भारत की रक्षा प्रणाली में एक बड़ा और रणनीतिक बदलाव होने जा रहा है। राजधानी दिल्ली में जमीन के नीचे तैयार किया गया अत्याधुनिक अंडरग्राउंड जॉइंट ऑपरेशंस कंट्रोल रूम अब जल्द ही सक्रिय होने वाला है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि देश का पहला त्रि-सेवा जॉइंट ऑपरेशन सेंटर मई 2026 के अंत तक शुरू हो जाएगा। यह हाई-टेक सेंटर देश की तीनों सेनाओं- थल सेना, नौसेना और वायु सेना को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाकर युद्ध संचालन को पूरी तरह बदल देगा।
जैसा कि हम सभी जानते हैं कि अब तक तीनों सेनाएं अलग-अलग रणनीतियों के तहत काम करती थीं, लेकिन इस नए कंट्रोल रूम के शुरू होने के बाद एकीकृत कमांड और रियल-टाइम कोऑर्डिनेशन संभव हो सकेगा। इसका मतलब है कि युद्ध या किसी भी आपात स्थिति में फैसले तेजी से लिए जाएंगे और तुरंत लागू भी किए जा सकेंगे।
सूत्रों के अनुसार, यह अंडरग्राउंड सेंटर दिल्ली में बन रहे नए कर्तव्य भवन परिसर के नीचे गहराई में तैयार किया गया है, ताकि किसी भी हमले या खतरे की स्थिति में यह पूरी तरह सुरक्षित रहे। इसमें अत्याधुनिक कम्युनिकेशन सिस्टम, सैटेलाइट निगरानी और डिजिटल वॉरफेयर से जुड़ी तकनीकों को शामिल किया गया है, जो इसे भविष्य के युद्धों के लिए तैयार बनाती हैं।
वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने इस परियोजना का प्रस्ताव रखा था जिसे मोदी सरकार से अनुमति मिली और युद्ध स्तर पर काम शुरू हुआ। इस परियोजना के साथ ही भारत की थिएटर कमान रणनीति को भी गति मिल रही है। इसके तहत देश की सुरक्षा को तीन मुख्य हिस्सों में बांटा जाएगा-
उत्तरी कमान: चीन सीमा पर निगरानी और जवाबी रणनीति
पश्चिमी कमान: पाकिस्तान से जुड़े खतरों पर फोकस
मैरीटाइम कमान: हिंद महासागर और समुद्री सीमाओं की सुरक्षा
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत को मल्टी-डोमेन वॉरफेयर- यानी जमीन, समुद्र, हवा, साइबर और अंतरिक्ष के नए युग में मजबूती से खड़ा करेगा। खास बात यह है कि हाल के वैश्विक संघर्षों, विशेषकर पश्चिम एशिया में हुए युद्धों से मिले अनुभवों को भी इस प्रोजेक्ट में ध्यान में रखा गया है, जहां अंडरग्राउंड कमांड सेंटर की भूमिका बेहद अहम साबित हुई।
कुल मिलाकर, यह अंडरग्राउंड जॉइंट कंट्रोल रूम भारत की रक्षा तैयारियों को न सिर्फ और मजबूत करेगा, बल्कि दुश्मनों के खिलाफ तेज, सटीक और समन्वित कार्रवाई की क्षमता भी कई गुना बढ़ा देगा। आने वाले समय में यह सेंटर भारतीय सेना के लिए “गेम चेंजर” साबित हो सकता है।