कश्मीरी हिन्दू सरला भट्ट के बाद सर्वानंद कौल प्रेमी के परिवार को भी इंसाफ की उम्मीद, 36 साल बाद SIA ने शुरू की कार्रवाई
12-अगस्त-2026
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36 साल लंबा इंतजार..एक ऐसा इंतजार जिसमें सवाल वही रहा, कश्मीरी हिन्दू सर्वानंद कौल प्रेमी और उनके बेटे वीरेंद्र कौल के हत्यारों को आखिर कब न्याय के कटघरे तक लाया जाएगा? बहरहाल, अब इस 36 साल पुराने हत्याकांड मामले में जम्मू-कश्मीर की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) की कार्रवाई ने परिवार को एक नई उम्मीद दी है।
एजेंसी ने मामले की जांच के सिलसिले में जम्मू-कश्मीर में नौ स्थानों पर छापेमारी की है। SIA की टीमें राजौरी जिले में छह स्थानों, जम्मू में दो और कश्मीर में एक स्थान पर पहुंचीं। यह कार्रवाई अनंतनाग के डोरू थाने में पहले दर्ज की गई FIR के सिलसिले में की गई है।
हत्याकांड की कहानी
कश्मीरी हिन्दू लेखक, स्वतंत्रता सेनानी और शिक्षाविद् सर्वानंद कौल प्रेमी और उनके 27 वर्षीय बेटे वीरेंद्र कौल की 30 अप्रैल 1990 में हत्या कर दी गई थी। दरअसल, 29 अप्रैल 1990 की शाम 3 आतंकी सर्वानन्द कौल ‘प्रेमी’ के घर पहुंचे। उन्होंने कुछ बातचीत की और घर की महिलाओं से उनके गहने इत्यादि मूल्यवान वस्तुएं लाने को कहा, डरी सहमी महिलाओं ने सब कुछ निकालकर दे दिया। सारे गहने जेवरात और कीमती सामान एक सूटकेस में भरा गया फिर उन आतंकियों ने सर्वानन्द और उनके बेटे वीरेंद्र कौल को भी अपने साथ अगवा कर ले गए। परिवार इस उम्मीद में था कि वे वापस आएंगे लेकिन अगले ही दिन यानि 30 अप्रैल 1990 को पुलिस को उनकी लाशें अनंतनाग में चिनार के पेड़ से लटकती हुई मिलीं।
सर्वानंद कौल अपने माथे पर भौहों के मध्य जिस स्थान पर तिलक लगाते थे आतंकियों ने वहाँ कील ठोंक दी थी। पिता-पुत्र को गोलियों से छलनी तो किया ही गया था इसके अतिरिक्त शरीर की हड्डियाँ तोड़ दी गयी थीं और जगह-जगह उन्हें सिगरेट से दागा भी गया था। सर्वानन्द कौल ने अपने जीवित रहते सेकुलरिज्म को धर्म मानकर काम किया था। लेकिन वे जीते जी यह नहीं समझ पाए थे कि शैतान की आयतों को रटने वाले सेकुलरिज्म का मर्म नहीं समझते। मामले में FIR 45/1990, पुलिस स्टेशन डोरू दर्ज की गई थी। जिसकी जांच अब SIA कर रही है।
सरला भट्ट मामले से जगी उम्मीद
हाल ही में 1990 में कश्मीरी हिंदू नर्स सरला भट्ट की हत्या के मामले में SIA ने 737 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। इसमें तत्कालीन JKLF प्रमुख यासीन मलिक समेत पांच आतंकियों को आरोपी बनाया गया है। हालांकि इनमें से तीन आरोपियों की मौत हो चुकी है, जबकि एक आरोपी फरार बताया गया है।
सरला भट्ट के मामले में 36 साल बाद हुई इस कार्रवाई ने उन परिवारों के भीतर भी उम्मीद जगाई है, जिनके परिवार के सदस्य 1990 के आतंकवाद में मारे गए और जिनके मामलों की जांच वर्षों तक आगे नहीं बढ़ सकी।
सर्वानंद कौल प्रेमी का परिवार भी अब यही चाहता है कि उनके और वीरेंद्र कौल के हत्याकांड में जांच सिर्फ छापेमारी तक सीमित न रहे, बल्कि दोषियों की पहचान, आरोप तय करने और उन्हें कानून के सामने लाने तक पहुंचे।
36 साल बाद उठे कदम ने एक पुराना सवाल फिर सामने ला दिया है क्या अब प्रेमी परिवार को भी वह न्याय मिलेगा, जिसका इंतजार एक पूरी पीढ़ी ने किया है?