बलूच लोग आज बहुत खुश हैं, ये मौका उनके लिए बेहद खास है. आखिर वो अपना 79वां स्वतंत्रता दिवस जो मना रहे हैं. भारत ही नहीं, दुनिया के कई देशों के लोग उनकी इस खुशी में शामिल हैं. सोशल मीडिया पर भी इसकी झलक देखी जा सकती है. हाल ही में 'रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान' समूह ने पाकिस्तान से अलग होने, अलग झंडा, अलग राष्ट्रगान और अलग करेंसी के साथ 85 फीसदी इलाके पर नियंत्रण होने का दावा किया था. संगठन ने घोषणा की है कि वो जल्द ही अपना पासपोर्ट भी जारी करेंगे.
11 अगस्त 1947 को ब्रिटिश हुकूमत ने कलात रियासत (आज का बलूचिस्तान )को स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दी. यानी पाकिस्तान के वजूद में आने से 3 दिन पहले बलूचिस्तान आजाद देश बन चुका था. आजादी के बाद बलूचिस्तान में चुनाव हुए, संसद बनी और सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया गया कि बलूचिस्तान पाकिस्तान में शामिल नहीं होगा. लेकिन ये आजादी ज्यादा दिन नहीं टिक सकी. 27 मार्च 1948 को पाकिस्तानी सेना ने कलात पर हमला कर वहां अवैध कब्जा कर लिया. पिछले 78 सालों से बलूच पाकिस्तान के इस अवैध कब्जे के खिलाफ लड़ते आ रहे हैं.
बलूचों के इस विद्रोह को हम पांच कालखंडों में बांट सकते हैं.
पहला विद्रोह (मार्च 1948)
मार्च 1948 में कलात रियासत पर कब्जे के तुरंत बाद यह विद्रोह भड़क उठा, राजा के छोटे भाई प्रिंस अब्दुल करीम बलूच ने इसका नेतृत्व किया . लेकिन पाकिस्तानी सेना ने इसे कुचल दिया
दूसरा विद्रोह (1958 - 1959)
पाकिस्तान ने बलूचिस्तान की क्षेत्रीय पहचान खत्म कर उसे 'पश्चिमी पाकिस्तान' का हिस्सा बनाया. बलूच नेता नवाब नौरोज़ खान ने पाकिस्तान के खिलाफ हथियार उठाए, लेकिन धोखे से उनको खत्म कर दिया गया.
तीसरा विद्रोह (1962 - 1969)
पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में नए सैन्य बेस बनाने शुरू किए, स्थानीय बलूचों ने इसका विरोध किया. बलूचिस्तान को पाकिस्तान का चौथा प्रांत घोषित कर संघर्ष विराम हुआ
चौथा विद्रोह (1973 - 1977)
1973 में जुल्फिकार भुट्टो ने बलूचिस्तान में मार्शल लॉ लगा दिया, बलूचों के खिलाफ वायुसेना का इस्तेमाल किया. ईरान के शाह से मदद ली. चार साल तक संघर्ष चला. पांच हजार बलूच लड़ाके और तीन हजार पाकिस्तानी सैनिक मारे गए
पांचवां और वर्तमान विद्रोह (2004-वर्तमान )
ये सबसे लंबा और हिंसक विद्रोह है. गैस और खनिज के दोहन के खिलाफ शुरु हुआ. 2010 में CPEC का विरोध शुरु हुआ, विद्रोह का नेतृत्व शिक्षित युवाओं के हाथ में आया .
बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी पाकिस्तानी सेना और चीनी इंजीनियरों को निशाना बना रही है.
लेकिन सवाल है कि पाकिस्तान ने बलूचिस्तान पर कब्जा किया क्यों, तो इसका जवाब है, बलूचिस्तान के समृद्ध गैस, सोने और तांबे के भंडार, पाकिस्तान यहां माइनिंग तो करता है. लेकिन उससे जो पैसा आता है, वो बलूचिस्तान के काम नहीं आता. पाकिस्तानी सेना के जनरल उसे अपने कारोबार में लगाते हैं. इतने समृद्ध खनीज भंडार होने के बाद भी बलूच लोग गरीबी में जीवन गुजारने को मजबूर हैं. जब अपना हक मांगते हैं, तो पाकिस्तानी सेना अत्याचार करती है. और इस विद्रोह का यही मुख्य कारण है.
अब बलूचिस्तान के अलग देश होने की घोषणा कर दी गई है. अब देखना होगा कि दुनिया कब तक बलूचिस्तान को एक संप्रभू राष्ट्र के तौर पर मान्यता देती है. पाकिस्तानी दमन चक्र से बलूचों को कब मुक्ति मिलती है.