सरला भट्ट मर्डर केस : कश्मीरी हिंदू लड़की की हत्या का केस, जिसे सुलझाने में लगे 36 साल
28-जून-2026
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36 साल के लंबे इंताजर के बाद, आखिरकार ये साफ हो चुका है कि सरला भट्ट, एक 27 साल की कश्मीरी हिंदू लड़की, की 1990 के दशक में हत्या किसने की थी..
जम्मू-कश्मीर स्टेट इनवेंस्टिगेटिंग एजेंसी यानि SIA ने सरला के हत्यारों की पहचान कर ली है.
जांच एजेंसी ने मामले में चार आरोपियों की पहचान की है, जिनमें से तीन की कथित तौर पर मौत हो चुकी है. जबकि एक फरार है, उसके पाकिस्तान में होने की आशंका जताई जा रही है.
मामले में JKLF कनेक्शन की भी पुष्टि हुई है. सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि हत्या पाकिस्तान समर्थित अलगाववादी संगठन के लीडर यासीन मलिक के इशारे पर की गई थी. हालांकि ये तथ्य बिलकुल भी चौंकाने वाला नहीं है.
अलगाववादी नेता यासीन मलिक फिलहाल टेरर फंडिंग मामले में दिल्ली की तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है.
रिपोर्ट की मानें तो SIA जल्द ही केस में चार्जशीट भी दाखिल कर सकती है.
-आइए एक नजर डालते हैं इस केस की टाइमलाइन पर
1990 के दशक में हुई कश्मीरी हिंदुओं की टारगेटेड किलिंग्स के कई मामलों में उस वक्त FIR तो दर्ज हुई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई.
2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू कश्मीर में राजनीतिक हालात तेजी से बदले. साल 2023 में केंद्र की व्यापक पहल के तहत 1990 के दशक में हुई कश्मीरी हिंदुओं की हत्याओं के मामलों को फिर से खोला गया.
नीलकंठ गंजू हत्याकांड केस से इसकी शुरुआत मानी जा सकती है. 7-8 अगस्त 2023 को SIA ने सार्वजनिक तौर पर लोगों से इस केस से जुड़ी जानकारी या दस्तावेज साझा करने की अपील भी की थी.
इसके दो साल बाद 1 अगस्त 2025 को LG मनोज सिन्हा श्रीनगर में एक उच्च-स्तरीय बैठक करते हैं. LG इस बैठक में 1990 के दशक में की गई कश्मीरी हिंदुओं की टारगेटेड किलिंग्स के मामलों को फिर से खोलने के निर्देश देते हैं. जिसके बाद अगस्त 2025 में SIA सरला भट्ट मर्डर केस मामले में फिर से जांच शुरु करती है. 12 अगस्त 2025 को SIA इसी केस में श्रीनगर में 8 जगहों पर रेड करती है. इसमें यासीन मलिक समेत JKLF के कई आतंकियों के ठिकाने शामिल होते हैं.
SIA इस दौरान कुछ ठोस सबूत मिलने का दावा भी करती है.
-कौन थी सरला भट्ट ?
बता दें कि अनंतनाग के काजीबाग की रहने वाली 27 साल की सरला भट्ट श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में बतौर नर्स तैनात थी. उसे लगातार नौकरी छोड़ने और घाटी से चले जाने की धमकियां मिल रही थीं. लेकिन सरला अलगाववादियों की इन धमकियों को नजरअंदाज करती है. जिसकी बड़ी कीमत उसे चुकानी पड़ती है.
14 अप्रैल 1990 को JKLF के आतंकी मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल से सरला को किडनैप कर लेते हैं. कई दिनों तक गैंगरेप करने के बाद सरला भट्ट का गोलियों से छलनी शव 19 अप्रैल 1990 को श्रीनगर के डाउन टाउन इलाके में मिलता है. पोस्टमार्टम में गैंगरेप और गोली लगने से मौत की पुष्टि होती है.
-36 साल बाद न्याय मिलने की उम्मीद
भले ही राजनीतिक कारणों से जांच एजेंसी को किसी नतीजे पर पहुंचने में इतना समय लगा. लेकिन अब जब सरला के हत्यारों की पहचान कर ली गई है. इससे हत्या के दूसरे मामलों में भी विक्टिम्स की आंखों में इंसाफ मिलने की उम्मीद जगी है. जम्मू कश्मीर में बदले हुए हालातों में ये साफ है कि यासीन मलिक जैसे कश्मीरी हिंदुओं के किसी भी गुनहागार को बख्शा नहीं जाएगा.
2019 के बाद झेलम में बहुत पानी बह चुका है, ये वक्त 1990 में घाटी से पलायन को मजबूर हुए कश्मीरी हिंदुओं के फिर से अपनी जमीन पर लौटने का है, उनको इंसाफ मिलने का है.