शंकराचार्य मंदिर का होगा कायाकल्प : केंद्र ने ₹1.21 करोड़ रूपये किए मंजूर

शंकराचार्य मंदिर के लिए केंद्र ने मंजूर की बड़ी परियोजना, श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधाओं के विकास पर खर्च होगी राशि

    11-अगस्त-2026
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Shankaracharya Temple Gets Rs 1.21 Crore Development Project
 
श्रीनगर के ऐतिहासिक शंकराचार्य मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए सुविधाएं बेहतर करने की तैयारी है। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए नेशनल कल्चर फंड (NCF) के तहत ₹1.21 करोड़ की परियोजना मंजूर की है। यह राशि मंदिर में visitor amenities यानी आगंतुक सुविधाओं के विकास पर खर्च की जाएगी। इसकी जानकारी सोमवार को लोकसभा में संस्कृति मंत्रालय की ओर से दी गई।
 
  
हालांकि, सरकार ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि इस राशि से कौन-कौन से खास काम कराए जाएंगे। इसलिए फिलहाल किसी नई सुविधा, निर्माण या दूसरी व्यवस्था को इस परियोजना का हिस्सा बताना जल्दबाजी होगी। इतना जरूर साफ है कि योजना का उद्देश्य ऐतिहासिक मंदिर के संरक्षण के साथ यहां आने वाले लोगों की सुविधाओं को बेहतर करना है। 
 
 
शंकराचार्य मंदिर तक पहुँचने का अनुभव 
 
 
शंकराचार्य मंदिर श्रीनगर शहर से करीब 1,000 फीट ऊपर एक पहाड़ी पर स्थित है। मंदिर तक पहुंचने के लिए करीब 244 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। ऊपर पहुंचने के बाद श्रीनगर शहर, डल झील और आसपास की पहाड़ियों का विस्तृत दृश्य दिखाई देता है। यही वजह है कि मंदिर की यात्रा केवल पूजा और दर्शन तक सीमित नहीं रहती। यहां पहुंचने से लेकर वापस लौटने तक का पूरा अनुभव श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में आगंतुक सुविधाओं का विकास इस ऐतिहासिक स्थल को देखने आने वाले लोगों के अनुभव को बेहतर बना सकता है।
 
 
Shankaracharya Temple Gets Rs 1.21 Crore Development Project
 शंकराचार्य मंदिर से कश्मीर घाटी का मनोरम दृश्य 
 
 
₹1.21 करोड़ से आखिर क्या बदलेगा?
 
 
फिलहाल इसका पूरा जवाब सामने नहीं आया है। संस्कृति मंत्रालय की ओर से परियोजना को “Development of Visitor Amenities” के रूप में बताया गया है, लेकिन उपलब्ध जानकारी में यह नहीं बताया गया कि राशि का इस्तेमाल किन-किन सुविधाओं पर किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि अभी यह दावा करना सही नहीं होगा कि परियोजना के तहत नए शौचालय, पेयजल व्यवस्था, बैठने की जगह, रास्तों या किसी दूसरी विशेष सुविधा का निर्माण निश्चित रूप से होगा। विस्तृत कार्ययोजना सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि ₹1.21 करोड़ से जमीन पर क्या-क्या बदलाव किए जाएंगे। यह पहल फिलहाल दो चीजों को साथ लेकर चलने की कोशिश के रूप में देखी जा सकती है - धरोहर का संरक्षण और पर्यटकों की सुविधा।
 
 
पहले से ASI के संरक्षण में है मंदिर
 
 
शंकराचार्य मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानि ASI के संरक्षण में आने वाले ऐतिहासिक स्मारकों में शामिल है। ASI देशभर में ऐसे स्मारकों की स्थिति का नियमित आकलन करता है और जरूरत के अनुसार संरक्षण, रखरखाव और विकास से जुड़े काम करता है। यहां एक बात समझना जरूरी है कि 'National Culture Fund' खुद किसी स्मारक को संरक्षित घोषित नहीं करता। NCF, ASI के संरक्षण में आने वाले चुनिंदा स्मारकों और सांस्कृतिक धरोहर स्थलों के संरक्षण, नवीनीकरण और विकास के लिए वित्तीय सहायता देता है। इसलिए शंकराचार्य मंदिर को मिली ₹1.21 करोड़ की राशि का मतलब यह नहीं है कि मंदिर को अब संरक्षण का दर्जा मिला है। मंदिर पहले से ASI के संरक्षण में है और नई राशि उसके विकास से जुड़े कामों के लिए मंजूर हुई है।
 
 
Shankaracharya Temple Gets Rs 1.21 Crore Development Project
 
 
J&K की धरोहरों पर लगातार हो रहा खर्च
 
 
शंकराचार्य मंदिर के लिए मंजूर यह परियोजना जम्मू-कश्मीर में ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण पर किए जा रहे खर्च की बड़ी तस्वीर का भी हिस्सा है।
 
 
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2023-24 में ASI के श्रीनगर सर्किल को ₹7.17 करोड़ आवंटित किए गए थे और पूरी राशि खर्च हुई। 2024-25 में ₹4.90 करोड़ आवंटित किए गए, जिसमें से ₹4.89 करोड़ खर्च हुए।
 
 
वहीं, 2025-26 में ₹5.95 करोड़ आवंटित किए गए और पूरी राशि खर्च की गई। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में श्रीनगर सर्किल के लिए ₹4.70 करोड़ का प्रावधान है। इसमें से 5 अगस्त 2026 तक ₹2.12 करोड़ खर्च किए जा चुके थे।
 
 
इन आंकड़ों से पता चलता है कि जम्मू-कश्मीर की संरक्षित ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और विकास के लिए लगातार संसाधन लगाए जा रहे हैं।
 
 
सिर्फ इमारत बचाना ही संरक्षण नहीं
 
 
आज किसी ऐतिहासिक स्थल के संरक्षण का मतलब केवल उसकी पुरानी दीवारों और स्थापत्य को सुरक्षित रखना नहीं है। उतना ही जरूरी यह भी है कि वहां आने वाले लोग उस विरासत को आसानी से समझ और अनुभव कर सकें। इसी दिशा में ASI देशभर के संरक्षित स्मारकों पर पीने के पानी, शौचालय, दिव्यांगों के लिए सुविधाएं, व्हीलचेयर, CCTV और QR कोड आधारित सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है। इसके अलावा हेरिटेज वॉक, व्याख्यान, चित्रकला प्रतियोगिता, फोटो प्रदर्शनी और स्थानीय समुदायों के साथ संवाद जैसे कार्यक्रमों के जरिए लोगों को अपनी विरासत से जोड़ने का प्रयास भी किया जा रहा है।
 
 
अब विस्तृत योजना पर नजर
 
 
शंकराचार्य मंदिर के लिए ₹1.21 करोड़ की मंजूरी निश्चित तौर पर एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इस परियोजना की असली तस्वीर विस्तृत कार्ययोजना सामने आने के बाद ही साफ होगी। तब पता चलेगा कि राशि का कितना हिस्सा किस सुविधा पर खर्च किया जाएगा और काम कब तक पूरा होगा। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि श्रीनगर की इस ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखने के साथ-साथ यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने की दिशा में कदम उठाया गया है।
 
 
शंकराचार्य मंदिर की पहचान सदियों पुरानी है। अब चुनौती यह है कि उसकी ऐतिहासिक पहचान को बिना बदले, आधुनिक दौर की जरूरतों के मुताबिक यहां आने वाले लोगों के लिए सुविधाएं बेहतर की जाएं। यही इस ₹1.21 करोड़ की परियोजना की सबसे बड़ी उम्मीद है।