शहजाद भट्टी गैंग पर भारत का बड़ा प्रहार: 14 राज्यों में 253 ऑपरेटिव्स गिरफ्तार, अमित शाह के खुलासे से बौखलाया पाकिस्तान

    18-अगस्त-2026
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Shahzad Bhatti Gang
 
 
स्वतंत्रता दिवस से पहले भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान से जुड़े एक बड़े आतंकी नेटवर्क पर करारा प्रहार किया। 12 अगस्त को 14 राज्यों में एक साथ कार्रवाई की गई और 253 ऑपरेटिव्स को गिरफ्तार किया गया। इस नेटवर्क से जुड़े मामलों में 80 से ज्यादा FIR दर्ज होने की बात सामने आई है।
 
सबसे ज्यादा कार्रवाई उत्तर प्रदेश में हुई, जहां 62 ऑपरेटिव्स पकड़े गए। इसके बाद हरियाणा में 52, दिल्ली में 51 और पंजाब में 44 लोगों पर कार्रवाई हुई। राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड समेत कई अन्य राज्यों में भी नेटवर्क से जुड़े ऑपरेटिव्स को पकड़ा गया।
 

अमित शाह ने बताया- ISI समर्थित था नेटवर्क

 
गृह मंत्री अमित शाह ने 17 अगस्त को इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए कहा कि सुरक्षा बलों ने ISI समर्थित शहजाद भट्टी नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया है। उन्होंने बताया कि 200 से ज्यादा ऑपरेटिव्स को गिरफ्तार कर स्वतंत्रता दिवस के आसपास होने वाली संभावित साजिश को नाकाम किया गया।
 
 
कार्रवाई के दौरान IED, पिस्टल, जिंदा कारतूस और पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री के निशान वाले ग्रेनेड बरामद होने की जानकारी भी सामने आई है। सुरक्षा एजेंसियों को निगरानी में इस्तेमाल होने वाले कैमरे भी मिले हैं। यानी यह सिर्फ अपराधियों की धरपकड़ नहीं थी। जांच में सामने आए इनपुट ने सुरक्षा एजेंसियों को एक ऐसे नेटवर्क तक पहुंचाया, जिस पर भारत में हिंसा और आतंकी गतिविधियों की तैयारी का आरोप है।
 
 
 
 

कौन है शहजाद भट्टी?

 
शहजाद भट्टी पाकिस्तान का गैंगस्टर और सोशल मीडिया पर सक्रिय चेहरा है। करीब 45 साल के भट्टी ने सोशल मीडिया पर ‘333’ नाम से अपनी पहचान बनाई और भारत-पाकिस्तान संबंधों, धार्मिक विवादों और दूसरे मुद्दों पर वीडियो बनाकर बड़ी फॉलोइंग तैयार की। लेकिन भारतीय एजेंसियों के अनुसार सोशल मीडिया उसकी असली ताकत कुछ और थी। इसी माध्यम से वह भारत के युवाओं तक पहुंच बनाने और उन्हें अपने नेटवर्क में जोड़ने की कोशिश कर रहा था।
 

कैसे करता था आंतकी नेटवर्क को ऑपरेट?

 
जांच एजेंसियों के अनुसार भट्टी नेटवर्क आर्थिक रूप से कमजोर, नशे की गिरफ्त में आए या अपराध की दुनिया से प्रभावित युवाओं को निशाना बनाता था। पहले सोशल मीडिया के जरिए संपर्क और फिर धीरे-धीरे उन्हें नेटवर्क के लिए इस्तेमाल करता था। कुछ ऑपरेटिव्स से रेकी, हथियार पहुंचाने और दूसरे छोटे-मोटे काम करवाए जाते थे। यानी पाकिस्तान ने आतंक का एक पुराना तरीका बदलकर उसे सोशल मीडिया और स्थानीय अपराधी नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश की।
 

भारत में पहले भी सामने आ चुका है नाम

शहजाद भट्टी का नाम भारतीय एजेंसियों की जांच में पहली बार नहीं आया है। पिछले कुछ समय में पंजाब, हरियाणा और दूसरे राज्यों में हुए ग्रेनेड और विस्फोट से जुड़े मामलों में उसका नाम सामने आया है। NIA और दूसरी एजेंसियां उसके नेटवर्क से जुड़े मामलों की जांच कर रही हैं। मई 2026 में दिल्ली पुलिस ने भी ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया था, जिन पर भट्टी के नेटवर्क से जुड़े होने और दिल्ली-हरियाणा में संभावित ठिकानों की रेकी करने का आरोप था। महाराष्ट्र में भी ATS ने उसके नेटवर्क से जुड़े ऑनलाइन संपर्कों की जांच के तहत बड़ी संख्या में ठिकानों पर कार्रवाई की थी। जांच एजेंसी का कहना था कि पाकिस्तान में बैठे गैंगस्टर सोशल मीडिया के जरिए भारतीय युवाओं को निशाना बना रहे थे।
 
 
 
 

पाकिस्तान का हमेशा की तरह इंकार, लेकिन सबूत दे रहे गवाही

 
भारत की कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने वही पुराना रुख अपनाया आरोपों से इनकार। हालांकि हमेशा की तरह पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इससे अपना पल्ला झाड़ लिया है।लेकिन कार्रवाई के दौरान बरामद हथियार-विस्फोटक पदार्थ समेत दूसरे सबूत चीख-चीख कर इस आतंकी नेटवर्क के पाकिस्तान कनेक्शन की गवाही दे रहे हैं। भारत की एजेंसियां सिर्फ बयान नहीं दे रही हैं। अलग-अलग राज्यों में मामले दर्ज हुए हैं, गिरफ्तारियां हुई हैं और हथियार-विस्फोटक बरामद किए गए हैं। अब जांच इस नेटवर्क के बाकी सदस्यों और सीमा पार बैठे हैंडलरों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
  

आतंक के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति

 
शहजाद भट्टी नेटवर्क पर कार्रवाई एक बड़ा संदेश है। आतंकवाद में सिर से लेकर पाँव तक डूबा पाकिस्तान भले ही अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार करे, लेकिन भारत में बैठे उसके आतंकी नेटवर्क और उसके ऑपरेटिव्स को एक साथ कई राज्यों में पकड़ लेना सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी सफलता है। सबसे अहम बात यह है कि 15 अगस्त से पहले संभावित साजिश को जमीन पर उतरने से पहले ही रोक दिया गया। 
 
पाकिस्तान सीमा पार से आतंक का खेल खेले या सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को बरगलाने की कोशिश करे भारत की सुरक्षा एजेंसियां अब उसके नेटवर्क को जड़ से पकड़ने में जुटी हैं। भट्टी का नेटवर्क टूट गया है, लेकिन जांच अभी खत्म नहीं हुई है। असली लक्ष्य अब उन लोगों और चैनलों तक पहुंचना है, जो पाकिस्तान में बैठकर भारत के खिलाफ इस पूरे खेल को चला रहे हैं।