उम्र सीमा और स्वास्थ्य नियम
जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, 13 से 70 वर्ष की आयु के श्रद्धालु ही यात्रा के लिए पात्र होंगे। वहीं, छह सप्ताह से अधिक गर्भवती महिलाओं को यात्रा की अनुमति नहीं दी जाएगी, भले ही उनके पास आवश्यक स्वास्थ्य प्रमाणपत्र क्यों न हो। यात्रा के लिए Compulsory Health Certificate (CHC) अनिवार्य किया गया है, जो 8 अप्रैल 2026 या उसके बाद किसी अधिकृत डॉक्टर या संस्थान द्वारा जारी होना चाहिए।
आधार आधारित eKYC से होगा रजिस्ट्रेशन
इस वर्ष रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाया गया है। श्रद्धालुओं का पंजीकरण आधार आधारित बायोमेट्रिक eKYC के माध्यम से रियल-टाइम में किया जाएगा। इसके बाद यात्रा परमिट Shri Amarnath Shrine Board के आधिकारिक पोर्टल के जरिए ऑनलाइन जारी होंगे। यदि किसी कारणवश बायोमेट्रिक सत्यापन में तकनीकी समस्या आती है, तो वैकल्पिक रूप से मैन्युअल डेटा एंट्री और वेबकैम के जरिए फोटो कैप्चर की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
शुल्क और दस्तावेज
प्रत्येक यात्रा परमिट के लिए ₹150 शुल्क निर्धारित किया गया है। श्रद्धालुओं को पंजीकरण के समय वैध CHC और सही आधार व मोबाइल विवरण प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। बोर्ड ने 37 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अधिकृत डॉक्टरों और मेडिकल संस्थानों की सूची भी जारी की है, जहां से CHC प्राप्त किया जा सकता है।
तय मार्ग और यात्रा तिथि का उल्लेख
जारी किए जाने वाले परमिट में श्रद्धालु द्वारा चुना गया मार्ग — बालटाल या पहलगाम — स्पष्ट रूप से अंकित होगा। साथ ही परमिट में वह तिथि भी दर्ज होगी, जिस दिन यात्री को डोमेल (बालटाल मार्ग) या चंदनवारी (पहलगाम मार्ग) से प्रवेश की अनुमति होगी। ध्यान देने वाली बात यह है कि किसी भी निर्धारित यात्रा तिथि के लिए रजिस्ट्रेशन उससे 7 दिन पहले ही बंद कर दिया जाएगा।
पहलगाम मार्ग
यात्रा मार्ग
मंदिर तक पहुंचने वाले मार्ग पर बेहद ही कठिनाई होती है। लिहाजा इसलिए अमरनाथ यात्रा मार्ग को जुलाई-अगस्त के आसपास श्रावण के महीने में ही जनता के लिए खोला जाता है। सड़क के रास्ते अमरनाथ पहुंचने के लिए पहले जम्मू तक जाना होगा फिर जम्मू से श्रीनगर तक का सफर करना होता है। श्रीनगर से तीर्थयात्री पहलगाम या बालटाल पहुँचते हैं। पहलगाम या बालटाल तक आप किसी भी वाहन से पहुंच सकते हैं लेकिन इससे आगे का सफर आपको पैदल ही करना होता है। क्योंकि पहलगाम और बालटाल से ही श्री अमरनाथ यात्रा की शुरुआत होती है और पवित्र गुफा तक पहुंचने के लिए यहाँ से दो रास्ते निकलते हैं। पहलगाम से अमरनाथ की पवित्र गुफा की दूरी जहाँ करीब 48 किलोमीटर है वहीं बालटाल से गुफा की दूरी 14 किलोमीटर है। यहाँ से तीर्थयात्रियों को पैदल मार्ग से ही गुफा तक यात्रा करनी होती है।
बालटाल मार्ग
चूँकि बालटाल से अमरनाथ गुफा तक की दूरी कम है और यह छोटा रूट है लिहाजा तीर्थयात्री कम समय में गुफा तक पहुंच सकते हैं। लेकिन यह रास्ता काफी कठिन और सीधी चढ़ाई वाला है इसलिए इस रूट से ज्यादा बुजुर्ग और बीमार नहीं जाते हैं। जबकि बात करें पहलगाम रूट की तो यह अमरनाथ यात्रा का सबसे पुराना और ऐतिहासिक रूट है। इस रूट से गुफा तक पहुंचने में करीब 3 दिन लगते हैं। लेकिन यह ज्यादा कठिन नहीं है। पहलगाम से पहला पड़ाव चंदनवाड़ी का आता है जो पहलगाम बेस कैंप से करीब 16 किलोमीटर दूर है यहां तक रास्ता लगभग सपाट होता है इसके बाद चढ़ाई शुरू होती है। इससे अगला स्टॉप 3 किलोमीटर आगे पिस्सू टॉप है। तीसरा पड़ाव शेषनाग है जो पिस्सू टॉप से करीब 9 किलोमीटर दूर है। शेषनाग के बाद अगला पड़ाव पंचतरणी का आता है जो शेषनाग से 14 किलोमीटर दूर है। पंचतरणी से पवित्र गुफा केवल 6 किलोमीटर दूर रह जाती है।
सुचारु व्यवस्था के लिए विशेष तैयारी
बैंक शाखाओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे पर्याप्त हेल्प डेस्क स्थापित करें, कर्मचारियों को प्रशिक्षित करें और व्यापक जागरूकता अभियान चलाएं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण सलाह
Shri Amarnath Shrine Board ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे पंजीकरण के दौरान अपने आधार और मोबाइल नंबर की सही जानकारी दें और सभी निर्धारित नियमों का पालन करें, ताकि उनकी यात्रा सुरक्षित और सुगम हो सके। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए इस कठिन लेकिन पवित्र यात्रा में शामिल होते हैं। ऐसे में समय पर रजिस्ट्रेशन और सही तैयारी ही इस आध्यात्मिक यात्रा को सफल और यादगार बना सकती है।